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Kaithal News: सावन बरसा थाल भर,गड़-गड़ थी आवाज, बूढ़ी बरखा साथ में...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Aug 2025 03:13 AM IST
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Sawan rained in full quantity, there was a gurgling sound, old rain was with it...Sawan rained in full quantity, there was a gurgling sound, old rain was with it...
आरकेएसडी कॉलेज में साहित्य सभा कैथल ने किया काव्य गोष्ठी का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज में रविवार को साहित्य सभा कैथल ने अगस्त माह की काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इस गोष्ठी को लेकर साहित्य सभा के प्रेस सचिव डाॅ. तेजिंद्र ने बताया कि गोष्ठी की अध्यक्षता साहित्य सभा के उप प्रधान, कवि एवं इतिहासकार कमलेश शर्मा ने की। काव्य-गोष्ठी में कविराज रामकुमार भारतीय अलेवा ने मुख्य अतिथि के रूप में व टोहाना से आए साहित्यकार विनोद सिल्ला ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया।
गोष्ठी का संचालन हरियाणवी और हिंदी के कवि रिसाल जांगड़ा ने किया। गोष्ठी के दौरान कवि मिट्ठू राम मंडल के प्रथम काव्य-संग्रह बिन पर परिंदे का लोकार्पण मुख्य अतिथि कविराज रामकुमार भारतीय, विशिष्ट अतिथि विनोद सिल्ला, गोष्ठी-अध्यक्ष कमलेश शर्मा और अन्य साहित्यकारों के कर-कमलों से हुआ।
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काव्य-गोष्ठी में सावन-भादों की बात करते हुए सुरेश कुमार कल्याण ने कहा कि सावन बरसा थाल भर,गड़-गड़ थी आवाज़। बूढ़ी बरखा साथ में, भादों का आगाज़। दिल से दिल के तार जुड़ने की बात रविंद्र रवि ने इक दिल से जब दूजा दिल जुड़ जाता है, गूंगे की आवाज को बहरा सुनता है।
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रक्षा-बंधन के धागे की महता बताते हुए चतरभुज बंसल सौथा ने कहा, रक्षा-बंधन का मतलब हो सै रक्षा की जुम्मेदारी। एक ताग्गै कै ऊपर देक्खो, टिकरे कितने नर-नारी।
संघर्ष को आवश्यक बताते हुए सावित्री धारीवाल ने कहा, कौन जीत सका है बोलो, बिना लड़े तकदीरों से।आजादी और शादी को लेकर डाॅ. तेजिंद्र ने कहा, वे कैसे कह सकते हैं कि मिल गई आज़ादी। पंद्रह अगस्त के दिन, जिनकी हुई थी शादी।
एक ग्रामीण पर शहरी प्रभाव का दुष्प्रभाव रामफल गौड़ की इन पंक्तियों में देखिए, रह्या था गाम का वो हीरो। आण शहर मैं होग्या जीरो।एक आदर्श घर का सपना पूजा रानी ने इन शब्दों में देखा, देखा मैंने एक सपना। ऐसा एक घर हो अपना। जहां सभी रहें मिलकर। न कोई डर न कोई फिकर।
देश की आजादी को लेकर रिसाल जांगड़ा का मुक्तक देखिए, देश पर मर-मिटने वाले याद रहेंगे।उन वीरों के कारण हम आबाद रहेंगे।हर क़ीमत पर कायम रखनी है आजादी, देश यदि आजाद रहा तो हम आजाद रहेंगे।
मिट्ठू राम मंडल ने अपने नव प्रकाशित काव्य-संग्रह बिन पर परिंदे का परिचय दिया और एक कविता के माध्यम से प्रश्न उठाया, कब तक खुद को कमजोर मानोगे। विशिष्ट अतिथि विनोद सिल्ला ने टोहाना में साधनारत साहित्यिक संस्था का परिचय दिया और दोहा-पाठ भी किया।
एक दोहे के माध्यम से उन्होंने उपस्थित-जनों को यह संदेश दिया, मीत बनों तो यूं बनो, जैसे खुश्बू फूल।एक दूसरे में बसे,खोकर अपना मूल। मुख्य अतिथि कविराज रामकुमार भारतीय ने आज की गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं की प्रशंसा कर रचनाकारों का उत्साह-वर्धन किया।
अपनी देश-भक्ति की भावना का परिचय उन्होंने इन शब्दों में दिया, न आग लिखता हूं न पानी लिखता हूं।सिर्फ सरहदों पर जलती जवानी लिखता हूं।अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी में कमलेश शर्मा ने नए उपस्थित रचनाकारों का उत्साह-वर्धन किया।

इस मौके पर काव्य-गोष्ठी में सतीश शर्मा,अनिल कौशिक,सतबीर सिंह जागलान, सोहन लाल शर्मा सोनी, पंडित श्याम सुंदर शर्मा गौड़, सतपाल पराशर आनंद, शमशेर कैंदल हमसफीर, दिलबाग अकेला, यात्री गंगा, प्रीतम लाल शर्मा, महेंद्र पाल सारस्वत, रजनीश शर्मा, डाॅ. विकास आनंद और आंचल मौजूद थी।
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