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Kaithal News: अवशेष प्रबंधन जरूरी, जलाने से मित्र कीट हो जाते नष्ट
Thu, 24 Apr 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 24 Apr 2025 01:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कृषि विभाग कलायत की ओर से कैलरम गांव में फसल अवशेष प्रबंधन पर एक दिवसीय किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों को क्यों जरूरी है अवशेष प्रबंधन इसकी जानकारी दी गई। समझाया गया कि इन्हें जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं।
इस दौरान गेहूं की फसल कट रही है। ऐसे में खेत खाली हो रहे हैं। ऐसे समय फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग जुटा हुआ है। इसके तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम व नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से तुड़ी बनवाने के बाद अवशेष न जलाने के फायदा बताए जा रहे हैं।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. विजय मान व डॉ. नरेश नैन की अध्यक्षता में असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान , सूर्यकांत शर्मा, राजेश मोर व ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर जोगिंद्र बिहान ने कलायत के विभिन्न गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन किसानों को जागरूक किया। कार्यक्रम का आयोजन गांव कैलरम के अलावा बालू, कुराड, दुब्बल, बड़सीकरी कलां, कलायत, मटोर में भी हुआ।
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कैलरम में जोगिंद्र बिहान ने कहा बताया कि किसान फसल अवशेष को खेत में ही जलाने से मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। यह खाद का अच्छा साधन है। अवशेष को जलाने से दोहरा नुकसान होता है।
समझाया कि इससे जहां किसान अच्छी खाद से वंचित रह जाता है। वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले अनेक जीवाणुओं को नष्ट भी कर देता है। जब किसान सड़क किनारे फसल अवशेषों को जलाते हैं तो वाहन दुर्घटना होने का भी डर बना रहता है जिससे जान माल की भी हानि होती है। जब किसान फसल अवशेषों में आग लगाता है तो उन फसल अवशेषों में यूरिया, डीएपी खाद की मात्रा मौजूद होती है, जो अवशेष जलने के साथ खत्म हो जाती है।
असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान ने बताया कि अगर कोई किसान फसल अवशेषों का भूसा/तुड़ा बनाने उपरांत फसल अवशेष जलाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ रेड एंट्री दर्ज की जाएगी। इससे वह अगले दो सीजन तक अपनी फसल को एमएसपी पर बेच नहीं सकता है।
इसके साथ असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर सूर्यकांत शर्मा , राजेश मोर की ओर से जल शक्ति अभियान के तहत पानी को बर्बाद होने से कैसे बचाया जाए। इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि कुशलपाल, महिपाल राणा, राकेश कुंडू, विशाल कुमार, अजय मोर, विवेक राणा, राजकुमार व प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, फकीरचंद, राजकुमार, हुक्मी सिंह, जगबीर सिंह, राममेहर, जगतारसिंह, जोगिंद्र सिंह सहित सैंकड़ों किसान शामिल रहे।
सबसे बड़ा फायदा ः मिट्टी की उर्वरता में सुधार
अवशेष प्रबंधन का सबसे बड़ा फायदा मिट्टी की उर्वरता में सुधार है। दरअसल, अवशेषों को खेत में मिला देने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, जल धारण क्षमता बढ़ती है, और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है। अवशेषों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो मिट्टी में वापस आ जाते हैं, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।
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कलायत। कृषि विभाग कलायत की ओर से कैलरम गांव में फसल अवशेष प्रबंधन पर एक दिवसीय किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों को क्यों जरूरी है अवशेष प्रबंधन इसकी जानकारी दी गई। समझाया गया कि इन्हें जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं।
इस दौरान गेहूं की फसल कट रही है। ऐसे में खेत खाली हो रहे हैं। ऐसे समय फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि विभाग जुटा हुआ है। इसके तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम व नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से तुड़ी बनवाने के बाद अवशेष न जलाने के फायदा बताए जा रहे हैं।
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खंड कृषि अधिकारी डॉ. विजय मान व डॉ. नरेश नैन की अध्यक्षता में असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान , सूर्यकांत शर्मा, राजेश मोर व ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर जोगिंद्र बिहान ने कलायत के विभिन्न गांवों में फसल अवशेष प्रबंधन किसानों को जागरूक किया। कार्यक्रम का आयोजन गांव कैलरम के अलावा बालू, कुराड, दुब्बल, बड़सीकरी कलां, कलायत, मटोर में भी हुआ।
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कैलरम में जोगिंद्र बिहान ने कहा बताया कि किसान फसल अवशेष को खेत में ही जलाने से मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं। यह खाद का अच्छा साधन है। अवशेष को जलाने से दोहरा नुकसान होता है।
समझाया कि इससे जहां किसान अच्छी खाद से वंचित रह जाता है। वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले अनेक जीवाणुओं को नष्ट भी कर देता है। जब किसान सड़क किनारे फसल अवशेषों को जलाते हैं तो वाहन दुर्घटना होने का भी डर बना रहता है जिससे जान माल की भी हानि होती है। जब किसान फसल अवशेषों में आग लगाता है तो उन फसल अवशेषों में यूरिया, डीएपी खाद की मात्रा मौजूद होती है, जो अवशेष जलने के साथ खत्म हो जाती है।
असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर रमेश समध्यान ने बताया कि अगर कोई किसान फसल अवशेषों का भूसा/तुड़ा बनाने उपरांत फसल अवशेष जलाते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ रेड एंट्री दर्ज की जाएगी। इससे वह अगले दो सीजन तक अपनी फसल को एमएसपी पर बेच नहीं सकता है।
इसके साथ असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर सूर्यकांत शर्मा , राजेश मोर की ओर से जल शक्ति अभियान के तहत पानी को बर्बाद होने से कैसे बचाया जाए। इस मौके पर सरपंच प्रतिनिधि कुशलपाल, महिपाल राणा, राकेश कुंडू, विशाल कुमार, अजय मोर, विवेक राणा, राजकुमार व प्रगतिशील किसान जॉनी राणा, फकीरचंद, राजकुमार, हुक्मी सिंह, जगबीर सिंह, राममेहर, जगतारसिंह, जोगिंद्र सिंह सहित सैंकड़ों किसान शामिल रहे।
सबसे बड़ा फायदा ः मिट्टी की उर्वरता में सुधार
अवशेष प्रबंधन का सबसे बड़ा फायदा मिट्टी की उर्वरता में सुधार है। दरअसल, अवशेषों को खेत में मिला देने से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, जिससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, जल धारण क्षमता बढ़ती है, और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है। अवशेषों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो मिट्टी में वापस आ जाते हैं, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं।