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Kaithal News: मानसून की पहली बारिश से धान की रोपाई तेज
Tue, 27 Jun 2023 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 27 Jun 2023 01:23 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश होने के साथ की धान की रोपाई ने तेजी पकड़ ली है। इसके साथ ही किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती धान की रोपाई करने वाले मजदूरों को लेकर है।
किसानों ने धान लगाने के लिए खेत भी तैयार कर लिए हैं और धान की पनीरी भी तैयार है। क्षेत्र के बड़े किसानों ने बिहार से प्रवासी मजदूरों को अपने खेतों में आसरा दे रखा है। सबसे अधिक परेशानी छोटे किसानों को आ रही है। उन्हें मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूरों ने धान रोपाई के रेट भी बढ़ा दिए है। इस समय धान रोपाई का भाव 3300 से 3800 रुपये प्रति एकड़ चल रहा है।
जिन किसानों के खेत तैयार हैं, वे मजदूरों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ भी देने के लिए तैयार हैं। किसान नरेंद्र कुमार, बालकिशन, नरेश कुमार, सुरेश कुमार, जोगिंद्र सिंह, बलबीर सिंह व लखा सिंह ने बताया कि अब कई वर्षों से लोकल मजदूर धान रोपाई करने के लिए नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह से प्रवासी मजदूरों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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धान रोपाई का कार्य 15 जून से शुरू हो चुका है। मजदूर न मिलने पर खेतों से पानी सूखने का डर बना रहता है। डीडीए डॉ. कर्मचंद ने बताया कि इस बार जिले में चार लाख एकड़ रकबा धान का है। किसानों को पानी बचत के लिए धान की सीधी बिजाई करनी चाहिए।
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पूंडरी। क्षेत्र में मानसून की पहली बारिश होने के साथ की धान की रोपाई ने तेजी पकड़ ली है। इसके साथ ही किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती धान की रोपाई करने वाले मजदूरों को लेकर है।
किसानों ने धान लगाने के लिए खेत भी तैयार कर लिए हैं और धान की पनीरी भी तैयार है। क्षेत्र के बड़े किसानों ने बिहार से प्रवासी मजदूरों को अपने खेतों में आसरा दे रखा है। सबसे अधिक परेशानी छोटे किसानों को आ रही है। उन्हें मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूरों ने धान रोपाई के रेट भी बढ़ा दिए है। इस समय धान रोपाई का भाव 3300 से 3800 रुपये प्रति एकड़ चल रहा है।
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जिन किसानों के खेत तैयार हैं, वे मजदूरों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ भी देने के लिए तैयार हैं। किसान नरेंद्र कुमार, बालकिशन, नरेश कुमार, सुरेश कुमार, जोगिंद्र सिंह, बलबीर सिंह व लखा सिंह ने बताया कि अब कई वर्षों से लोकल मजदूर धान रोपाई करने के लिए नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह से प्रवासी मजदूरों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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धान रोपाई का कार्य 15 जून से शुरू हो चुका है। मजदूर न मिलने पर खेतों से पानी सूखने का डर बना रहता है। डीडीए डॉ. कर्मचंद ने बताया कि इस बार जिले में चार लाख एकड़ रकबा धान का है। किसानों को पानी बचत के लिए धान की सीधी बिजाई करनी चाहिए।