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एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से बाधित रही स्वास्थ्य सेवाएं
ब्यूरो कैथल
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:08 AM IST
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नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों की हड़ताल पर रहे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्वास्थ्य विभाग में नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लोगों को दिन भर परेशानियों का सामना करना पड़ा। विभाग में कई तरह से सेवाएं प्रभावित हुईं। ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए सामान्य अस्पताल पहुंचने वाली गर्भवती माताओं सहित मरीजों को भी दिक्कतें आईं। एंबुलेंस में महज सड़क हादसों के शिकार लोगों को लाया गया। दो दिवसीय हड़ताल में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत जिले में लगे 447 कर्मचारियों ने भाग लिया। जिले के अस्पताल, पीएचसी, एएनएम, एंबुलेंस स्टाफ, सूचना सहायक, लेखा सहायक, आशा समन्वयक, कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल रहे।
इन सेवाओं पर रहा ज्यादा असर
एनएचएम के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण आशा कार्यकर्ता की सेवाएं, एंबुलेंस से गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल लाए जाने, स्टाफ नर्स व एएनएम की हड़ताल के कारण टीकाकरण पर असर रहा। सूचना सहायक के कारण रिपोर्ट नहीं जा सकी। लेखा सहायकों की हड़ताल के कारण भी काम काज प्रभावित रहा। प्रधानमंत्री मातृत्व शिशु सुरक्षित योजना पर भी इस का असर रहा।
गर्भवती महिलाओं को वार्ड में उठानी पड़ी परेशानी
कर्मचारियों के हड़ताल का बड़ा असर महिला वार्ड में देखा गया। स्टाफ नर्स, एएनएम, गर्भवती टीकाकरण में नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी काम करते हैं। कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण महिलाएं वहां भटकती रही।
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हड़ताल की भेंट चढ़ी प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित योजना
प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित योजना के तहत जिले भर में प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य सुविधाएं निशुल्क हैं। लेकिन गांव के एएनएम सहित अन्य कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण योजना का लाभ गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल सका।
एंबुलेंस सेवा रहीं बंद भटकते रहे मरीज
एंबुलेंस सेवा बंद होने के कारण मरीज अस्पतालों में इधर-उधर भटकते रहे। 102 नंबर पर फोन करने पर केवल कर्मचारी सड़क हादसे के मरीज को लेकर आए। लेकिन इसके अलावा चंडीगढ़ रेफर व गर्भवती महिलाओं सहित किसी अन्य केस में एंबुलेंस नहीं गई। जिसके कारण गांव व शहर से आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सेवाएं हुई बाधित, लोग परेशान
अस्पताल में इलाज के लिए आए जोगिंद्र सिंह, शांति देवी, कमला, पूनम, राजबाला ने बताया कि वह सुबह आठ बजे अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए थे। लेकिन पहले दो घंटे में जाकर पर्ची कटी है। डॉक्टरों के गेट के बाहर सैकड़ों लोग खड़े हैं। करीब दो घंटे बाद भी डॉक्टर के पास नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण मरीजों की कोई सुध नहीं ले रहा है। जिसके कारण बुजुर्ग व महिलाओं को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
इन मुद्दों को लेकर की गई हड़ताल-
- एनएचएम से 20 प्रतिशत स्टाफ को हटाया जा रहा है।
- एनएचएम में लगे कर्मचारियों की मांग है कि उनको नियमित कर्मचारियों के सामान वेतन दिया जाए।
- एनएचएम के कर्मचारियों को ना तो केंद्र और ना ही राज्य अपना कर्मचारी मानता है।
- करीब 10 से 13 साल काम करते हो चुके है। सरकार उनको तीन वर्ष या 10 वर्ष वाली पॉलिसी के तहत नियमित किया जाए।
सरकार 20 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करना चाहती है और आउटसोर्सिंग के माध्यम से लगाना चाहती है। हमारी मांग है कि सरकार उनको तीन साल या फिर 10 साल की पॉलिसी में डालकर नियमित करें। उनमें से अधिकतर कर्मचारी 10 से 13 वर्षों से काम कर रहे हैं। साथ ही एनएचएम के कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के सामान वेतन दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय हड़ताल में जिले भर से 447 कर्मचारी भाग ले रहे हैं।
नरेंद्र कुमार, जिला प्रधान नेशनल हेल्थ मिशन कर्मचारी यूनियन
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कुछ परेशानियां तो आई हैं। लेकिन प्रयास किया गया कि मरीजों को ज्यादा दिक्कतें ना हों। आपातकालीन सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही नियमित स्टाफ की सहायता से विभाग की सेवाएं जारी रहीं।
डा. मुनीष बंसल, सीएमओ
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इन सेवाओं पर रहा ज्यादा असर
एनएचएम के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण आशा कार्यकर्ता की सेवाएं, एंबुलेंस से गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल लाए जाने, स्टाफ नर्स व एएनएम की हड़ताल के कारण टीकाकरण पर असर रहा। सूचना सहायक के कारण रिपोर्ट नहीं जा सकी। लेखा सहायकों की हड़ताल के कारण भी काम काज प्रभावित रहा। प्रधानमंत्री मातृत्व शिशु सुरक्षित योजना पर भी इस का असर रहा।
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गर्भवती महिलाओं को वार्ड में उठानी पड़ी परेशानी
कर्मचारियों के हड़ताल का बड़ा असर महिला वार्ड में देखा गया। स्टाफ नर्स, एएनएम, गर्भवती टीकाकरण में नेशनल हेल्थ मिशन के कर्मचारी काम करते हैं। कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण महिलाएं वहां भटकती रही।
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हड़ताल की भेंट चढ़ी प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित योजना
प्रत्येक माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षित योजना के तहत जिले भर में प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की जांच, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य सुविधाएं निशुल्क हैं। लेकिन गांव के एएनएम सहित अन्य कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण योजना का लाभ गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल सका।
एंबुलेंस सेवा रहीं बंद भटकते रहे मरीज
एंबुलेंस सेवा बंद होने के कारण मरीज अस्पतालों में इधर-उधर भटकते रहे। 102 नंबर पर फोन करने पर केवल कर्मचारी सड़क हादसे के मरीज को लेकर आए। लेकिन इसके अलावा चंडीगढ़ रेफर व गर्भवती महिलाओं सहित किसी अन्य केस में एंबुलेंस नहीं गई। जिसके कारण गांव व शहर से आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सेवाएं हुई बाधित, लोग परेशान
अस्पताल में इलाज के लिए आए जोगिंद्र सिंह, शांति देवी, कमला, पूनम, राजबाला ने बताया कि वह सुबह आठ बजे अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आए थे। लेकिन पहले दो घंटे में जाकर पर्ची कटी है। डॉक्टरों के गेट के बाहर सैकड़ों लोग खड़े हैं। करीब दो घंटे बाद भी डॉक्टर के पास नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कर्मचारी हड़ताल पर होने के कारण मरीजों की कोई सुध नहीं ले रहा है। जिसके कारण बुजुर्ग व महिलाओं को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
इन मुद्दों को लेकर की गई हड़ताल-
- एनएचएम से 20 प्रतिशत स्टाफ को हटाया जा रहा है।
- एनएचएम में लगे कर्मचारियों की मांग है कि उनको नियमित कर्मचारियों के सामान वेतन दिया जाए।
- एनएचएम के कर्मचारियों को ना तो केंद्र और ना ही राज्य अपना कर्मचारी मानता है।
- करीब 10 से 13 साल काम करते हो चुके है। सरकार उनको तीन वर्ष या 10 वर्ष वाली पॉलिसी के तहत नियमित किया जाए।
सरकार 20 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी करना चाहती है और आउटसोर्सिंग के माध्यम से लगाना चाहती है। हमारी मांग है कि सरकार उनको तीन साल या फिर 10 साल की पॉलिसी में डालकर नियमित करें। उनमें से अधिकतर कर्मचारी 10 से 13 वर्षों से काम कर रहे हैं। साथ ही एनएचएम के कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी के सामान वेतन दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि दो दिवसीय हड़ताल में जिले भर से 447 कर्मचारी भाग ले रहे हैं।
नरेंद्र कुमार, जिला प्रधान नेशनल हेल्थ मिशन कर्मचारी यूनियन
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कुछ परेशानियां तो आई हैं। लेकिन प्रयास किया गया कि मरीजों को ज्यादा दिक्कतें ना हों। आपातकालीन सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही नियमित स्टाफ की सहायता से विभाग की सेवाएं जारी रहीं।
डा. मुनीष बंसल, सीएमओ