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रैन बसेरा नहीं, कैसे कटेंगी ठंडी रातें
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Fri, 04 Dec 2015 11:33 PM IST
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यदि कड़कड़ाती ठंड में किसी को रात गुजारने के लिए जगह की आवश्यकता पड़ जाए तो सिर छिपाने के लिए जगह नहीं मिल पाएगी। कैथल में रैन बसेरे की व्यवस्था नहीं है। पिछले साल जो रैन बसेरा बनाया गया था उस पर रात को ताला लगा हुआ मिला। जरूरतमंदों को सड़कों पर ही रात गुजारनी पड़ रही है।
सर्दी के मौसम में अकसर लोगों को रैन बसेरे की आवश्यकता पड़ती है। रात को देर-सवेर होने पर रैन बसेरे में रात बिताकर राहगीर अपने गंतव्य की ओर जा सकता है जिसके लिए सरकार द्वारा रैन बसेरे बनाए जाने के निर्देश दिए जाते रहते हैं। न्यायालय द्वारा भी इस संबंध में आदेश जारी किए गए थे।
जिला प्रशासन द्वारा अब तक रैन बसेरे की व्यवस्था नहीं की गई है। न ही इस संबंध में कोई जानकारी है। रेलवे स्टेशन एवं बस अड्डे पर भी रात को रहने के लिए व्यवस्था एवं वेटिंग रूम आदि की सुविधा नहीं है। पिछले साल सरकार द्वारा शहर में रेलवे स्टेशन एवं बस अड्डे से करीब पांच से छह किलोमीटर दूर स्थित महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक केंद्र में रैन बसेरा बनाया गया था। रात को करीब 10 बजे जब यहां पहुंच कर व्यवस्था का पता लगाया गया तो सामुदायिक केंद्र पर ताला लगा हुआ मिला।
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सड़कों पर सोते हैं लोग
रात को जरूरतमंद व्यक्ति रेलवे स्टेशन या फिर सड़कों पर सोकर रात बीताते हैं। रात को पिहोवा चौक पर दुकानों के सामने, कोयल कांपलेक्स मार्केट के बरामदे सहित रेलवे स्टेशन पर भी लोग सोए हुए मिले। जो सर्दी में ठिठुर रहे थे।
पिछले साल महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक केंद्र में रैन बसेरा बनाया गया था। इस बार यह व्यवस्था कहां है, पता करवाएंगे। यदि व्यवस्था नहीं हुई तो रैन बसेरे की तुरंत व्यवस्था की जाएगी।
केएम पांडुरंग, डीसी
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सर्दी के मौसम में अकसर लोगों को रैन बसेरे की आवश्यकता पड़ती है। रात को देर-सवेर होने पर रैन बसेरे में रात बिताकर राहगीर अपने गंतव्य की ओर जा सकता है जिसके लिए सरकार द्वारा रैन बसेरे बनाए जाने के निर्देश दिए जाते रहते हैं। न्यायालय द्वारा भी इस संबंध में आदेश जारी किए गए थे।
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जिला प्रशासन द्वारा अब तक रैन बसेरे की व्यवस्था नहीं की गई है। न ही इस संबंध में कोई जानकारी है। रेलवे स्टेशन एवं बस अड्डे पर भी रात को रहने के लिए व्यवस्था एवं वेटिंग रूम आदि की सुविधा नहीं है। पिछले साल सरकार द्वारा शहर में रेलवे स्टेशन एवं बस अड्डे से करीब पांच से छह किलोमीटर दूर स्थित महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक केंद्र में रैन बसेरा बनाया गया था। रात को करीब 10 बजे जब यहां पहुंच कर व्यवस्था का पता लगाया गया तो सामुदायिक केंद्र पर ताला लगा हुआ मिला।
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सड़कों पर सोते हैं लोग
रात को जरूरतमंद व्यक्ति रेलवे स्टेशन या फिर सड़कों पर सोकर रात बीताते हैं। रात को पिहोवा चौक पर दुकानों के सामने, कोयल कांपलेक्स मार्केट के बरामदे सहित रेलवे स्टेशन पर भी लोग सोए हुए मिले। जो सर्दी में ठिठुर रहे थे।
पिछले साल महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक केंद्र में रैन बसेरा बनाया गया था। इस बार यह व्यवस्था कहां है, पता करवाएंगे। यदि व्यवस्था नहीं हुई तो रैन बसेरे की तुरंत व्यवस्था की जाएगी।
केएम पांडुरंग, डीसी