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हर रोज दम तोड़ रहे हैं दो से अधिक मासूम
राजू जगत/कैथल
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:37 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग के तमाम प्रयासों के बावजूद शिशु मृत्यु दर में कम नहीं आ रही है। जिले में स्थिति इतनी गंभीर है कि हर रोज 2 से अधिक बच्चों की मौत हो रही है। वर्ष 2015 में जिले में 910 नवजात बच्चों की मौत हुई है। जो वर्ष 2014 में हुई 1014 बच्चों के मुकाबले कम है। लेकिन हालात अभी भी चिंताजनक बने हुए हैं। पूरे प्रदेश में जहां शिशु मृत्यु दर का अनुपात 32 है वहीं जिला कैथल में शिशु मृत्यु दर का अनुपात 37 है।
हर रोज मर रहे हैं दो से अधिक बच्चे
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में तमाम प्रयासों के बावजूद कैथल जिले में 0 से एक साल तक के 910 बच्चों की मौत हुई है। ये तो वे बच्चे हैं जिनका विभाग को पता चल गया। ऐसे बहुत से ओर बच्चे हो सकते हैं, जो विभागीय जानकारी में नहीं आते। हालांकि वर्ष 2014 में पूरे जिले में 1014 बच्चों की मौत की जानकारी मिली थी। जिसके मुकाबले गत वर्ष 96 बच्चों की मौत कम हुई है। लेकिन इतना सुधार आवश्यक नहीं है। पूरे जिले में अभी भी 0 से एक साल तक की आयु में दम तोड़ने वाले बच्चों का प्रतिशत 37 है।
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15 प्रतिशत बच्चों की पीठ की हवा न निकालने से होती है मृत्यु
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 15 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु मां व परिजनों द्वारा जन्म के समय एवं इसके बाद बच्चे की पीठ के न थपथपाने से होती है। कुछ माताएं बच्चा पैदा करने के बाद बच्चे को दूध पिलाती हैं, लेकिन वह बच्चे का कंधे पर लिटा कर बच्चे की पीठ नहीं थपथपाती। पीठ न थपथपाने के कारण बच्चे के अंदर हवा नहीं निकलती है। जिसके कारण बच्चे की मृत्यु हो जाती है।
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शिशु मृत्यु दर में अधिकतर लड़कियां
शिशु मृत्यु दर में अधिकतर लड़कियां है। कई परिवार लड़की होने के बाद उसका इतना ध्यान नहीं रखते है। जितना लड़का होने के बाद रखते है। जिसके कारण लड़कियों की मृत्यु दर लड़कों के मुकाबले अधिक है।
ये भी हैं मुख्य कारण:-
1. कम आयु में शादी करने के कारण
2. गर्भ में समय से पहले व समय से लेट बच्चा पैदा होने के कारण
3. पहला बच्चा जन्म लेने के बाद दूसरे बच्चे में अंतर न रखने के कारण
4. बच्चा पैदा होने पर बच्चे की पीठ को न थपथपाना
5. गर्भ धारण करने के बाद माताओं का खानपान सही न होना
6. गर्भवती महिला के खांसी, दस्त, बुखार व अन्य बीमारी होना
7. झूठे प्रलोभन में आकर लड़का होने संबंधी दवाई खाना
जिले में शिशु मृत्यु दर बढ़ने का बड़ा कारण अंधविश्वास है। इसे रोकने के लिए पूरे जिले में जांच अभियान चलाया जा रहा है। जमीनी स्तर पर आंगनबाड़ी वर्कर्स, आशा वर्कर्स सहित स्वास्थ्य कर्मियों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में शिशु मृत्यु दर की स्थिति चिंताजनक है। इसमें सुधार का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की अधिकतर योजनाओं का उद्देश्य बच्चों की शिशु मृत्यु दर को कम करना है।
वंदना भाटिया, सीएमओ, कैथल।