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मंदिर सजे, तैयारियां पूरी, आज होगा बम भोले का जलाभिषेक
ब्यूरो कैथल
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:40 AM IST
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हरिद्वार से आई सबसे बड़ी कांवड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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महाशिव रात्रि का पर्व शहर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। जलाभिषेक के लिए कावड़ियों का आना शुरू हो गया है। सोमवार शिवरात्रि के दिन सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर जलाभिषेक शुरू होगा। श्रद्धालु पूरा दिन जलाभिषेक कर सकेंगे है। सुबह 7.30 मिनट से लेकर 9 बजकर 30 मिनट तक राहु काल है। जिसमें जलाभिषेक निषेध माना जा रहा है।
श्री ग्यारह रूद्री मंदिर, शिव शक्ति धाम, हनुमान वाटिका, शिव मंदिर हुडा, अंबकेश्वर मंदिर शिव रात्रि पर्व के लिए सजाया गया है। कांवड़ियों की सुविधा के लिए जिला पुलिस प्रशासन ने कुरुक्षेत्र रोड पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए है। कुरुक्षेत्र पर बड़े वाहनों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ग्यारह रूद्री मंदिर में कांवड़ियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। जहां पर जिले भर से आने वाले श्रद्धालु रात को आराम कर सकते हैं। पंडित प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि सोमवार सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर जलाभिषेक किया जाएगा।
कांवड़ियों व श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
शिवरात्री पर कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा समुचित प्रबंधन कर ड्यूटियां लगाई गई है। कैथल से कुरुक्षेत्र जाने वाली बसों को वाया पेहोवा जाने के निर्देश दिए गए हैं। 25 पीसीआर व राइडरों को विशेष गस्त करने के अतिरिक्त 9 विभिन्न बिदुओं पर पुलिस नाकाबंदी की गई है ताकी कोई अप्रिय घटना न हो सके। दुर्घटना से निपटने के लिए 2 एंबुलेंस व डॉक्टर तैनात किए गए हैं। मंदिरों के आसपास महिला व पुरुष पुलिस कर्मचारियों की सादे कपड़ों मे ड्यूटी लगाई गई है।
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एसपी सुमेर प्रताप सिंह ने बताया कि हरिद्वार व नीलकंठ से बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़िए गंगाजल लेकर आने लगे हैं जो 31 जुलाई की अर्धरात्रि से विभिन्न मंदिरों में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाना शुरू कर देंगे। 30 जुलाई शाम से एक अगस्त तक कैथल से कुरुक्षेत्र की तरफ जाने-आने वाली बसें वाया ढाड़ नहीं चलेंगी, जिसके लिए जीएम रोडवेज को वाया पिहोवा चलाने के लिए कहा गया है। ताकि किसी कांवड़िए के साथ दुर्घटना जैसी अप्रिय घटना घटित न हो सके।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा
डडवाना रोड ढांड, पंचमुखी चौक ढांड, फरल चौक पुंडरी, ढांड रोड बाईपास कैथल, करनाल रोड बाईपास कैथल, जींद रोड बाईपास कैथल, तीतरम मोड तीतरम, मेन रोड बात्ता नजदीक गौशाला, तथा कैंची चौक कलायत पर विशेष नाके लगाए गए हैं। कांवड़ियों के रास्ते में पीसीआर 9 गांव पबनावा से सोलु माजरा तक, राईडर 13 सोलु माजरा से पबनावा तक, पीसीआर 5 सोलु माजरा से ढांड रोड बाईपास तक, राईडर 21 ढांड रोड बाईपास कैथल से तीतरम मोड़ तक, पीसीआर 3 ढांड बाईपास कैथल से तीतरम मोड़ तक, राईडर 1 तीतरम मोड़ से ढांड बाईपास तक ड्यूटी लगाई गई है। इसी प्रकार से पूरे जिले में पीसीआर को एरिया बांट दिया गया है। मंदिरों के आसपास सादे कपड़ों में महिला व पुरुष कर्मचारी तैनात किए गये हैं जो असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखेंगे। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तहसीलदार कैथल, पुंडरी, गुहला, नायब तहसीलदार राजौंद, ढांड, कलायत व सीवन को अपने-अपने क्षेत्र में बतौर डयूटी मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है। जिले के चारों डीएसपी निर्धारित किए गए क्षेत्र अनुसार निरंतर देख-रेख व चेकिंग करेंगे।
अभिषेक के लिए सजाए गए महाकाल
कलायत के निकट गांव खंडालवा में स्थित पौराणिक स्वयंभू शिव मंदिर को आकर्षक रूप से सजाये जाने व मेले की तैयारियों को प्रबंध समिति द्वारा अंतिम रूप दिया जा चुका है। मंदिर के मुख्य महंत गिरिजा गिरी व मौनी शर्मा ने बताया कि हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था की गई है। सुबह से महाकांत का जलाभिषेक आरंभ हो जाएगा। प्रबंध समिति में शामिल पूर्व सरपंच देवव्रत शर्मा, पप्पू पहलवान, मेवा सिंह जुलानीखेडा, ओमप्रकाश पूर्व सरपंच, रघुबीर फौजी, बलवंत सिंह, सतीश शर्मा द्वारा यात्रियों के रहने, खाने पीने के साथ भोले बाबा को निर्विघ्न जलाभिषेक के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
शिवरात्रि व्रत का विधान
महा शिवरात्रि व्रत के विधान के बारे में पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि त्रयोदशी को एक बार भोजन करके चतुर्दशी को निराहार रहना होता है। कलश को शुद्ध जल से भर कर रोली, मोली, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन, दूध, घी, शहद, कमलगट्टा, धतूरा, बेलपत्र को अर्पित करके पूजा करने का विधान है। उन्होंने बताया कि शिवरात्रि का मतलब है पूरी रात्रि का जागरण। रात को जागरण करके चार बार शिव आरती करनी चाहिए। अगले दिन प्रात: जौं, तिल खीर तथा बेलपत्र का हवन करके ब्राह्मणों को भोजन करवा कर व्रत का पारण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि भगवान शंकर पर चढ़ाया गया नैवेद्य को खाना निषिद्ध है।
हांसी बुटाना लिंक नहर के निकट लगाया भंडारा
शिव कांवड़ सेवा ट्रस्ट द्वारा हांसी बुटाना नहर के पास कांवड़ शिविर लगा कर शिव भक्तों की सेवा की गई। सावन के पंचमी से शिवरात्रि तक भंडारे का आयोजन किया गया। यह तीसरा विशाल भंडारे के तौर पर मनाया गया। इस मौके पर संस्थापक, प्रधान राजेश कुमार, राजेंद्र बंसल, ओमप्रकाश, अनिल व अन्य शिव भक्त मौजूद रहे।
फोटो संख्या 23
राजौंद में भी भंडारे का आयोजन
राजौंद। नगर के असंध रोड पर स्थित नहर के पुल पर कांवड़ियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें शिव भक्तों के लिए खाने पीने के अलावा ठहराने, नहाने की विशेष व्यवस्था की गई थी। गांव बीर बांगडा निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से लगातार शिव भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन करते आ रहे है। रविवार को राजौंद में हरिद्वार से आई सबसे बड़ी कांवड़ नगर में चर्चा का विषय बनी रही। हरिद्वार से इस कावड़ को लेकर आए महाबीर, नरेश, अर्जुन, बिट्टू, बागेश ने बताया कि 25 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ लेकर चले थे और 1 अगस्त को खंडालवा के प्राचीन शिव मंदिर में कांवड़ ले जाकर जल चढ़ाया जाएगा। इस कांवड़ की चर्चा पूरा दिन नगर में होती रही। इसके अलावा एक ही परिवार के 5 भाई कांवड़ लेकर आए हैं जो खंडालवा के मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। इस दौरान शिविर संचालक मिस्त्री अजीत शर्मा, राजा, नाहर सिंह ढिल्लों, बिला, प्रदीप, जयकिशन, संजीव, अमित, मनजीत उर्फ काली आदि सेवादार सेवा में लगे हुए हैं।
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श्री ग्यारह रूद्री मंदिर, शिव शक्ति धाम, हनुमान वाटिका, शिव मंदिर हुडा, अंबकेश्वर मंदिर शिव रात्रि पर्व के लिए सजाया गया है। कांवड़ियों की सुविधा के लिए जिला पुलिस प्रशासन ने कुरुक्षेत्र रोड पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए है। कुरुक्षेत्र पर बड़े वाहनों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ग्यारह रूद्री मंदिर में कांवड़ियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। जहां पर जिले भर से आने वाले श्रद्धालु रात को आराम कर सकते हैं। पंडित प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि सोमवार सुबह 4 बजकर 20 मिनट पर जलाभिषेक किया जाएगा।
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कांवड़ियों व श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
शिवरात्री पर कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए पुलिस द्वारा समुचित प्रबंधन कर ड्यूटियां लगाई गई है। कैथल से कुरुक्षेत्र जाने वाली बसों को वाया पेहोवा जाने के निर्देश दिए गए हैं। 25 पीसीआर व राइडरों को विशेष गस्त करने के अतिरिक्त 9 विभिन्न बिदुओं पर पुलिस नाकाबंदी की गई है ताकी कोई अप्रिय घटना न हो सके। दुर्घटना से निपटने के लिए 2 एंबुलेंस व डॉक्टर तैनात किए गए हैं। मंदिरों के आसपास महिला व पुरुष पुलिस कर्मचारियों की सादे कपड़ों मे ड्यूटी लगाई गई है।
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एसपी सुमेर प्रताप सिंह ने बताया कि हरिद्वार व नीलकंठ से बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़िए गंगाजल लेकर आने लगे हैं जो 31 जुलाई की अर्धरात्रि से विभिन्न मंदिरों में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाना शुरू कर देंगे। 30 जुलाई शाम से एक अगस्त तक कैथल से कुरुक्षेत्र की तरफ जाने-आने वाली बसें वाया ढाड़ नहीं चलेंगी, जिसके लिए जीएम रोडवेज को वाया पिहोवा चलाने के लिए कहा गया है। ताकि किसी कांवड़िए के साथ दुर्घटना जैसी अप्रिय घटना घटित न हो सके।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा
डडवाना रोड ढांड, पंचमुखी चौक ढांड, फरल चौक पुंडरी, ढांड रोड बाईपास कैथल, करनाल रोड बाईपास कैथल, जींद रोड बाईपास कैथल, तीतरम मोड तीतरम, मेन रोड बात्ता नजदीक गौशाला, तथा कैंची चौक कलायत पर विशेष नाके लगाए गए हैं। कांवड़ियों के रास्ते में पीसीआर 9 गांव पबनावा से सोलु माजरा तक, राईडर 13 सोलु माजरा से पबनावा तक, पीसीआर 5 सोलु माजरा से ढांड रोड बाईपास तक, राईडर 21 ढांड रोड बाईपास कैथल से तीतरम मोड़ तक, पीसीआर 3 ढांड बाईपास कैथल से तीतरम मोड़ तक, राईडर 1 तीतरम मोड़ से ढांड बाईपास तक ड्यूटी लगाई गई है। इसी प्रकार से पूरे जिले में पीसीआर को एरिया बांट दिया गया है। मंदिरों के आसपास सादे कपड़ों में महिला व पुरुष कर्मचारी तैनात किए गये हैं जो असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखेंगे। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तहसीलदार कैथल, पुंडरी, गुहला, नायब तहसीलदार राजौंद, ढांड, कलायत व सीवन को अपने-अपने क्षेत्र में बतौर डयूटी मजिस्ट्रेट तैनात किया गया है। जिले के चारों डीएसपी निर्धारित किए गए क्षेत्र अनुसार निरंतर देख-रेख व चेकिंग करेंगे।
अभिषेक के लिए सजाए गए महाकाल
कलायत के निकट गांव खंडालवा में स्थित पौराणिक स्वयंभू शिव मंदिर को आकर्षक रूप से सजाये जाने व मेले की तैयारियों को प्रबंध समिति द्वारा अंतिम रूप दिया जा चुका है। मंदिर के मुख्य महंत गिरिजा गिरी व मौनी शर्मा ने बताया कि हजारों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने व खाने पीने की व्यवस्था की गई है। सुबह से महाकांत का जलाभिषेक आरंभ हो जाएगा। प्रबंध समिति में शामिल पूर्व सरपंच देवव्रत शर्मा, पप्पू पहलवान, मेवा सिंह जुलानीखेडा, ओमप्रकाश पूर्व सरपंच, रघुबीर फौजी, बलवंत सिंह, सतीश शर्मा द्वारा यात्रियों के रहने, खाने पीने के साथ भोले बाबा को निर्विघ्न जलाभिषेक के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
शिवरात्रि व्रत का विधान
महा शिवरात्रि व्रत के विधान के बारे में पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि त्रयोदशी को एक बार भोजन करके चतुर्दशी को निराहार रहना होता है। कलश को शुद्ध जल से भर कर रोली, मोली, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, चंदन, दूध, घी, शहद, कमलगट्टा, धतूरा, बेलपत्र को अर्पित करके पूजा करने का विधान है। उन्होंने बताया कि शिवरात्रि का मतलब है पूरी रात्रि का जागरण। रात को जागरण करके चार बार शिव आरती करनी चाहिए। अगले दिन प्रात: जौं, तिल खीर तथा बेलपत्र का हवन करके ब्राह्मणों को भोजन करवा कर व्रत का पारण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि भगवान शंकर पर चढ़ाया गया नैवेद्य को खाना निषिद्ध है।
हांसी बुटाना लिंक नहर के निकट लगाया भंडारा
शिव कांवड़ सेवा ट्रस्ट द्वारा हांसी बुटाना नहर के पास कांवड़ शिविर लगा कर शिव भक्तों की सेवा की गई। सावन के पंचमी से शिवरात्रि तक भंडारे का आयोजन किया गया। यह तीसरा विशाल भंडारे के तौर पर मनाया गया। इस मौके पर संस्थापक, प्रधान राजेश कुमार, राजेंद्र बंसल, ओमप्रकाश, अनिल व अन्य शिव भक्त मौजूद रहे।
फोटो संख्या 23
राजौंद में भी भंडारे का आयोजन
राजौंद। नगर के असंध रोड पर स्थित नहर के पुल पर कांवड़ियों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें शिव भक्तों के लिए खाने पीने के अलावा ठहराने, नहाने की विशेष व्यवस्था की गई थी। गांव बीर बांगडा निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि वह पिछले 20 वर्षों से लगातार शिव भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन करते आ रहे है। रविवार को राजौंद में हरिद्वार से आई सबसे बड़ी कांवड़ नगर में चर्चा का विषय बनी रही। हरिद्वार से इस कावड़ को लेकर आए महाबीर, नरेश, अर्जुन, बिट्टू, बागेश ने बताया कि 25 जुलाई को हरिद्वार से कांवड़ लेकर चले थे और 1 अगस्त को खंडालवा के प्राचीन शिव मंदिर में कांवड़ ले जाकर जल चढ़ाया जाएगा। इस कांवड़ की चर्चा पूरा दिन नगर में होती रही। इसके अलावा एक ही परिवार के 5 भाई कांवड़ लेकर आए हैं जो खंडालवा के मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। इस दौरान शिविर संचालक मिस्त्री अजीत शर्मा, राजा, नाहर सिंह ढिल्लों, बिला, प्रदीप, जयकिशन, संजीव, अमित, मनजीत उर्फ काली आदि सेवादार सेवा में लगे हुए हैं।