कुरुक्षेत्र। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रेनू बाला की अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कपड़ों का व्यवसाय शुरू करने लिए गए लोन को न चुकाने के पर उधारकर्ता को 88,934.30 रुपये की बकाया राशि ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। यह मामला वर्ष 2013 में दिए गए मुद्रा लोन से जुड़ा हुआ था।
अदालत में दायर वाद के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक की रतगल शाखा ने गांव रतगल निवासी धर्मवीर को 24 जनवरी 2013 को 35 हजार का मुद्रा लोन स्वीकृत किया था। बैंक के अनुसार उधारकर्ता ने कपड़ों के व्यवसाय के लिए यह ऋण लिया था और इसके बदले आवश्यक ऋण एवं सुरक्षा दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। बैंक ने अदालत को बताया कि ऋण लेने के बाद उधारकर्ता ने तय शर्तों के अनुसार किस्तों का भुगतान नहीं किया। लगातार चूक के चलते बैंक ने दो फरवरी 2015 को खाते को एनपीए घोषित कर दिया। इसके बाद बैंक ने कई बार भुगतान के लिए संपर्क किया और 14 अगस्त 2024 को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हुआ। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते 11 नवंबर 2025 को उसे एकतरफा (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया गया। बैंक की ओर से अधिकृत अधिकारी चिराग सलूजा ने अदालत में बयान दर्ज कराते हुए आवेदन पत्र, टर्म लोन एग्रीमेंट, बैलेंस कन्फर्मेशन लेटर, कानूनी नोटिस और बैंक स्टेटमेंट समेत कई दस्तावेज पेश किए। अदालत ने अपने फैसले में माना कि बैंक की ओर से प्रस्तुत मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य निर्विवाद हैं तथा प्रतिवादी ने ऋण लेने और बकाया राशि के संबंध में समय-समय पर अपनी देनदारी स्वीकार भी की थी।कोर्ट ने आदेश दिया कि धर्मवीर पंजाब नेशनल बैंक को 88,934.30 रुपये की राशि अदा करेगा। साथ ही वाद दायर होने की तारीख से भुगतान होने तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।