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न सूई को तोड़ने व और न सीरिंज को वापस मोड़ने का झंझट
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कैथल। कोरोना से बचाव के लिए किए जा रहे टीकाकरण के कार्य में अब स्वास्थ्य विभाग विशेष तकनीक से बनाई गई सीरिंज का प्रयोग करेगा। नई सीरिंज को टीके में प्रयोग करने के बाद न तो सूई को तोड़ने का झंझट रहेगा ना ही सीरिंज को मोड़ने का। प्रयोग के बाद टीके के पिस्टन को वापस खींचते ही सूई का नुकीला हिस्सा अपने आप टीके के अंदर चला जाएगा।
इससे टीकाकरण तो सुरक्षित होगा ही, साथ ही किसी पर प्रयोग की गई सूई लगने का भी खतरा नहीं रहेगा। सूई तोड़ने के लिए लगाए जाने वाले अतिरिक्त कर्मचारी की भी टीकाकरण के दौरान जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा टीकाकरण में लगे कर्मचारियों को भी किसी व्यक्ति पर प्रयोग की गई सूई लगने और बीमार होने का खतरा नहीं रहेगा। इस सीरिंज का प्रयोग केवल एक बार ही हो सकेगा। नई तकनीक से तैयार की गई सीरिंज दोबारा उबालकर या रिसाइकल कर प्रयोग नहीं की जा सकेगी। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस सीरिंज को फुल्ली कोलेप्सिबल व रियूज प्रीवेंशन सीरिंज नाम दिया गया है, क्योंकि प्रयोग के बाद इसे तोड़ने की बजाय इकट्ठा किया जा सकता है। हालांकि यह सीरिंज जिले में 15 दिन पहले आ चुकी है। विभिन्न क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए इसे बांटा भी जा चुका है। फिर भी विभाग ने अब तब इनके प्रयोग की अनुमति नहीं दी है, क्योंकि इससे पहले कर्मचारियों को इसके प्रयोग का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी था। अब विभाग ने जिला स्तर पर कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण दिया है। जल्द ही इन नई सीरिंज का टीकाकरण में प्रयोग शुरू किया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि नई सीरिंज के प्रयोग के लिए विभाग ने कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। कई बार टीका लगाते समय व्यक्ति या मरीज हिल जाता है, इससे कर्मचारियों को सूई लगने का डर रहता है। इसके अलावा केंद्रों पर पहुंचने वाले लोगों के लिए भी नई सीरिंज सुरक्षित है। जल्द ही टीकाकरण में इसका प्रयोग शुरू किया जाएगा।
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इससे टीकाकरण तो सुरक्षित होगा ही, साथ ही किसी पर प्रयोग की गई सूई लगने का भी खतरा नहीं रहेगा। सूई तोड़ने के लिए लगाए जाने वाले अतिरिक्त कर्मचारी की भी टीकाकरण के दौरान जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा टीकाकरण में लगे कर्मचारियों को भी किसी व्यक्ति पर प्रयोग की गई सूई लगने और बीमार होने का खतरा नहीं रहेगा। इस सीरिंज का प्रयोग केवल एक बार ही हो सकेगा। नई तकनीक से तैयार की गई सीरिंज दोबारा उबालकर या रिसाइकल कर प्रयोग नहीं की जा सकेगी। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस सीरिंज को फुल्ली कोलेप्सिबल व रियूज प्रीवेंशन सीरिंज नाम दिया गया है, क्योंकि प्रयोग के बाद इसे तोड़ने की बजाय इकट्ठा किया जा सकता है। हालांकि यह सीरिंज जिले में 15 दिन पहले आ चुकी है। विभिन्न क्षेत्रों में टीकाकरण के लिए इसे बांटा भी जा चुका है। फिर भी विभाग ने अब तब इनके प्रयोग की अनुमति नहीं दी है, क्योंकि इससे पहले कर्मचारियों को इसके प्रयोग का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी था। अब विभाग ने जिला स्तर पर कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण दिया है। जल्द ही इन नई सीरिंज का टीकाकरण में प्रयोग शुरू किया जाएगा। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि नई सीरिंज के प्रयोग के लिए विभाग ने कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है। कई बार टीका लगाते समय व्यक्ति या मरीज हिल जाता है, इससे कर्मचारियों को सूई लगने का डर रहता है। इसके अलावा केंद्रों पर पहुंचने वाले लोगों के लिए भी नई सीरिंज सुरक्षित है। जल्द ही टीकाकरण में इसका प्रयोग शुरू किया जाएगा।
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