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चार दशक से गांव सौथा में बनती रही सर्वसम्मति से पंचायत
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कैथल। पंचायत चुनावों का बिगुल बजने के बाद चुनावी रण में भावी पंच व सरपंच कूद चुके हैं। वहीं, कई ऐसे गांव भी है जहां पर सर्वसम्मति से पंचायतें बन रही है। खंड सीवन के गांव सौथा में भी पिछले 40 साल से लगातार गांव सौथा में सर्वसम्मति से पंचायत बन रही है। इसके बावजूद गांव में विकास की बात नहीं बनी है। गांव में पीने के पानी की समस्या सबसे अधिक है। गांव 1988 में पीने की पाइपलाइन बदलने का प्रस्ताव डाला गया। 34 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। गौरतलब है गांव की आबादी 2460 है जबकि 1480 मतदाता हैं। ये चुनाव में अपने मत का प्रयोग करेंगे।
1966 में ही हुआ था गांव सौथा की पंचायत का गठन
गांव के पूर्व सरपंच सतीश कुमार ने बताया कि हरियाणा के गठन के दौरान 1966 में ही गांव सौथा की पंचायत का गठन किया था। गठन के समय सौथा पंचायत में सौथा-हरनौला दो गांवों में मतदाता शामिल थे। यह 1992 में अलग हुई। इस समय गांव में पानी निकासी, तालाब, सामुदायिक केंद्र निर्माण सहित अन्य कई विकास से जुड़े मुद्दे हैं।
ग्रामीण राजेंद्र शर्मा ने कहा कि गांव में वर्ष 2005 में पहली बार चुनाव हुए थे। इसके बाद से यहां पर ग्रामीणों ने यहां पर चुनाव होना शुरू हुए थे। उम्मीद थी कि यहां पर विकास कार्य होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। गांव में नई पंचायत अच्छे कार्य करवाए।
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ग्रामीण महेंद्र राणा ने कहा कि गांव में सबसे अधिक समस्या पीने के पानी की है। यहां पर पिछले करीब 30 साल से पीने के पानी की नई पाइप लाइन तक नहीं बिछ पाई है। ऐसे में यहां पर यह सबसे बड़ी समस्या है।
ग्रामीण सर्वजीत सिंह ने बताया कि गांव में कुछ गलियां तो बना दी गई है, लेकिन अधिकतर गलिया कच्ची हैं। जिस कारण बरसात के मौसम में अधिक परेशानी का सामना ग्रामीणों को करना पड़ता है। यदि विकास कार्य सही ढंग से करवाएं जाएं तो गांव का सुधार हो पाएगा।
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1966 में ही हुआ था गांव सौथा की पंचायत का गठन
गांव के पूर्व सरपंच सतीश कुमार ने बताया कि हरियाणा के गठन के दौरान 1966 में ही गांव सौथा की पंचायत का गठन किया था। गठन के समय सौथा पंचायत में सौथा-हरनौला दो गांवों में मतदाता शामिल थे। यह 1992 में अलग हुई। इस समय गांव में पानी निकासी, तालाब, सामुदायिक केंद्र निर्माण सहित अन्य कई विकास से जुड़े मुद्दे हैं।
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ग्रामीण राजेंद्र शर्मा ने कहा कि गांव में वर्ष 2005 में पहली बार चुनाव हुए थे। इसके बाद से यहां पर ग्रामीणों ने यहां पर चुनाव होना शुरू हुए थे। उम्मीद थी कि यहां पर विकास कार्य होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है। गांव में नई पंचायत अच्छे कार्य करवाए।
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ग्रामीण महेंद्र राणा ने कहा कि गांव में सबसे अधिक समस्या पीने के पानी की है। यहां पर पिछले करीब 30 साल से पीने के पानी की नई पाइप लाइन तक नहीं बिछ पाई है। ऐसे में यहां पर यह सबसे बड़ी समस्या है।
ग्रामीण सर्वजीत सिंह ने बताया कि गांव में कुछ गलियां तो बना दी गई है, लेकिन अधिकतर गलिया कच्ची हैं। जिस कारण बरसात के मौसम में अधिक परेशानी का सामना ग्रामीणों को करना पड़ता है। यदि विकास कार्य सही ढंग से करवाएं जाएं तो गांव का सुधार हो पाएगा।