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Kaithal News: मां-बाप की तो होती हैं बस जान बेटियां...

Tue, 16 May 2023 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 16 May 2023 02:08 AM IST
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Orthopedist one, patients are getting upset
कैथल। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में इंटरनेशनल लेखक मंच के दुबई चैप्टर ने ऑनलाइन माध्यम से काव्य गोष्ठी आयोजित की। गोष्ठी में यूएसए, वैंकूवर कनाडा, दुबई सहित देश के कई स्थानों से लेखक-लेखिकाओं ने शिरकत की। डॉ. प्रदीप भल्ला ने सारे जहां को बांटती मुस्कान बेटियां मां-बाप की तो होती है बस जान बेटियां... गजल सुनाकर वाहवाही लूटी।
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मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रद्युम्न भल्ला रहे। अध्यक्षता यूएसए की सुदेश मोदगिल नूर ने की। कवि सम्मेलन की शुरुआत अनु ने प्रस्तुत सरस्वती वंदना से से की। इसके बाद डॉ. संगीता शर्मा कुंद्रा ने चंडीगढ़ से गजल उनके होठों पर जो आई मुस्कुराहट, हर जगह पर तो छाई मुस्कुराहट सुनाई। दिल्ली के वरिष्ठ कवि भूपेश प्रताप सिंह ने कविता स्वयं से संवाद उसका, स्वयं से प्रतिवाद था, दिवस का अभिषेक होता, देख जीवन जग गया प्रस्तुत की।।
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पंजाब लुधियाना से पवेनू सतीश कांत ने मन के उदगार कुछ इस तरह व्यक्त किए, वहम कोई भी हो, जल्द खत्म हो जाना चाहिए, खुदा को ही मंजूर नहीं था साथ हमारा, गिराई बिजलियां तो भी खुदा को खुदा लिखूंगी। गोष्ठी में उत्तर प्रदेश मेरठ की रितु अग्रवाल ने अपनी बात रखते हुए कहा, निशानी प्यार की वह पेट में जब छोड़ जाता है, मुहब्बत का जुनूं फिर खून के आंसू बहाता है। वेंकूवर कनाडा की शिखा पोरवाल ने मां को समर्पित अपनी पंक्तियां प्रस्तुत कर कहा, मां तुम कमाल करती हो दिन धडकनों पर राज करती हो। इसी कड़ी में कार्यक्रम की संयोजिका हरियाणा, पंचकूला की कृष्ण गोयल ने मां को सामने रखते हुए कुछ इस तरह से कहा, सुबह शाम मैं मां को सजदा करूं, पर कर्ज उसका मैं कैसे अदा करूं।
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दुबई से अनु बफना ने भी कुछ इस तरह से अपनी बात रखी, खबर जब से मिली है वह शहर में अब नहीं रहे। सुदेश मोदगिल नूर ने कहा, मैं कर्जदार हूं मां की जो इस दुनिया में मुझे लाई है। डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने कहा कि मातृ-दिवस के अवसर पर आयोजित गोष्ठी के माध्यम से साहित्यकारों को सुनना एक सुखद अनुभव है। कार्यक्रम का संचालन दुबई की अनु ने किया। संयोजिका कृष्णा गोयल ने सभी का आभार जताया।
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