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Kaithal News: पूरे अगस्त महीने में मनाया जाएगा सुरक्षित जननी माह, स्वास्थ्य विभाग सोमवार से शुरू करेगा
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कैथल। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा ने अगस्त 2026 को सुरक्षित जननी माह के रूप में मनाने के निर्देश जारी किए हैं। मिशन निदेशक की ओर से सभी सिविल सर्जनों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि जिले और ब्लॉक स्तर पर माइक्रोप्लान तैयार कर प्रत्येक पंजीकृत गर्भवती महिला की कम से कम एक बार डॉक्टर से गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच सुनिश्चित कराई जाए।
अभियान के दौरान हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, समय पर उपचार और नियमित फॉलोअप पर विशेष फोकस रहेगा। निर्देशों के अनुसार सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार लगाई जाएगी, ताकि गर्भवतियों को अपने क्षेत्र से बाहर जांच के लिए न जाना पड़े। जांच के दिन ही सभी आवश्यक लैब जांच, दवाएं, आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां उपलब्ध कराई जाएंगी। जहां अल्ट्रासाउंड या लैब सुविधा नहीं होगी, वहां आउटसोर्स व्यवस्था की जा सकेगी। एनएचएम ने आशा कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र की सभी पंजीकृत गर्भवतियों को जांच शिविर तक लाने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर 112 एंबुलेंस सेवा का भी उपयोग किया जाएगा। जांच के दौरान जन्म की तैयारी, पोषण और प्रसव संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि प्रसव के बाद की माताओं की भी गुणवत्तापूर्ण जांच की जाएगी। जिन हाई रिस्क महिलाओं का प्रसव हो चुका है, उन्हें भी कम से कम एक बार स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना अनिवार्य होगा।
रोजाना 250 से 300 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य
अभियान के तहत प्रत्येक जिले को प्रतिदिन 250 से 300 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य दिया गया है। सभी जिलों को हर रोज रिपोर्ट भी भेजनी होगी और हाई रिस्क गर्भवतियों का पूरा विवरण पीएमएसएमए पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा।
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निर्देश मिले हैं और हाई रिस्क जो गर्भवती महिलाएं हैं, उनकी लिस्टिंग का कार्य किया जा रहा है और सोमवार से कैंपों का आयोजन किया जाएगा। पहले से भी गर्भवती महिलाओं की जांच रोजाना की जा रही है।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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अभियान के दौरान हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, समय पर उपचार और नियमित फॉलोअप पर विशेष फोकस रहेगा। निर्देशों के अनुसार सभी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार लगाई जाएगी, ताकि गर्भवतियों को अपने क्षेत्र से बाहर जांच के लिए न जाना पड़े। जांच के दिन ही सभी आवश्यक लैब जांच, दवाएं, आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की गोलियां उपलब्ध कराई जाएंगी। जहां अल्ट्रासाउंड या लैब सुविधा नहीं होगी, वहां आउटसोर्स व्यवस्था की जा सकेगी। एनएचएम ने आशा कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र की सभी पंजीकृत गर्भवतियों को जांच शिविर तक लाने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर 112 एंबुलेंस सेवा का भी उपयोग किया जाएगा। जांच के दौरान जन्म की तैयारी, पोषण और प्रसव संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि प्रसव के बाद की माताओं की भी गुणवत्तापूर्ण जांच की जाएगी। जिन हाई रिस्क महिलाओं का प्रसव हो चुका है, उन्हें भी कम से कम एक बार स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना अनिवार्य होगा।
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रोजाना 250 से 300 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य
अभियान के तहत प्रत्येक जिले को प्रतिदिन 250 से 300 गर्भवती महिलाओं की जांच का लक्ष्य दिया गया है। सभी जिलों को हर रोज रिपोर्ट भी भेजनी होगी और हाई रिस्क गर्भवतियों का पूरा विवरण पीएमएसएमए पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा।
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निर्देश मिले हैं और हाई रिस्क जो गर्भवती महिलाएं हैं, उनकी लिस्टिंग का कार्य किया जा रहा है और सोमवार से कैंपों का आयोजन किया जाएगा। पहले से भी गर्भवती महिलाओं की जांच रोजाना की जा रही है।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।