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Kaithal News: ऑक्सीजन की सप्लाई न वेंटिलेटर की सुविधा
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01 कैथल। जिला नगारिक अस्पताल में पोर्टेबल अस्पताल में बनाया गया पट्टी कक्ष
- फोटो : Kaithal
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कैथल। कोरोना महामारी से बचाव के लिए दो करोड़ 60 लाख से बना पोर्टेबल अस्पताल घायलों की मरहम पट्टी तक ही सिमट कर रह गया है। यहां न ऑक्सीजन की सप्लाई और न ही वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है। दो वर्ष पहले तैयार किए अस्पताल का अभी तक सही ढंग से प्रयोग नहीं हो पाया। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के समय निर्माण शुरू किया था, जो तीसरी लहर में बनकर तैयार हुआ था, लेकिन महामारी का प्रकोप कम होने के चलते इसे कोरोना महामारी के समय में प्रयोग में नहीं लाया।
वर्तमान में समय इस पोर्टेबल अस्पताल को केवल जांच केंद्र बनाया है। इसके साथ ही यहां पर केवल पट्टी कक्ष और एनसीडी क्लीनिक बनाया है। यहां पर कुछ समय पहले बनाए गए डेंगू के वार्ड को अब शिफ्ट कर दिया है। अब पोर्टेबल अस्पताल में मरीजों को दाखिल करने के लिए एक भी वार्ड नहीं है। यहां पर केवल मुख्यमंत्री स्वस्थ परिवार सर्वेक्षण योजना के तहत ही ओपीडी की जाती है।
पोर्टेबल अस्पताल के निर्माण का एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद यहां पर न तो ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू हो पाई है और न ही वेंटिलेटर की सुविधा है। इस अस्पताल को अभी तक ऑक्सीजन प्लांट से भी नहीं जोड़ा जा सका है। इस स्थिति में धूप और बरसात के मौसम में अस्पताल की मेडिकल केयर यूनिट खराब हो रही है। इस दौरान अस्पताल में विभिन्न बीमारियों के इलाज करवाने के लिए दाखिल हो रहे मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां वेंटिलेटर को भी नहीं लगाया गया है। इस कारण यहां पर इमरजेंसी के दौरान भी मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है।
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सभी सुविधाओं से लैस, लेकिन मरीजों के काम नहीं आता : अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचे अर्जुन नगर निवासी मरीज रामस्वरूप ने बताया कि उसका बेटा डेंगू से पीड़ित है और अस्पताल में दाखिल है। कुछ समय पहले डेंगू का वार्ड पोर्टेबल अस्पताल में बनाया था, लेकिन अब यहां से वार्ड शिफ्ट कर दिया गया है।
ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए पोर्टेबल अस्पताल सभी सुविधाओं से तो लैस है, लेकिन यह मरीजों के काम नहीं आ रहा है। बता दें कि इस अस्पताल में शौचालय, बाथरूम, एसी और नई तकनीक से पंखे और लाइटों को लगाया गया है, लेकिन इसका प्रयोग इस समय ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट में कुछ खराबी आ गई थी। इस कारण यह बंद है। इसे ठीक करवाया जा रहा है। पोर्टेबल अस्पताल में इस समय वार्ड तो नहीं है, लेकिन अलग-अलग यूनिट के तहत जांच का केंद्र है। यहां पर मरीजों की अच्छे से जांच की जाती है।
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वर्तमान में समय इस पोर्टेबल अस्पताल को केवल जांच केंद्र बनाया है। इसके साथ ही यहां पर केवल पट्टी कक्ष और एनसीडी क्लीनिक बनाया है। यहां पर कुछ समय पहले बनाए गए डेंगू के वार्ड को अब शिफ्ट कर दिया है। अब पोर्टेबल अस्पताल में मरीजों को दाखिल करने के लिए एक भी वार्ड नहीं है। यहां पर केवल मुख्यमंत्री स्वस्थ परिवार सर्वेक्षण योजना के तहत ही ओपीडी की जाती है।
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पोर्टेबल अस्पताल के निर्माण का एक साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद यहां पर न तो ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू हो पाई है और न ही वेंटिलेटर की सुविधा है। इस अस्पताल को अभी तक ऑक्सीजन प्लांट से भी नहीं जोड़ा जा सका है। इस स्थिति में धूप और बरसात के मौसम में अस्पताल की मेडिकल केयर यूनिट खराब हो रही है। इस दौरान अस्पताल में विभिन्न बीमारियों के इलाज करवाने के लिए दाखिल हो रहे मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां वेंटिलेटर को भी नहीं लगाया गया है। इस कारण यहां पर इमरजेंसी के दौरान भी मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है।
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सभी सुविधाओं से लैस, लेकिन मरीजों के काम नहीं आता : अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचे अर्जुन नगर निवासी मरीज रामस्वरूप ने बताया कि उसका बेटा डेंगू से पीड़ित है और अस्पताल में दाखिल है। कुछ समय पहले डेंगू का वार्ड पोर्टेबल अस्पताल में बनाया था, लेकिन अब यहां से वार्ड शिफ्ट कर दिया गया है।
ढाई करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए पोर्टेबल अस्पताल सभी सुविधाओं से तो लैस है, लेकिन यह मरीजों के काम नहीं आ रहा है। बता दें कि इस अस्पताल में शौचालय, बाथरूम, एसी और नई तकनीक से पंखे और लाइटों को लगाया गया है, लेकिन इसका प्रयोग इस समय ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेनू चावला ने बताया कि ऑक्सीजन प्लांट में कुछ खराबी आ गई थी। इस कारण यह बंद है। इसे ठीक करवाया जा रहा है। पोर्टेबल अस्पताल में इस समय वार्ड तो नहीं है, लेकिन अलग-अलग यूनिट के तहत जांच का केंद्र है। यहां पर मरीजों की अच्छे से जांच की जाती है।