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Kaithal News: शिक्षा, नारी उत्थान और समानता का दिया संदेश
Fri, 13 Feb 2026 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 13 Feb 2026 12:25 AM IST
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कैथल। इंदिरा गांधी पीजी महाविद्यालय में महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर इतिहास विभाग के तत्वावधान में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद के विचारों, सिद्धांतों तथा समाज सुधार में उनके योगदान से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबंधक समिति के प्रधान राम बहादुर खुरानिया ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज में व्याप्त कुरीतियों का पुरजोर विरोध किया और शिक्षा, नारी उत्थान तथा समानता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। प्राचार्या डॉ. आरती गर्ग ने कहा कि “वेदों की ओर लौटो” का संदेश देकर महर्षि दयानंद ने भारतीय समाज को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।
सांध्यकालीन प्राचार्या प्रभारी श्वेता तंवर ने महर्षि दयानंद को महान समाज सुधारक और शिक्षाविद बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य समाज को अंधविश्वास से मुक्त कर तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित करना था। इस अवसर पर इतिहास विभाग की प्रो. रेनू शर्मा, प्रो. सुरेश, प्रो. ममता सहित अन्य स्टाफ सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। संवाद
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कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबंधक समिति के प्रधान राम बहादुर खुरानिया ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज में व्याप्त कुरीतियों का पुरजोर विरोध किया और शिक्षा, नारी उत्थान तथा समानता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। प्राचार्या डॉ. आरती गर्ग ने कहा कि “वेदों की ओर लौटो” का संदेश देकर महर्षि दयानंद ने भारतीय समाज को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं।
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सांध्यकालीन प्राचार्या प्रभारी श्वेता तंवर ने महर्षि दयानंद को महान समाज सुधारक और शिक्षाविद बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य समाज को अंधविश्वास से मुक्त कर तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित करना था। इस अवसर पर इतिहास विभाग की प्रो. रेनू शर्मा, प्रो. सुरेश, प्रो. ममता सहित अन्य स्टाफ सदस्य एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। संवाद
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