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गुहला में गेस्ट टीचर्स का अर्धनग्न प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sun, 05 Jul 2015 12:08 AM IST
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गुहला-चीका। अतिथि अध्यापकों ने गुहला में सरकार के खिलाफ अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। जिले भर से थाली-चम्मच के साथ प्रदर्शन में पहुंचे अध्यापकों का नेतृत्व अतिथि अध्यापक संघ जिला कैथल के प्रधान सुभाष चंद ने किया। अतिथि अध्यापक सुबह नए बस स्टेंड के प्रांगण में एकत्रित हुए। जहां से दो बजे प्रदर्शन शुरू हुआ। विधायक कुलवंत बाजीगर के निवास की ओर कूच कर रहे अध्यापकों को आवास से पहले ही रोक लिया गया। पुलिस के साथ हलकी झड़प हुई।
बस अड्डा परिसर में अध्यापकों ने प्रदर्शन से पूर्व सभा का आयोजन किया। अतिथि अध्यापक संघ के प्रधान सुभाष चंद ने कहा, सरकार को अतिथि अध्यापकों के रोजगार को छीनने की कार्रवाई भारी पड़ेगी। अतिथि अध्यापकों के बल पर ही भाजपा सरकार आज सत्ता में आई है। परंतु सत्ता के नशे में चूर भाजपा सरकार अब अध्यापकों को पक्का करने की अपेक्षा लाठी व गोलियों की सौगात दे रही है। उन्होंने कहा कि इससे हैरानी वाली बात क्या होगी कि जिन लोगों ने चुनावों में भाजपा का विरोध किया, उन्हें सरकार रोजगार देने का तानाबाना बुन रही है।
महिला विंग की जिला कार्यकारिणी सदस्य रामरती देवी, गुहला ब्लाक प्रधान विनोद शर्मा, राज्य संगठन सचिव सुखविंद्र बरसाना, देवेंद्र, नरेंद्र, मनोज, रमेश, विकास, रावेश, सुशील, भूपेंद्र सिंह रमेश गुलियाना, श्याम लाल, सतीश, कमलेश, कृष्ण शर्मा, अंजू, सुनीता, सुशीला, आशा व ऋचा शर्मा ने अतिथि अध्यापकों को संबोधित किया।
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हल निकालेंगे : बाजीगर
अतिथि अध्यापकों का ज्ञापन लेने के बाद हलका भाजपा विधायक कुलवंत बाजीगर ने उन्हें आश्वस्त किया कि पहले भी वे उनका समर्थन कर चुके हैं और अब भी उनकी दिली इच्छा है कि वे नौकरी पर बहाल हों। परंतु साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अकेले सरकार नहीं हैं। उनकी आवाज को वे उनका वकील बनकर सरकार तक पहुंचाने का काम अवश्य करेंगे। बाजीगर ने कहा कि हालांकि अतिथि अध्यापकों की समस्या सरकार के संज्ञान में पहले से ही है और जितना भी सरकार उनके पक्ष में कुछ कर सकेगी, उसे अवश्य किया जाएगा।
अमर उजाला लाइव पर पाठकों के संदेश
सीवन से एडवोकेट महेंद्र सिंह का कहना है कि अतिथि अध्यापकों को हटाए जाने पर पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई है। सरकारी स्कूलों में बच्चे ही नहीं है। सीवन में आकर देखिए, छोटे से निजी स्कूल में 1200 बच्चे हैं। जबकि प्राथमिक पाठशाला में केवल 150 बच्चे। अतिथि अध्यापकों को नियुक्त करने वालों के खिलाफ ही केस दर्ज होना चाहिए।
गांव संगरौली के जयभगवान ने कहा कि गांव में अध्यापकों को हटाने के बाद पढ़ाई प्रभावित हो गई है। बच्चे खाली बैठे रहते हैं। सरकार को अध्यापकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
गांव बालू से सुरेश कुमार ने कहा कि गांव में 20 अतिथि अध्यापक थे। कुछ हटा दिए गए। कुछ हड़ताल पर हैं। करीब 500 से ज्यादा बच्चे खाली बैठने को मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि अध्यापकों की व्यवस्था करे।
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बस अड्डा परिसर में अध्यापकों ने प्रदर्शन से पूर्व सभा का आयोजन किया। अतिथि अध्यापक संघ के प्रधान सुभाष चंद ने कहा, सरकार को अतिथि अध्यापकों के रोजगार को छीनने की कार्रवाई भारी पड़ेगी। अतिथि अध्यापकों के बल पर ही भाजपा सरकार आज सत्ता में आई है। परंतु सत्ता के नशे में चूर भाजपा सरकार अब अध्यापकों को पक्का करने की अपेक्षा लाठी व गोलियों की सौगात दे रही है। उन्होंने कहा कि इससे हैरानी वाली बात क्या होगी कि जिन लोगों ने चुनावों में भाजपा का विरोध किया, उन्हें सरकार रोजगार देने का तानाबाना बुन रही है।
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महिला विंग की जिला कार्यकारिणी सदस्य रामरती देवी, गुहला ब्लाक प्रधान विनोद शर्मा, राज्य संगठन सचिव सुखविंद्र बरसाना, देवेंद्र, नरेंद्र, मनोज, रमेश, विकास, रावेश, सुशील, भूपेंद्र सिंह रमेश गुलियाना, श्याम लाल, सतीश, कमलेश, कृष्ण शर्मा, अंजू, सुनीता, सुशीला, आशा व ऋचा शर्मा ने अतिथि अध्यापकों को संबोधित किया।
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हल निकालेंगे : बाजीगर
अतिथि अध्यापकों का ज्ञापन लेने के बाद हलका भाजपा विधायक कुलवंत बाजीगर ने उन्हें आश्वस्त किया कि पहले भी वे उनका समर्थन कर चुके हैं और अब भी उनकी दिली इच्छा है कि वे नौकरी पर बहाल हों। परंतु साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अकेले सरकार नहीं हैं। उनकी आवाज को वे उनका वकील बनकर सरकार तक पहुंचाने का काम अवश्य करेंगे। बाजीगर ने कहा कि हालांकि अतिथि अध्यापकों की समस्या सरकार के संज्ञान में पहले से ही है और जितना भी सरकार उनके पक्ष में कुछ कर सकेगी, उसे अवश्य किया जाएगा।
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सीवन से एडवोकेट महेंद्र सिंह का कहना है कि अतिथि अध्यापकों को हटाए जाने पर पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई है। सरकारी स्कूलों में बच्चे ही नहीं है। सीवन में आकर देखिए, छोटे से निजी स्कूल में 1200 बच्चे हैं। जबकि प्राथमिक पाठशाला में केवल 150 बच्चे। अतिथि अध्यापकों को नियुक्त करने वालों के खिलाफ ही केस दर्ज होना चाहिए।
गांव संगरौली के जयभगवान ने कहा कि गांव में अध्यापकों को हटाने के बाद पढ़ाई प्रभावित हो गई है। बच्चे खाली बैठे रहते हैं। सरकार को अध्यापकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
गांव बालू से सुरेश कुमार ने कहा कि गांव में 20 अतिथि अध्यापक थे। कुछ हटा दिए गए। कुछ हड़ताल पर हैं। करीब 500 से ज्यादा बच्चे खाली बैठने को मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि अध्यापकों की व्यवस्था करे।