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Kaithal News: आलू के दाम औंधे मुंह गिरे, 4 से 8 रुपये किलो बिक रहा

Tue, 20 Jan 2026 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 20 Jan 2026 01:57 AM IST
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Potato prices have fallen sharply, selling at Rs 4 to 8 per kg.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। इस सीजन में आलू उत्पादक किसानों को अपनी फसल के बेहद कम दाम मिल रहे हैं। मंडियों में आलू का भाव चार से आठ रुपये प्रति किलो के बीच सिमट गया है, जिससे किसानों की लागत तक पूरी नहीं हो पा रही। परिणामस्वरूप किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और वे गंभीर चिंता में हैं।

सीवन क्षेत्र के गांव गोविंदगढ़, गोविंदपुरा, सौथा, मलिकपुर, खानपुर, डोहर, कवारतन, प्रभोत सहित सैकड़ों गांवों में इस बार बड़े पैमाने पर आलू की खेती की गई है।
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जिले में करीब पांच हजार एकड़ क्षेत्रफल में आलू का उत्पादन हुआ है। किसानों का कहना है कि एक एकड़ आलू की फसल तैयार करने में लगभग 40 से 45 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन मौजूदा मंडी भाव के चलते किसान अपना खर्च तक नहीं निकाल पा रहे हैं।
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किसानों ने सरकार से मांग की है कि भावांतर भरपाई योजना के तहत उन्हें नुकसान की भरपाई की जाए, ताकि वे इस आर्थिक संकट से उबर सकें। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई, तो आने वाले सीजन में आलू की खेती से किसान मुंह मोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।

भावांतर योजना लागू न होना किसानों के साथ अन्याय : महाबीर चहल

किसान नेता महाबीर चहल नरड़ ने कहा कि हरियाणा की मंडियों में आलू के भाव में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे सफेद आलू उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। इसके बावजूद भावांतर भरपाई योजना अब तक लागू नहीं की गई, जो किसानों के साथ सरासर अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
10–15 साल में पहली बार मिले इतने कम भाव : अशोक

गांव पट्टी अफगान निवासी किसान अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने पांच एकड़ भूमि में आलू की फसल लगाई है। मंडी में 50 किलो आलू की बोरी मात्र 200 रुपये में बिक रही है। उन्होंने कहा कि 10 से 15 वर्षों में पहली बार इतने कम भाव मिले हैं। एक एकड़ में करीब 40 हजार रुपये की लागत आई है, जबकि एक एकड़ से निकलने वाला आलू मात्र 20 हजार रुपये के आसपास बिक रहा है। इससे उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

पिछले साल 400 रुपये, इस बार 200 में बिक रही बोरी

डोहर निवासी किसान रणधीर चहल ने बताया कि पिछले वर्ष 50 किलो आलू की बोरी 400 रुपये में बिकी थी, जबकि इस बार वही बोरी 200 रुपये में बिक रही है। भाव आधा रह गया है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में करीब 45 हजार रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन आधे दाम में फसल बिकने से लागत भी नहीं निकल पा रही। कई किसानों को चार रुपये प्रति किलो के भाव पर आलू बेचना पड़ रहा है।
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