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ईरान-अमेरिका विवाद के चलते 50 हजार टन चावल बंदरगाहों पर अटका, टेंशन में आए निर्यातक
Tue, 07 Jan 2020 09:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
नसीब सैनी, अमर उजाला, कैथल(हरियाणा)
नसीब सैनी, अमर उजाला, कैथल(हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 09:53 AM IST
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अमेरिका-ईरान विवाद का भारतीय बासमती चावल उद्योग पर बुरा असर हुआ है। विवाद शुरू होते ही हरियाणा सहित देश भर के निर्यातकों का 50 हजार टन से अधिक बासमती चावल बंदरगाहों पर फंस गया है। अब ना केवल बाहरी खरीददारों बल्कि स्थानीय निर्यातकों ने भी अपनी शिपमेंट रोक दी है। चावल निर्यातक एसोसिएशन ने भी अगले कुछ दिनों तक चावल ना भेजने की सलाह दी है।
इस घटनाक्रम के कारण जिले की मंडियों में बासमती धान की कीमतों में 150 रुपये तक की कमी आ गई है। वहीं चावल की कीमतों में भी 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की कमी दर्ज की गई है। यूरोप में पहले से ही भारतीय चावल निर्यात पर बैन है, अब अरब देशों में चावल निर्यात करीब-करीब बंद होने से निर्यातकों को भारी नुकसान हो सकता है।
कैथल में चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि यूरोप में चावल पहले से ही बंद था। ईरान के साथ पहले से ही इश्यू चल रहा था। अब जो घटनाक्रम हुआ है। उसके कारण ईरान-ईराक, दुबई तक भी शिपमेंट रोक दी गई है। यहां बासमती चावल का निर्यात हो रहा था। जिसमें 1121 की पूरी की पूरी मार्केट शामिल है। उनके भी करीब 100 कंटेनर बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं। जिन्हें आगे भेजने से फिलहाल रोक लिया गया है।
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इस घटनाक्रम के कारण जिले की मंडियों में बासमती धान की कीमतों में 150 रुपये तक की कमी आ गई है। वहीं चावल की कीमतों में भी 300 रुपये प्रति क्विंटल तक की कमी दर्ज की गई है। यूरोप में पहले से ही भारतीय चावल निर्यात पर बैन है, अब अरब देशों में चावल निर्यात करीब-करीब बंद होने से निर्यातकों को भारी नुकसान हो सकता है।
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कैथल में चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि यूरोप में चावल पहले से ही बंद था। ईरान के साथ पहले से ही इश्यू चल रहा था। अब जो घटनाक्रम हुआ है। उसके कारण ईरान-ईराक, दुबई तक भी शिपमेंट रोक दी गई है। यहां बासमती चावल का निर्यात हो रहा था। जिसमें 1121 की पूरी की पूरी मार्केट शामिल है। उनके भी करीब 100 कंटेनर बंदरगाह पर पहुंच चुके हैं। जिन्हें आगे भेजने से फिलहाल रोक लिया गया है।
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करीब 50 हजार टन से अधिक का चावल बंदरगाहों पर लटका
निर्यातक सूत्रों के अनुसार पूरे देश से करीब 36 चावल निर्यातकों ने अपने चावल का निर्यात रोक लिया है। इनके करीब 50 हजार टन चावल के कंटेनर बंदरगाह पर फंस गए हैं। साथ ही बाहर से खरीददारों ने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। एक अनुमान के अनुसार हर तीसरे दिन एक समुद्री जहाज चावलों से भरकर इन देशों में जा रहा था। जो अब बंद हो गया है।
मंडियों में धान के तो बाजार में चावल के दाम गिरे
वैश्विक स्तर पर चल रही उठापठक का असर अनाज मंडियों में बिक रहे बासमती धान पर हुआ है। दो दिन के भीतर-भीतर 1121 के दामों में 150 रुपये तक की कमी आई है। यह 3050 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। जो इस समय कम होकर 2900 रुपये तक आ गया है। मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि 150 रुपये की दो दिन में कमी दर्ज की गई है। वहीं निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि चावल तीन दिन पूर्व 5500 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो पिछले 3 दिनों में कम होकर 5200 प्रति क्विंटल तक आ गए हैं।
अनिश्चितताओं के कारण निर्यातकों में चिंता
यूरोप में भारतीय चावल पर पहले ही बैन है। अब अरब देशों में आए संकट के कारण निर्यातकों में चिंता है। उन्हें डर है कि उनके साथ हुए सौदों के तहत चावल नहीं बिका तो उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही भविष्य में चावल उत्पादक किसानों पर भी इस घटनाक्रम का असर हो सकता है।
मंडियों में धान के तो बाजार में चावल के दाम गिरे
वैश्विक स्तर पर चल रही उठापठक का असर अनाज मंडियों में बिक रहे बासमती धान पर हुआ है। दो दिन के भीतर-भीतर 1121 के दामों में 150 रुपये तक की कमी आई है। यह 3050 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा था। जो इस समय कम होकर 2900 रुपये तक आ गया है। मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि 150 रुपये की दो दिन में कमी दर्ज की गई है। वहीं निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने कहा कि चावल तीन दिन पूर्व 5500 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो पिछले 3 दिनों में कम होकर 5200 प्रति क्विंटल तक आ गए हैं।
अनिश्चितताओं के कारण निर्यातकों में चिंता
यूरोप में भारतीय चावल पर पहले ही बैन है। अब अरब देशों में आए संकट के कारण निर्यातकों में चिंता है। उन्हें डर है कि उनके साथ हुए सौदों के तहत चावल नहीं बिका तो उन्हें भारी नुकसान हो सकता है। साथ ही भविष्य में चावल उत्पादक किसानों पर भी इस घटनाक्रम का असर हो सकता है।