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कभी थी प्रदेश की अग्रणी, अब हुई तंगहाल
beauro kaithal
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:08 AM IST
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कभी प्रदेश के अग्रणी निकायों में शामिल रही नगर परिषद कैथल इस समय तंगहाल हो चली है। परिषद की तंगहाली का आलम ये है कि परिषद के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। हर महीने करीब 90 लाख रुपये की राशि वेतन के लिए चाहिए। लेकिन पिछले दो माह से कर्मचारियों को वेतन ही नहीं मिला है। आउटसोर्सिंग के कई कर्मचारी तो चार माह से वेतन के लिए तरस रहे हैं। कर्मचारियों ने अब वेतन संबंधी मांगों के लिए हड़ताल का ऐलान किया है।
पिछले एक दशक से करोड़ों रुपये के काम हुए परिषद के माध्यम से :
पिछले एक दशक में कैथल नगर परिषद के माध्यम से शहर में करोड़ों रुपये के काम हुए हैं। परिषद द्वारा टैक्स वसूली सहित कई तरह के फंड जुटा लिए जाते थे। जिस कारण वेतन संबंधी कभी परेशानी नहीं आई। लेकिन पिछले लंबे समय से परिषद ग्रांट न मिलने के कारण तंगहाली से गुजर रही है। अन्य विकास कार्य तो दूर की बात, अब हालत ये हो गए हैं कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों को देने के लिए वेतन तक के पैसे नहीं हैं।
400 से अधिक कर्मचारियों को वेतन नहीं :
नगर परिषद कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों सहित यहां कुल नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 280 है। वहीं अस्थाई कर्मचारियों की संख्या भी 150 से अधिक है। इस तरह से परिषद में 400 से ज्यादा कर्मचारी हैं। जिनकी रोजी-रोटी परिषद द्वारा दिए जाने वाले वेतन से चल रही है। इनमें से नियमित कर्मचारियों को पिछले दो माह से और अस्थाई कर्मचारियों को करीब 4 माह से वेतन नहीं मिला है।
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90 लाख जुटाना हुआ मुश्किल :
परिषद का शहर के लोगों पर करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है, लेकिन हालात ये हैं कि हर माह वेतन के तौर पर दी जाने वाली करीब 90 लाख रुपये की राशि जुटाना अब मुश्किल हो गया है। इसका मुख्य कारण जहां पिछले लंबे समय से सरकार की ओर से कोई ग्रांट नहीं मिली है, वहीं परिषद के अपने आय के ज्यादा स्रोत नहीं हैं। प्रॉपर्टी टैक्स के माध्यम से होने वाली आय भी लगभग ठप पड़ी हुई है, क्योंकि अधिकारियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। वसूली के लिए कोई विशेष कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
कर्मचारी बैठे धरने पर :
वेतन न मिलने के कारण नगर पालिका कर्मचारी संघ ने धरना शुरू कर दिया। धरने की अध्यक्षता ब्लॉक प्रधान रामशरण व संचालन रामेश्वर गिल ने किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेता रामेश्वर गिल व राजेंद्र टांक ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन न मिलने के कारण परिवारों का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। यहां कार्यरत सभी कर्मचारियों का तीन-तीन माह से वेतन रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों सहित दो साल से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने, कर्मचारियों को पे रोल पर रखने, न्यूनतम वेतन 15 हजार करने, पंजाब के समान वेतन देने सहित सफाई कर्मचारियों को बिना लाभ हानि की कीमत पर प्लाट देने, नगर निगमों में 15000 कर्मचारियों की भर्ती करने सहित अन्य मांगें भी लंबित हैं। धरने में अध्यापक संघ के जिला प्रधान सतबीर गोयत ने भी समर्थन किया। इस अवसर पर कृपाल गिल, जगदीश, देवराज, अमृत लाल, सुरेश कुमार, ईश्म सिंह, विक्की टांक, अमित कुमार, जयप्रकाश, रोश व अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।
कर्मचारियों के वेतन के लिए प्रयास किया जा रहा है। डीसी की अनुमति से स्टांप से होने वाली आय से वेतन देने सहित अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
नरेंद्र पाल सिंह मलिक, प्रशासक, नगर परिषद कैथल।
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पिछले एक दशक से करोड़ों रुपये के काम हुए परिषद के माध्यम से :
पिछले एक दशक में कैथल नगर परिषद के माध्यम से शहर में करोड़ों रुपये के काम हुए हैं। परिषद द्वारा टैक्स वसूली सहित कई तरह के फंड जुटा लिए जाते थे। जिस कारण वेतन संबंधी कभी परेशानी नहीं आई। लेकिन पिछले लंबे समय से परिषद ग्रांट न मिलने के कारण तंगहाली से गुजर रही है। अन्य विकास कार्य तो दूर की बात, अब हालत ये हो गए हैं कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों को देने के लिए वेतन तक के पैसे नहीं हैं।
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400 से अधिक कर्मचारियों को वेतन नहीं :
नगर परिषद कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों सहित यहां कुल नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 280 है। वहीं अस्थाई कर्मचारियों की संख्या भी 150 से अधिक है। इस तरह से परिषद में 400 से ज्यादा कर्मचारी हैं। जिनकी रोजी-रोटी परिषद द्वारा दिए जाने वाले वेतन से चल रही है। इनमें से नियमित कर्मचारियों को पिछले दो माह से और अस्थाई कर्मचारियों को करीब 4 माह से वेतन नहीं मिला है।
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90 लाख जुटाना हुआ मुश्किल :
परिषद का शहर के लोगों पर करोड़ों रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है, लेकिन हालात ये हैं कि हर माह वेतन के तौर पर दी जाने वाली करीब 90 लाख रुपये की राशि जुटाना अब मुश्किल हो गया है। इसका मुख्य कारण जहां पिछले लंबे समय से सरकार की ओर से कोई ग्रांट नहीं मिली है, वहीं परिषद के अपने आय के ज्यादा स्रोत नहीं हैं। प्रॉपर्टी टैक्स के माध्यम से होने वाली आय भी लगभग ठप पड़ी हुई है, क्योंकि अधिकारियों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। वसूली के लिए कोई विशेष कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
कर्मचारी बैठे धरने पर :
वेतन न मिलने के कारण नगर पालिका कर्मचारी संघ ने धरना शुरू कर दिया। धरने की अध्यक्षता ब्लॉक प्रधान रामशरण व संचालन रामेश्वर गिल ने किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेता रामेश्वर गिल व राजेंद्र टांक ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन न मिलने के कारण परिवारों का गुजारा चलाना मुश्किल हो गया है। यहां कार्यरत सभी कर्मचारियों का तीन-तीन माह से वेतन रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मियों सहित दो साल से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने, कर्मचारियों को पे रोल पर रखने, न्यूनतम वेतन 15 हजार करने, पंजाब के समान वेतन देने सहित सफाई कर्मचारियों को बिना लाभ हानि की कीमत पर प्लाट देने, नगर निगमों में 15000 कर्मचारियों की भर्ती करने सहित अन्य मांगें भी लंबित हैं। धरने में अध्यापक संघ के जिला प्रधान सतबीर गोयत ने भी समर्थन किया। इस अवसर पर कृपाल गिल, जगदीश, देवराज, अमृत लाल, सुरेश कुमार, ईश्म सिंह, विक्की टांक, अमित कुमार, जयप्रकाश, रोश व अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।
कर्मचारियों के वेतन के लिए प्रयास किया जा रहा है। डीसी की अनुमति से स्टांप से होने वाली आय से वेतन देने सहित अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। शीघ्र ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
नरेंद्र पाल सिंह मलिक, प्रशासक, नगर परिषद कैथल।