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खतरे में संस्कृत विश्वविद्यालय का निर्माण
ब्यूरो कैथल
Updated Fri, 16 Sep 2016 12:49 AM IST
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गांव मूंदड़ी का प्रवेश द्वार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांव मूंदड़ी में संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने का मामला खटाई में पड़ गया है। ग्राम पंचायत ने विश्वविद्यालय के लिए बीस एकड़ जमीन देने के लिए शर्तें लगा दी हैं। जबकि सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालय के लिए बिना शर्त जमीन चाहिए। फिलहाल इस प्रोजेक्ट को जमीन ना मिलने के कारण लंबित की श्रेणी में डाला जा चुका है। यदि जमीन को लेकर खींचतान जारी रही तो विश्वविद्यालय निर्माण का फैसला रद्द भी हो सकता है।
24 अक्टूबर 2015 को क्योड़क में आयोजित रैली में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एलान किया था कि गांव मूंदड़ी में संस्कृत विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाएगा। लवकुश तीर्थ के कारण विख्यात इस गांव में तीर्थ के चलते ही संस्कृत विश्वविद्यालय के निर्माण का एलान हुआ था। सीएम के एलान के बाद सरकार की ओर से प्रोजेक्ट के लिए अप्रूवल दे दी गई थी। लेकिन अब जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
ग्राम पंचायत ने लगाई तीन शर्तें, जब शर्तें हटाने को कहा तो एक और जोड़ दी
ग्राम पंचायत ने विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक 20 एकड़ जमीन देने के लिए शर्तें जोड़ दी हैं। जिसमें सबसे पहली शर्त विश्वविद्यालय के नाम में गांव मूंदड़ी का नाम रखे जाने की मांग की गई। दूसरा विश्वविद्यालय में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी में गांव के मूल निवासियों को नौकरी देने और 10 प्रतिशत सीटें गांव के बच्चों को दाखिले के लिए आरक्षित किए जाने की शर्त रखी गई। इन शर्तों को सरकार के पास भेजा गया तो सरकार ने शर्तें मानने से इंकार कर दिया। प्रशासन को पत्र जारी किया गया कि बिना शर्त का प्रस्ताव पंचायत से लिया जाए। इसके बाद ही विश्वविद्यालय का निर्माण होगा। वहीं जब पंचायत से शर्तें हटाने के लिए कहा गया तो पंचायत ने चौथी शर्त और जोड़ दी। जिसमें गांव की 20 एकड़ जमीन से होने वाली आमदनी खत्म होने के चलते हर साल 20 लाख रुपये एवं इसके बाद प्रत्येक वर्ष इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए विशेष ग्रांट गांव की पंचायत को दी जाए।
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अब देखना यह है कि सरकार इस संबंध में क्या फैसला लेती है। फिलहाल मुख्यमंत्री की इस घोषणा के लिए जमीन न मिलने के कारण लंबित श्रेणी में रखा गया है।
हम केवल हक मांग रहे
सरपंच बाला देवी की ओर से उनके प्रतिनिधि ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए 20 एकड़ जमीन दी जा रही है। जिसमें गांव के बच्चों को 10 प्रतिशत सीटों में आरक्षण, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरियां गांव के मूल निवासियों को देने व विश्वविद्यालय के नामकरण में गांव का नाम रखे जाने की मांग रखी गई है। साथ ही गांव की 20 एकड़ जमीन की आमदनी खत्म होगी तो गांव की पंचायत को इसकी एवज में हर साल 20 लाख रुपये एवं प्रत्येक वर्ष इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। ताकि गांव को आमदनी हो सके। गांव में 4 एकड़ जमीन बिजली घर को निशुल्क दी थी, लेकिन बिजली महज 6 घंटे मिलती है। यह गांव का हक है। हम केवल हक मांग रहे हैं।
ग्राम पंचायत द्वारा कुछ शर्तें लगाए जाने की जानकारी मिली है। लेकिन सरकार ने बिना किसी शर्त के जमीन देने का प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। ग्राम पंचायत से बातचीत करके ही अगला फैसला लिया जाएगा।
मनदीप कौर, एसडीएम, कैथल।
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24 अक्टूबर 2015 को क्योड़क में आयोजित रैली में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एलान किया था कि गांव मूंदड़ी में संस्कृत विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाएगा। लवकुश तीर्थ के कारण विख्यात इस गांव में तीर्थ के चलते ही संस्कृत विश्वविद्यालय के निर्माण का एलान हुआ था। सीएम के एलान के बाद सरकार की ओर से प्रोजेक्ट के लिए अप्रूवल दे दी गई थी। लेकिन अब जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
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ग्राम पंचायत ने लगाई तीन शर्तें, जब शर्तें हटाने को कहा तो एक और जोड़ दी
ग्राम पंचायत ने विश्वविद्यालय के लिए आवश्यक 20 एकड़ जमीन देने के लिए शर्तें जोड़ दी हैं। जिसमें सबसे पहली शर्त विश्वविद्यालय के नाम में गांव मूंदड़ी का नाम रखे जाने की मांग की गई। दूसरा विश्वविद्यालय में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी में गांव के मूल निवासियों को नौकरी देने और 10 प्रतिशत सीटें गांव के बच्चों को दाखिले के लिए आरक्षित किए जाने की शर्त रखी गई। इन शर्तों को सरकार के पास भेजा गया तो सरकार ने शर्तें मानने से इंकार कर दिया। प्रशासन को पत्र जारी किया गया कि बिना शर्त का प्रस्ताव पंचायत से लिया जाए। इसके बाद ही विश्वविद्यालय का निर्माण होगा। वहीं जब पंचायत से शर्तें हटाने के लिए कहा गया तो पंचायत ने चौथी शर्त और जोड़ दी। जिसमें गांव की 20 एकड़ जमीन से होने वाली आमदनी खत्म होने के चलते हर साल 20 लाख रुपये एवं इसके बाद प्रत्येक वर्ष इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए विशेष ग्रांट गांव की पंचायत को दी जाए।
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अब देखना यह है कि सरकार इस संबंध में क्या फैसला लेती है। फिलहाल मुख्यमंत्री की इस घोषणा के लिए जमीन न मिलने के कारण लंबित श्रेणी में रखा गया है।
हम केवल हक मांग रहे
सरपंच बाला देवी की ओर से उनके प्रतिनिधि ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए 20 एकड़ जमीन दी जा रही है। जिसमें गांव के बच्चों को 10 प्रतिशत सीटों में आरक्षण, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नौकरियां गांव के मूल निवासियों को देने व विश्वविद्यालय के नामकरण में गांव का नाम रखे जाने की मांग रखी गई है। साथ ही गांव की 20 एकड़ जमीन की आमदनी खत्म होगी तो गांव की पंचायत को इसकी एवज में हर साल 20 लाख रुपये एवं प्रत्येक वर्ष इसमें 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जानी चाहिए। ताकि गांव को आमदनी हो सके। गांव में 4 एकड़ जमीन बिजली घर को निशुल्क दी थी, लेकिन बिजली महज 6 घंटे मिलती है। यह गांव का हक है। हम केवल हक मांग रहे हैं।
ग्राम पंचायत द्वारा कुछ शर्तें लगाए जाने की जानकारी मिली है। लेकिन सरकार ने बिना किसी शर्त के जमीन देने का प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। ग्राम पंचायत से बातचीत करके ही अगला फैसला लिया जाएगा।
मनदीप कौर, एसडीएम, कैथल।