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रूस के पीछे हटने की खबर से अभिभावकों ने ली राहत की सांस
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कैथल। रूस-यूक्रेन विवाद के बीच बुधवार को कुछ राहत की खबर आई है। बताया जा रहा है कि रूस की सेना कुछ क्षेत्रों में पीछे हटी है। इससे परिजनों ने राहत की सांस ली है। कैथल सहित प्रदेश भर से बड़ी संख्या में बच्चे यूक्रेन में पढ़ाई के लिए गए हैं। उनकी ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधाएं न मिलने के कारण बच्चे स्वदेश वापस नहीं आ पा रहे हैं।
अभिभावक गुरदेव सिंह और निशान सिंह ने कहा कि यूक्रेन में हरियाणा से बड़ी संख्या में बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। पहले तो भारतीय दूतावास की ओर से यूक्रेन छोड़ने जैसी कोई एडवायजरी जारी नहीं की गई थी। मंगलवार को ही एक एडवाइजरी जारी हुई, जिसमें भारतीय नागरिकों को यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी गई थी। इसी बीच मंगलवार देर शाम तक खबर आई कि रूस की सेना कुछ क्षेत्रों में पीछे हटी है। इसके कारण उनकी चिंता कुछ कम हुई है।
अभिभावकों ने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र में जो विश्वविद्यालय हैं, वहां पढ़ने वाले बच्चों को लेकर चिंता ज्यादा थीं। शेष इलाकों में चिंताएं नहीं हैं। अब युद्ध टलने की संभावनाओं के बीच अभिभावकों और बच्चों ने राहत की सांस ली है। मंगलवार तक जो स्थिति बनी हुई थी, उसमें वापसी का टिकट नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में परिजनों को इस बात की चिंता थी कि युद्ध होने की स्थिति में वहां से बच्चे कैसे निकल पाएंगे। अभिभावकों ने कहा कि वे लगातार अपने बच्चों के संपर्क में हैं और उनकी निर्बाध रूप से कक्षाएं लग रही हैं।
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अभिभावक गुरदेव सिंह और निशान सिंह ने कहा कि यूक्रेन में हरियाणा से बड़ी संख्या में बच्चे मेडिकल की पढ़ाई करने गए हैं। पहले तो भारतीय दूतावास की ओर से यूक्रेन छोड़ने जैसी कोई एडवायजरी जारी नहीं की गई थी। मंगलवार को ही एक एडवाइजरी जारी हुई, जिसमें भारतीय नागरिकों को यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी गई थी। इसी बीच मंगलवार देर शाम तक खबर आई कि रूस की सेना कुछ क्षेत्रों में पीछे हटी है। इसके कारण उनकी चिंता कुछ कम हुई है।
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अभिभावकों ने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र में जो विश्वविद्यालय हैं, वहां पढ़ने वाले बच्चों को लेकर चिंता ज्यादा थीं। शेष इलाकों में चिंताएं नहीं हैं। अब युद्ध टलने की संभावनाओं के बीच अभिभावकों और बच्चों ने राहत की सांस ली है। मंगलवार तक जो स्थिति बनी हुई थी, उसमें वापसी का टिकट नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में परिजनों को इस बात की चिंता थी कि युद्ध होने की स्थिति में वहां से बच्चे कैसे निकल पाएंगे। अभिभावकों ने कहा कि वे लगातार अपने बच्चों के संपर्क में हैं और उनकी निर्बाध रूप से कक्षाएं लग रही हैं।
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