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Kaithal News: गड्ढों की भरमार, आंखें मूंदे बैठे जिम्मेदार
Tue, 03 Feb 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 03 Feb 2026 01:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर की सड़कों पर निकलते वक्त अब आम नागरिक को अपनी जान की सलामती के लिए खुद ही सतर्क रहना होगा। कारण साफ है—शहर के लगभग हर कोने में खुले पड़े सीवरेज के नाले और मेनहोल किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। ये खुले नाले आम लोगों के लिए ‘मौत के गड्ढे’ बन चुके हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि जन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर खतरे से आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते शहरवासी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। सेक्टर-18 नागरिक अस्पताल के आसपास, प्योदा रोड, पदमा सिटी मॉल के पास, हनुमान वाटिका, रेलवे गेट, नई अनाज मंडी सहित शहर के कई प्रमुख इलाकों में खुले नाले सरेआम हादसों को बुलावा दे रहे हैं। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
हाल ही में पेहोवा चौक के पास एक युवती अपनी स्कूटी समेत खुले नाले में जा गिरी। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत मदद कर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि ऐसे हादसों की आशंका हर दिन बनी रहती है। उल्लेखनीय है कि शहर में नालों की कुल लंबाई करीब 60 किलोमीटर है, जिनमें कई स्थानों पर स्लैब टूट चुके हैं या पूरी तरह गायब हैं।
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हर कदम पर खतरा, प्रशासन बेपरवाह : शहर की मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक हालात बद से बदतर हैं।
जगह-जगह खुले पड़े सीवरेज नाले इतने गहरे हैं कि उनमें गिरने से जान तक जाने का सीधा खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिक शमशेर सिंह, वीरेंद्र कुमार और रजनीश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा हो। राहगीर, दोपहिया वाहन चालक और पशु अक्सर इन जानलेवा नालों का शिकार बन रहे हैं।
गड्ढों की वजह से अंधेरे में बढ़ जाता है जोखिम
दिन के समय लोग किसी तरह इन गड्ढों से बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। शहर के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे खुले नाले नजर नहीं आते और हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के दिनों में जब सड़कों पर जलभराव हो जाता है, तब ये नाले पूरी तरह छिप जाते हैं और पैदल चलने वालों के लिए डेथ ट्रैप साबित होते हैं। सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले अधिकारी इन मूलभूत समस्याओं से मुंह मोड़े हुए हैं। न तो नालों को ढंकने के लिए स्लैब डाली जा रही है और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
शहर में समय-समय पर नालों की जांच कर उन्हें स्लैब आदि से ढंका जाता है। यदि अभी कहीं कोई समस्या है तो उसे तुरंत प्रभाव से दुरुस्त कराया जाएगा। -विनोद, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग
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कैथल। शहर की सड़कों पर निकलते वक्त अब आम नागरिक को अपनी जान की सलामती के लिए खुद ही सतर्क रहना होगा। कारण साफ है—शहर के लगभग हर कोने में खुले पड़े सीवरेज के नाले और मेनहोल किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। ये खुले नाले आम लोगों के लिए ‘मौत के गड्ढे’ बन चुके हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि जन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर खतरे से आंखें मूंदे बैठे हैं।
स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते शहरवासी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। सेक्टर-18 नागरिक अस्पताल के आसपास, प्योदा रोड, पदमा सिटी मॉल के पास, हनुमान वाटिका, रेलवे गेट, नई अनाज मंडी सहित शहर के कई प्रमुख इलाकों में खुले नाले सरेआम हादसों को बुलावा दे रहे हैं। बावजूद इसके, संबंधित अधिकारी अनजान बने हुए हैं।
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हाल ही में पेहोवा चौक के पास एक युवती अपनी स्कूटी समेत खुले नाले में जा गिरी। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत मदद कर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि ऐसे हादसों की आशंका हर दिन बनी रहती है। उल्लेखनीय है कि शहर में नालों की कुल लंबाई करीब 60 किलोमीटर है, जिनमें कई स्थानों पर स्लैब टूट चुके हैं या पूरी तरह गायब हैं।
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हर कदम पर खतरा, प्रशासन बेपरवाह : शहर की मुख्य सड़कों से लेकर रिहायशी कॉलोनियों तक हालात बद से बदतर हैं।
जगह-जगह खुले पड़े सीवरेज नाले इतने गहरे हैं कि उनमें गिरने से जान तक जाने का सीधा खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिक शमशेर सिंह, वीरेंद्र कुमार और रजनीश ने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा हो। राहगीर, दोपहिया वाहन चालक और पशु अक्सर इन जानलेवा नालों का शिकार बन रहे हैं।
गड्ढों की वजह से अंधेरे में बढ़ जाता है जोखिम
दिन के समय लोग किसी तरह इन गड्ढों से बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। शहर के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे खुले नाले नजर नहीं आते और हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के दिनों में जब सड़कों पर जलभराव हो जाता है, तब ये नाले पूरी तरह छिप जाते हैं और पैदल चलने वालों के लिए डेथ ट्रैप साबित होते हैं। सरकारी दावों के विपरीत धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले अधिकारी इन मूलभूत समस्याओं से मुंह मोड़े हुए हैं। न तो नालों को ढंकने के लिए स्लैब डाली जा रही है और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं।
शहर में समय-समय पर नालों की जांच कर उन्हें स्लैब आदि से ढंका जाता है। यदि अभी कहीं कोई समस्या है तो उसे तुरंत प्रभाव से दुरुस्त कराया जाएगा। -विनोद, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग