{"_id":"6ad3c158aa70b137a10c8454","slug":"sacks-on-the-platforms-and-paddy-on-the-roads-awaiting-the-lifting-of-108-lakh-mt-kaithal-news-c-245-1-kht1013-156707-2026-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: फड़ों पर बोरियां और सड़कों पर धान, 1.08 लाख एमटी के उठान का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: फड़ों पर बोरियां और सड़कों पर धान, 1.08 लाख एमटी के उठान का इंतजार
विज्ञापन
कैथल की नई मंडी में सड़क पर डाला गया धान। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। धान की खरीद के बाद समय पर उठान नहीं होने से अनाज मंडियों में व्यवस्था चरमराने लगी है। मंडियों के फड़ धान की बोरियों से भरे पड़े हैं और रास्तों पर भी जगह नहीं बची है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल सुखाने के लिए सड़कों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में उठान की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन लगातार पहुंच रही धान की खेप के मुकाबले उठान नहीं होने से जगह की किल्लत बनी हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक, मंडियों में अभी भी 1.08 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान का उठान होना बाकी है। मंडियों में धान की खेप लगातार पहुंच रही है। चालू सीजन में अब तक मंडियों में कुल 4.45 लाख एमटी धान की आवक हो चुकी है। सरकारी एजेंसियों ने तत्परता दिखाते हुए इसमें से 3.45 लाख एमटी धान की खरीद भी पूरी कर ली है, लेकिन 1.08 लाख एमटी धान खुले आसमान के नीचे फड़ों और रास्तों को जाम किए खड़ा है। जगह की इसी कमी के कारण किसानों को अपनी सूखी फसल को भी सड़कों पर फैलाना पड़ रहा है।
-- -- -- --
23 हजार से अधिक किसानों को 510 करोड़ का भुगतान
डीसी अपराजिता ने बताया कि जैसे-जैसे उठान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर होने लगी है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक 23,356 किसानों को करीब 510 करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया जा चुका है। हालांकि, जिन किसानों की फसल का उठान अभी नहीं हुआ है, उनका भुगतान प्रक्रिया के नियमों के चलते अटका हुआ है। किसान नेता विक्रम कसाना का कहना है कि जब तक मंडियों से पूरी तरह जाम नहीं खुलता, तब तक किसानों को इस कड़े नियम से छूट देकर सीधा भुगतान किया जाना चाहिए, ताकि वे गेहूं की अगली बुआई समय पर कर सकें।
विज्ञापन
-- -- -- -
उठान में जिला तीसरे स्थान पर : डीसी
डीसी अपराजिता ने बताया कि किसानों से 3 लाख 45 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जबकि दो लाख 37 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा का उठान हुआ है। उठान के मामले में जिला तीसरे नंबर पर है। जिला प्रशासन द्वारा मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने और उठान में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन
कैथल। धान की खरीद के बाद समय पर उठान नहीं होने से अनाज मंडियों में व्यवस्था चरमराने लगी है। मंडियों के फड़ धान की बोरियों से भरे पड़े हैं और रास्तों पर भी जगह नहीं बची है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल सुखाने के लिए सड़कों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में उठान की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन लगातार पहुंच रही धान की खेप के मुकाबले उठान नहीं होने से जगह की किल्लत बनी हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक, मंडियों में अभी भी 1.08 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान का उठान होना बाकी है। मंडियों में धान की खेप लगातार पहुंच रही है। चालू सीजन में अब तक मंडियों में कुल 4.45 लाख एमटी धान की आवक हो चुकी है। सरकारी एजेंसियों ने तत्परता दिखाते हुए इसमें से 3.45 लाख एमटी धान की खरीद भी पूरी कर ली है, लेकिन 1.08 लाख एमटी धान खुले आसमान के नीचे फड़ों और रास्तों को जाम किए खड़ा है। जगह की इसी कमी के कारण किसानों को अपनी सूखी फसल को भी सड़कों पर फैलाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
23 हजार से अधिक किसानों को 510 करोड़ का भुगतान
डीसी अपराजिता ने बताया कि जैसे-जैसे उठान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर होने लगी है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक 23,356 किसानों को करीब 510 करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया जा चुका है। हालांकि, जिन किसानों की फसल का उठान अभी नहीं हुआ है, उनका भुगतान प्रक्रिया के नियमों के चलते अटका हुआ है। किसान नेता विक्रम कसाना का कहना है कि जब तक मंडियों से पूरी तरह जाम नहीं खुलता, तब तक किसानों को इस कड़े नियम से छूट देकर सीधा भुगतान किया जाना चाहिए, ताकि वे गेहूं की अगली बुआई समय पर कर सकें।
विज्ञापन
उठान में जिला तीसरे स्थान पर : डीसी
डीसी अपराजिता ने बताया कि किसानों से 3 लाख 45 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जबकि दो लाख 37 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा का उठान हुआ है। उठान के मामले में जिला तीसरे नंबर पर है। जिला प्रशासन द्वारा मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने और उठान में तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है।

कैथल की नई मंडी में सड़क पर डाला गया धान। संवाद