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सब्जी मंडियों में मार्केट फीस और एचआरडीएफ खत्म
कैथल
Updated Thu, 13 Mar 2014 11:40 PM IST
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा की गई घोषणा के बाद आखिरकार मंडियों में लगने वाली मार्केट फीस एवं एचआरडीएफ टैक्स को जीरो प्रतिशत कर दिया गया है।
फीस एवं कर लगाने के प्रावधान को खत्म न करते हुए मंडियों को मार्केटिंग बोर्ड से जोड़ कर रखा गया है। इसके साथ-साथ आढ़तियों की पांच प्रतिशत कमीशन भी जारी रहेगी। जिस कारण मंडियों का सिस्टम पूरी तरह से पहले की तरह से लागू रहेगा। इस फैसले से सब्जियां सस्ती होने की उम्मीद तो कम है, लेकिन अकेले कैथल जिले में मार्केटिंग बोर्ड को हर महीने इससे 10 लाख रुपये का नुकसान होगा।
एक-एक प्रतिशत ली जा रही थी फीस एवं कर
सब्जी मंडियों में पहले 100 रुपये की सब्जी की बिक्री पर पांच रुपये आढ़ती का कमीशन, एक रुपये मार्केट कमेटी फीस और एक रुपये एचआरडीएफ के रूप में अतिरिक्त रूप से लिया जा रहा था। जिससे कैथल शहर में स्थित सब्जी मंडियों से प्रत्येक माह करीब छह लाख रुपये की आय हो रही थी।
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इसके अलावा सीवन, गुहला-चीका, पूंडरी और अन्य सब्जी मंडियां हैं, जहां से कम से कम 4 लाख की आय होती है। लेकिन अब फीस एवं कर को समाप्त करने से मार्केटिंग बोर्ड को मंडियों से कोई आय नहीं होगी।
टैक्स जीरो प्रतिशत, आढ़तियों को मिलेगी कमीशन
बोर्ड ने सरकार की घोषणा के अनुसार मार्केटिंग फीस एवं एचआरडीएफ कर को जीरो प्रतिशत कर दिया है। लेकिन आढ़तियों की पांच प्रतिशत की आढ़त जारी रहेगी। इस तरह से 100 रुपये की सब्जी सरकार के प्रयासों के अनुसार दो रुपये सस्ती होनी चाहिए। लेकिन मंडी में इसका असर कम ही देखने को मिल रहा है।
सरकार द्वारा फीस को समाप्त किए जाने के चलते कयास लगाए जा रहे थे कि मंडियां बोर्ड के नियंत्रण से मुक्त हो जाएंगी। लेकिन फीस के प्रावधान को समाप्त करने के बजाये इसे 0 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर सरकार फीस के प्रावधान को समाप्त कर देती तो मंडियां मार्केटिंग बोर्ड से अलग होती और इसके बाद कोई भी व्यक्ति कहीं भी सब्जी बेच एवं खरीद कर सकता था। लेकिन यह प्रावधान समाप्त नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि आढ़ती एसोसिएशन ने मंडियों को पूरी तरह से मुक्त करने के फैसले का विरोध किया था। यदि मंडियां पूरी तरह से मुक्त हो जातीं हैं तो आढ़तियों के लिए भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता था।
इस तरह से भविष्य में फीस दोबारा लागू करने की संभावनाएं भी कर ली गई हैं। लेकिन फिल्हाल सरकार ने फीस एवं कर समाप्त कर सब्जियों की कीमतों से अपना हाथ पूरी तरह से पीछे खींच लिया है।
बोर्ड के नियंत्रण में रहेंगी मंडियां
मार्केट कमेटी सचिव रविंद्र सैनी ने बताया कि मार्केट फीस एवं एचआरडीएफ को 0 प्रतिशत कर दिया गया है। लेकिन मंडियां पूरी तरह से मार्केटिंग बोर्ड के नियंत्रण में रहेंगी। साथ ही आढ़तियों का पांच प्रतिशत कमीशन भी जारी रहेगा।
उधर, सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन प्रधान मुकंद कालड़ा का कहना है कि यह फैसला हो चुका है। एसोसिएशन ने पहले ही कहा था कि इससे कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। सब्जियों की कीमतों पर मौसम एवं आपूर्ति का ही ज्यादा असर रहता है।
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फीस एवं कर लगाने के प्रावधान को खत्म न करते हुए मंडियों को मार्केटिंग बोर्ड से जोड़ कर रखा गया है। इसके साथ-साथ आढ़तियों की पांच प्रतिशत कमीशन भी जारी रहेगी। जिस कारण मंडियों का सिस्टम पूरी तरह से पहले की तरह से लागू रहेगा। इस फैसले से सब्जियां सस्ती होने की उम्मीद तो कम है, लेकिन अकेले कैथल जिले में मार्केटिंग बोर्ड को हर महीने इससे 10 लाख रुपये का नुकसान होगा।
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एक-एक प्रतिशत ली जा रही थी फीस एवं कर
सब्जी मंडियों में पहले 100 रुपये की सब्जी की बिक्री पर पांच रुपये आढ़ती का कमीशन, एक रुपये मार्केट कमेटी फीस और एक रुपये एचआरडीएफ के रूप में अतिरिक्त रूप से लिया जा रहा था। जिससे कैथल शहर में स्थित सब्जी मंडियों से प्रत्येक माह करीब छह लाख रुपये की आय हो रही थी।
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इसके अलावा सीवन, गुहला-चीका, पूंडरी और अन्य सब्जी मंडियां हैं, जहां से कम से कम 4 लाख की आय होती है। लेकिन अब फीस एवं कर को समाप्त करने से मार्केटिंग बोर्ड को मंडियों से कोई आय नहीं होगी।
टैक्स जीरो प्रतिशत, आढ़तियों को मिलेगी कमीशन
बोर्ड ने सरकार की घोषणा के अनुसार मार्केटिंग फीस एवं एचआरडीएफ कर को जीरो प्रतिशत कर दिया है। लेकिन आढ़तियों की पांच प्रतिशत की आढ़त जारी रहेगी। इस तरह से 100 रुपये की सब्जी सरकार के प्रयासों के अनुसार दो रुपये सस्ती होनी चाहिए। लेकिन मंडी में इसका असर कम ही देखने को मिल रहा है।
सरकार द्वारा फीस को समाप्त किए जाने के चलते कयास लगाए जा रहे थे कि मंडियां बोर्ड के नियंत्रण से मुक्त हो जाएंगी। लेकिन फीस के प्रावधान को समाप्त करने के बजाये इसे 0 प्रतिशत कर दिया गया है। अगर सरकार फीस के प्रावधान को समाप्त कर देती तो मंडियां मार्केटिंग बोर्ड से अलग होती और इसके बाद कोई भी व्यक्ति कहीं भी सब्जी बेच एवं खरीद कर सकता था। लेकिन यह प्रावधान समाप्त नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि आढ़ती एसोसिएशन ने मंडियों को पूरी तरह से मुक्त करने के फैसले का विरोध किया था। यदि मंडियां पूरी तरह से मुक्त हो जातीं हैं तो आढ़तियों के लिए भी रोजी-रोटी का संकट पैदा हो सकता था।
इस तरह से भविष्य में फीस दोबारा लागू करने की संभावनाएं भी कर ली गई हैं। लेकिन फिल्हाल सरकार ने फीस एवं कर समाप्त कर सब्जियों की कीमतों से अपना हाथ पूरी तरह से पीछे खींच लिया है।
बोर्ड के नियंत्रण में रहेंगी मंडियां
मार्केट कमेटी सचिव रविंद्र सैनी ने बताया कि मार्केट फीस एवं एचआरडीएफ को 0 प्रतिशत कर दिया गया है। लेकिन मंडियां पूरी तरह से मार्केटिंग बोर्ड के नियंत्रण में रहेंगी। साथ ही आढ़तियों का पांच प्रतिशत कमीशन भी जारी रहेगा।
उधर, सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन प्रधान मुकंद कालड़ा का कहना है कि यह फैसला हो चुका है। एसोसिएशन ने पहले ही कहा था कि इससे कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। सब्जियों की कीमतों पर मौसम एवं आपूर्ति का ही ज्यादा असर रहता है।