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Kaithal News: मां का हाथ जगन्नाथ, बच्चों का कभी न छोड़े साथ

Mon, 15 May 2023 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 15 May 2023 02:23 AM IST
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Mother's hand Jagannath, never leave children's side
आरकेएसडी कॉलेज के साहित्य सभा ने कवि सम्मेलन किया आयोजित
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के अध्यापक कक्ष में साहित्य सभा ने मासिक कवि सम्मेलन, पुस्तक लोकार्पण व सम्मान समारोह आयोजित किया। प्रो. तिलक राज सेठी ने बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। मां पर कविता प्रस्तुत करते हुए रजनीश शर्मा ने कहा, मां का हाथ जगन्नाथ। बच्चों का कभी न छोड़े साथ।
प्रो. अमृत लाल मदान, कमलेश शर्मा, डॉ. हरीश चंद्र झंडई विशेष रूप से मौजूद रहे। इस दौरान रतन चंद सरदाना के उपन्यास दीप शिखा का, प्रो. तिलक राज सेठी के गजल संग्रह गजलांजलि का और दिलबाग अकेला के कविता संग्रह मैं भीड़ हूं का लोकार्पण किया गया। कवि सम्मेलन की शुरूआत में श्याम सुंदर गौड़ ने सरस्वती-वंदना प्रस्तुत की। ईश्वर चंद गर्ग ने कहा, आओ जय-जयकार करें, भांडगिरी इख्तियार करें। क्या रखा है गैरत में, गैरत से इनकार करें।
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रवींद्र रवि ने कहा, मुझे इस बात का ही गम हुआ है कि मेरे पास कितना कम हुआ है। प्रो. तिलक राज सेठी ने कहा कि एक थी बस एक ही काफी रही। जिंदगी जैसी थी काफी रही। रेणु सतीश ने कहा, जरा मासूमियत माहौल में बनाए रखना। अपने भीतर एक बच्चा बचाए रखना। डॉ. विनीता चोपड़ा ने कहा, न जाने कैसी आदत हो गई है। तुम्हें देखूं ये चाहत हो गई है। मां ने लगाए जाने वाले काले टीके को लेकर चेतन चौहान ने कहा, वो कालिख ही बचाती है तुम्हें दुनियां की नजरों से। वो मां का टीका होता है, कोई धब्बा नहीं होता।
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डॉ. तेजिंद्र ने कहा, कल-कल करती बहती नदिया अच्छी लगती है। कल-कल घर में हो तो किसको अच्छी लगती है। कल आया था कल आएगा, कल किसने जाना, बीते कल की याद सुहानी अच्छी लगती है। सतपाल पराशर आनंद ने कहा, बेटी पंछी एक से, लाग्गैं मन्नै हमसे। पांख आए तो उड़ गए, दोनों दूजे देस। डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने कहा, आपका मुस्कुराना वो रिश्ते निभाना, बहुत याद आया, बहुत याद आया।

इनके अलावा रतन चंद सरदाना, कमलेश शर्मा, डॉ. हरीश चंद्र झंडई, डॉ. चतरभुज बंसल सौथा, स्वामी टीसी अग्रवाल, स्वामी कृष्णानंद सरस्वती, रामफल गौड़, पूजा, नीरू मेहता, दिलबाग अकेला, महेंद्र पाल सारस्वत, सारस्वत शांडिल्य, प्रीतम लाल शर्मा, अशोक बैरागी, अनिल कौशिक, डॉ. विकास आनंद, शमशेर सिंह कैंदल, सुरजीत ठाकुर, भोला राम, बलवान, राजेश भारती, सतीश शर्मा, ममता सूद, सीमा भाटिया, सतीश शर्मा व अनिल गर्ग ने भी कविताएं प्रस्तुत की। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रतन चंद सरदाना ने की। संचालन डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने किया।
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