{"_id":"c811b75c1331313461fac0ecd77e3537","slug":"rise-millers-protest-against-govt-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिल्स बंद कर सरकार को सौंप देंगे चाबियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिल्स बंद कर सरकार को सौंप देंगे चाबियां
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Sun, 06 Dec 2015 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धान घोटाले के आरोपों से घिरी सरकार ने मिलों में 1509 किस्म के धान की अलग से जांच करवाने का फैसला किया है जिसका हरियाणा मिलर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि सीजन के समय में सरकार ने 1509 को ए ग्रेड के धान के रूप में मंजूरी दी थी जिस कारण मिलर्स ने इस धान का अलग से रिकार्ड नहीं रखा। अब यदि सरकार ने 1509 के रिकॉर्ड के लिए दबाव बनाया तो मिलर्स अपनी मिलों को ताला लगा देंगे और चाबियां सरकार को सौंप देेंगे।
अग्रवाल धर्मशाला में रविवार को इस संबंध में बैठक हुई। इसके बाद मिलर्स ने डीएफएससी को ज्ञापन सौंपा। बैठक की अध्यक्षता राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान मांगे राम खुरानिया और आल इंडिया राइस मिलर उपप्रधान जगदीश अग्रवाल ने की। दोनों ने कहा कि विपक्ष द्वारा राइस मिलरों और 1509 ग्रेड ए के बारे में अनापशनाप बयानबाजी की जा रही है जो निराधार है।
सरकार ने 29 सितंबर, 2015 को डीएफएससी को पत्र लिख कहा था कि पूसा 1509 किस्म के धान की खरीद को ग्रेड ए धान के रूप में मान्यता दी गई है। इसलिए इस धान का अलग से रिकार्ड रखने जरूरत नहीं है जिस कारण राइस मिलरों ने इसका कोई अलग से रिकार्ड नहीं रखा।
विज्ञापन
सरकार इस विषय को विपक्षी दलों के दबाव में आकर धांधली का रूप दे रही है। जहां तक फिजिकल वेरिफिकेशन की बात है, उसके लिए राइस मिलरों का विरोध नहीं है। यदि सरकार 1509 धान की अलग से जांच करवाने की बात करती है तो मिलर्स उसका विरोध करेंगे।
व्यापारियों को बनाया जा रहा मोहरा
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन कैथल के मंडी प्रधान अश्वनी शोरेवाला, विष्णु भगवान मित्तल, ढांड मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजेश वशिष्ठ, चीका मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान हंसराज सिंगला, रामस्वरूप जिंदल, संजय गर्ग, रामनिवास, सुशील गर्ग, प्रो. राजकुमार, सतीश चावला, अनिल कुमार मस्ताना, राजेंद्र मित्तल, सुशील कुमार, रामनिवास खुरानिया, बाबू राम मित्तल, जय भगवान मित्तल, बसंत जैन ने कहा कि जो पार्टी व्यापारियों को परेशान करती है वह दोबारा सत्ता में नहीं आती। विपक्ष आज व्यापारियों को मोहरा बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहा है। यदि सरकार मिलर्स को इसी तरह परेशान करती रही तो चावल की सप्लाई प्रभावित होगी।
क्या है सरकार का फैसला
विपक्ष के आरोपों के बाद सरकार ने धान की सरकारी खरीद की जांच का फैसला लिया है। इसके तहत मिलों में 1509 और मोटे धान की अलग से वेरिफिकेशन करने के निर्देश हैं। जिले में 112 मिलों में 15 टीमों द्वारा जांच की जाएगी।
...तो गड़बड़ी की आशंका
सरकार के आदेशानुसार जिला प्रशासन की ओर से अनाज मंडियों से मिलर्स को दी गई पीआर ग्रुप में मोटे धान और 1509 धान की अलग-अलग डिटेल निकलवाई जा रही है। इसी रिकॉर्ड के आधार पर मिलों में जाकर अधिकारी जांच करेंगे कि जितना धान मंडियों से 1509 का खरीदा गया है, उसका स्टॉक मिलर्स के पास है भी या नहीं। यदि रिकॉर्ड के अनुसार 1509 का धान नहीं मिलता है तो इसमें गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
विज्ञापन
अग्रवाल धर्मशाला में रविवार को इस संबंध में बैठक हुई। इसके बाद मिलर्स ने डीएफएससी को ज्ञापन सौंपा। बैठक की अध्यक्षता राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान मांगे राम खुरानिया और आल इंडिया राइस मिलर उपप्रधान जगदीश अग्रवाल ने की। दोनों ने कहा कि विपक्ष द्वारा राइस मिलरों और 1509 ग्रेड ए के बारे में अनापशनाप बयानबाजी की जा रही है जो निराधार है।
विज्ञापन
सरकार ने 29 सितंबर, 2015 को डीएफएससी को पत्र लिख कहा था कि पूसा 1509 किस्म के धान की खरीद को ग्रेड ए धान के रूप में मान्यता दी गई है। इसलिए इस धान का अलग से रिकार्ड रखने जरूरत नहीं है जिस कारण राइस मिलरों ने इसका कोई अलग से रिकार्ड नहीं रखा।
विज्ञापन
सरकार इस विषय को विपक्षी दलों के दबाव में आकर धांधली का रूप दे रही है। जहां तक फिजिकल वेरिफिकेशन की बात है, उसके लिए राइस मिलरों का विरोध नहीं है। यदि सरकार 1509 धान की अलग से जांच करवाने की बात करती है तो मिलर्स उसका विरोध करेंगे।
व्यापारियों को बनाया जा रहा मोहरा
अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन कैथल के मंडी प्रधान अश्वनी शोरेवाला, विष्णु भगवान मित्तल, ढांड मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजेश वशिष्ठ, चीका मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान हंसराज सिंगला, रामस्वरूप जिंदल, संजय गर्ग, रामनिवास, सुशील गर्ग, प्रो. राजकुमार, सतीश चावला, अनिल कुमार मस्ताना, राजेंद्र मित्तल, सुशील कुमार, रामनिवास खुरानिया, बाबू राम मित्तल, जय भगवान मित्तल, बसंत जैन ने कहा कि जो पार्टी व्यापारियों को परेशान करती है वह दोबारा सत्ता में नहीं आती। विपक्ष आज व्यापारियों को मोहरा बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहा है। यदि सरकार मिलर्स को इसी तरह परेशान करती रही तो चावल की सप्लाई प्रभावित होगी।
क्या है सरकार का फैसला
विपक्ष के आरोपों के बाद सरकार ने धान की सरकारी खरीद की जांच का फैसला लिया है। इसके तहत मिलों में 1509 और मोटे धान की अलग से वेरिफिकेशन करने के निर्देश हैं। जिले में 112 मिलों में 15 टीमों द्वारा जांच की जाएगी।
...तो गड़बड़ी की आशंका
सरकार के आदेशानुसार जिला प्रशासन की ओर से अनाज मंडियों से मिलर्स को दी गई पीआर ग्रुप में मोटे धान और 1509 धान की अलग-अलग डिटेल निकलवाई जा रही है। इसी रिकॉर्ड के आधार पर मिलों में जाकर अधिकारी जांच करेंगे कि जितना धान मंडियों से 1509 का खरीदा गया है, उसका स्टॉक मिलर्स के पास है भी या नहीं। यदि रिकॉर्ड के अनुसार 1509 का धान नहीं मिलता है तो इसमें गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।