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मानसून की फुहारों ने किया निहाल
ब्यूरो कैथल
Updated Sun, 03 Jul 2016 12:26 AM IST
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40 एमएम से ज्यादा हुई जिले में बरसात
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मानसून की पहली बरसात ने लोगों को निहाल कर दिया। जिले भर में औसतन 40 एमएम बरसात दर्ज की गई। वहीं कलायत व जींद रोड पर स्थित करीब दर्जन भर गांवों में तो 60 एमएम से भी ज्यादा बरसात हुई। मानसून ने जहां पिछले करीब एक पखवाड़े से बने उमस भरे तापमान से राहत दिलवाई, वहीं किसानों के लिए यह बरसात एक तरह से संजीवनी लेकर आई है। बरसात के कारण अब तक 40 प्रतिशत हो चुकी धान की रोपाई भी रफ्तार पकड़ेगी। किसानों को इस बरसात से बड़ा लाभ होगा।
पिछले एक पखवाड़े से जिले भर में उमस के चलते लोगों का जीना दूभर हो गया था। 38 से लेकर 40 डिग्री सेल्सियस तापमान व 55 प्रतिशत उमस से ज्यादा के मौसम में लोग दिन भर पसीना-पसीना हो रहे थे। बेसब्री से हो रहे मानसून के इंतजार के बीच शनिवार रात्रि करीब दस बजे बूंदाबांदी शुरू हुई तो शनिवार बाद दोपहर तक जारी रही। रात को कई बार तेज बरसात हुई। वहीं दिन भर रुक-रुक कर पानी बरसता रहा। शहर में कई सड़कों के किनारे पानी खड़ा हो गया।
आस-पास के एरिया में ज्यादा मेहरबान रहा मानसून
जिला मुख्यालय कैथल शहर में बरसात सामान्य रही। यहां करीब 10 से 15 एमएम बरसात दर्ज की गई। लेकिन कलायत व जींद मार्ग पर स्थित करीब दर्जन भर गांवों में 60 एमएम से ज्यादा बरसात दर्ज की गई। वहीं औसतन जिले भर में करीब 40 एमएम बरसात हुई है। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय कौल में बाद दोपहर तक करीब 12 एमएम बरसात दर्ज की गई।
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पार्कों में उमड़ी भीड़
दिन भर बरसात के बाद शाम के समय बरसात रुक जाने से मौसम काफी खुशगवार हो गया। गर्मी से त्रस्त लोग शायद इसी मौसम का इंतजार कर रहे थे। यही कारण रहा कि हनुमान वाटिका, सेक्टर 19 व 20 के पार्क, चिल्ड्रन पार्क, मॉडल टाउन के लाला लाजपत राय पार्क सहित अन्य पार्कों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों ने भी मौसम का खूब लुत्फ उठाया।
किसानों को बड़ा लाभ
मौसम में आए इस बदलाव का किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। धान की रोपाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता पड़ती है। बरसात से जहां खेतों में पानी एकत्रित होने में सहायता मिलती है। वहीं जहां कम बरसात होती है, वहां खेतों में पानी की जरूरत सामान्य तापमान की बजाए कम हो जाती है। जिससे किसानों का खर्च बच जाता है।
धान रोपाई पकड़ेगी रफ्तार
जिले में अभी तक करीब 40 प्रतिशत इलाके में धान की रोपाई हो चुकी है। 15 जून से शुरू हुई धान की रोपाई जुलाई के अंत तक होती है। अब मानसून के आगमन के बाद धान की रोपाई जोर पकड़ेगी। जिले में 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई होनी है। जिसके लिए किसानों ने पनीरी पहले ही तैयार की हुई है। भारतीय किसान यूनियन के नेता जिया लाल ने कहा कि बरसात होने से किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस समय बिजली के सहारे किसानों को अपने खेत तैयार करने पड़ते हैं। जैसा की पूर्वानुमान लगाया जा रहा है कि 3 जुलाई को अच्छी बरसात होगी, यदि यह अनुमान सही निकला तो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
सब्जियों को भी फायदा
गर्मी के कारण पिछले लंबे समय से सब्जियों की फसलों में भी नुकसान होने लगा था। मानसून की पहली बरसात से इन फसलों में भी लाभ मिलेगा। हालांकि यदि ज्यादा बरसात होती है तो सब्जियों की फसलों में नुकसान भी हो सकता है। लेकिन फिलहाल नुकसान जैसी स्थिति नहीं है।
सीजन में होगी अच्छी बरसात
कृषि विश्वविद्यालय कौल में मौसम वैज्ञानिक डा. चंद्रशेखर डागर ने कहा कि यह मानसून की दस्तक है। शुक्रवार रात्रि व शनिवार को जिले भर में बरसात हुई है। आने वाले दिनों में ओर ज्यादा बरसात होगी। कैथल के अलावा कलायत, पूंडरी गुहला-चीका सहित पाई में भी कई इलाकों में अच्छी बरसात हुई।
राजौंद में लबालब हो गया शहर, जलभराव से परेशान हुए लोग
राजौंद। शनिवार को मानसून की पहली बरसात के साथ ही किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं पानी निकासी न होने के कारण बरसात का पानी कई घरों, स्कूलों व दुकानों में भर गया। जिससे लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। पिछले कई दिनों उमस व गर्मी से परेशान जनता को शनिवार सुबह हुई जोरदार बरसात से राहत महसूस हुई। वहीं इस बरसात से फसलों को भी काफी फायदा हुआ है। दिन भर हुई हल्की बूंदाबांदी से किसानों की धान की फसल रोपने का कार्य तेज हो गया। सुबह जोरदार बरसात व दोपहर बाद रुक रुक बरसात ने मौसम खुशगवार बना दिया। इस बरसात से हर कोई गर्मी से राहत पाकर सुकून महसूस कर रहा था। इतना ही नहीं गर्मी के चलते कपास, हरा चारा व धान की फसल भी मुरझाने लग गई थी। मौसम बदलाव का असर जीव जंतु, मानव के साथ साथ फसलों पर भी दिखाई दिया। किसानों ने बताया कि यह बरसात भी उनकी फसलों के लिए वरदान साबित होगी।
स्कूल में घुसा दो-दो फुट पानी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में असंध मार्ग पर पानी निकासी न होने के कारण कालोनी का सारा पानी स्कूल में भरना हो गया। जिससे अध्यापकों व छात्रों ने बाध लगाकर बड़ी मुश्किल से पानी को रोका। उधर अध्यापक व प्रधानाचार्य ने बताया कि गंदे नाले का पानी स्कूल की तरफ मोड़ दिया जाता है जो स्कूल के मुख्य द्वार से होता हुआ स्कूल में भर जाता है। जिसकी शिकायत नगरपालिका प्रशासन को पहले भी कई बार लिखित रूप में की जा चुकी है। उधर मेन बाजार, दुर्गा मंदिर कालोनी, पुराना थाना मोहल्ला में पानी निकासी न होने के कारण कई दुकानों व घरों में पानी घुस गया। लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद घरों व दुकानों से पानी निकाला।
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पिछले एक पखवाड़े से जिले भर में उमस के चलते लोगों का जीना दूभर हो गया था। 38 से लेकर 40 डिग्री सेल्सियस तापमान व 55 प्रतिशत उमस से ज्यादा के मौसम में लोग दिन भर पसीना-पसीना हो रहे थे। बेसब्री से हो रहे मानसून के इंतजार के बीच शनिवार रात्रि करीब दस बजे बूंदाबांदी शुरू हुई तो शनिवार बाद दोपहर तक जारी रही। रात को कई बार तेज बरसात हुई। वहीं दिन भर रुक-रुक कर पानी बरसता रहा। शहर में कई सड़कों के किनारे पानी खड़ा हो गया।
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आस-पास के एरिया में ज्यादा मेहरबान रहा मानसून
जिला मुख्यालय कैथल शहर में बरसात सामान्य रही। यहां करीब 10 से 15 एमएम बरसात दर्ज की गई। लेकिन कलायत व जींद मार्ग पर स्थित करीब दर्जन भर गांवों में 60 एमएम से ज्यादा बरसात दर्ज की गई। वहीं औसतन जिले भर में करीब 40 एमएम बरसात हुई है। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय कौल में बाद दोपहर तक करीब 12 एमएम बरसात दर्ज की गई।
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पार्कों में उमड़ी भीड़
दिन भर बरसात के बाद शाम के समय बरसात रुक जाने से मौसम काफी खुशगवार हो गया। गर्मी से त्रस्त लोग शायद इसी मौसम का इंतजार कर रहे थे। यही कारण रहा कि हनुमान वाटिका, सेक्टर 19 व 20 के पार्क, चिल्ड्रन पार्क, मॉडल टाउन के लाला लाजपत राय पार्क सहित अन्य पार्कों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों ने भी मौसम का खूब लुत्फ उठाया।
किसानों को बड़ा लाभ
मौसम में आए इस बदलाव का किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। धान की रोपाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता पड़ती है। बरसात से जहां खेतों में पानी एकत्रित होने में सहायता मिलती है। वहीं जहां कम बरसात होती है, वहां खेतों में पानी की जरूरत सामान्य तापमान की बजाए कम हो जाती है। जिससे किसानों का खर्च बच जाता है।
धान रोपाई पकड़ेगी रफ्तार
जिले में अभी तक करीब 40 प्रतिशत इलाके में धान की रोपाई हो चुकी है। 15 जून से शुरू हुई धान की रोपाई जुलाई के अंत तक होती है। अब मानसून के आगमन के बाद धान की रोपाई जोर पकड़ेगी। जिले में 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई होनी है। जिसके लिए किसानों ने पनीरी पहले ही तैयार की हुई है। भारतीय किसान यूनियन के नेता जिया लाल ने कहा कि बरसात होने से किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस समय बिजली के सहारे किसानों को अपने खेत तैयार करने पड़ते हैं। जैसा की पूर्वानुमान लगाया जा रहा है कि 3 जुलाई को अच्छी बरसात होगी, यदि यह अनुमान सही निकला तो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
सब्जियों को भी फायदा
गर्मी के कारण पिछले लंबे समय से सब्जियों की फसलों में भी नुकसान होने लगा था। मानसून की पहली बरसात से इन फसलों में भी लाभ मिलेगा। हालांकि यदि ज्यादा बरसात होती है तो सब्जियों की फसलों में नुकसान भी हो सकता है। लेकिन फिलहाल नुकसान जैसी स्थिति नहीं है।
सीजन में होगी अच्छी बरसात
कृषि विश्वविद्यालय कौल में मौसम वैज्ञानिक डा. चंद्रशेखर डागर ने कहा कि यह मानसून की दस्तक है। शुक्रवार रात्रि व शनिवार को जिले भर में बरसात हुई है। आने वाले दिनों में ओर ज्यादा बरसात होगी। कैथल के अलावा कलायत, पूंडरी गुहला-चीका सहित पाई में भी कई इलाकों में अच्छी बरसात हुई।
राजौंद में लबालब हो गया शहर, जलभराव से परेशान हुए लोग
राजौंद। शनिवार को मानसून की पहली बरसात के साथ ही किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं पानी निकासी न होने के कारण बरसात का पानी कई घरों, स्कूलों व दुकानों में भर गया। जिससे लोगों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। पिछले कई दिनों उमस व गर्मी से परेशान जनता को शनिवार सुबह हुई जोरदार बरसात से राहत महसूस हुई। वहीं इस बरसात से फसलों को भी काफी फायदा हुआ है। दिन भर हुई हल्की बूंदाबांदी से किसानों की धान की फसल रोपने का कार्य तेज हो गया। सुबह जोरदार बरसात व दोपहर बाद रुक रुक बरसात ने मौसम खुशगवार बना दिया। इस बरसात से हर कोई गर्मी से राहत पाकर सुकून महसूस कर रहा था। इतना ही नहीं गर्मी के चलते कपास, हरा चारा व धान की फसल भी मुरझाने लग गई थी। मौसम बदलाव का असर जीव जंतु, मानव के साथ साथ फसलों पर भी दिखाई दिया। किसानों ने बताया कि यह बरसात भी उनकी फसलों के लिए वरदान साबित होगी।
स्कूल में घुसा दो-दो फुट पानी
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में असंध मार्ग पर पानी निकासी न होने के कारण कालोनी का सारा पानी स्कूल में भरना हो गया। जिससे अध्यापकों व छात्रों ने बाध लगाकर बड़ी मुश्किल से पानी को रोका। उधर अध्यापक व प्रधानाचार्य ने बताया कि गंदे नाले का पानी स्कूल की तरफ मोड़ दिया जाता है जो स्कूल के मुख्य द्वार से होता हुआ स्कूल में भर जाता है। जिसकी शिकायत नगरपालिका प्रशासन को पहले भी कई बार लिखित रूप में की जा चुकी है। उधर मेन बाजार, दुर्गा मंदिर कालोनी, पुराना थाना मोहल्ला में पानी निकासी न होने के कारण कई दुकानों व घरों में पानी घुस गया। लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद घरों व दुकानों से पानी निकाला।