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फसल अवशेषों का प्रबंधन समय की मांग : डॉ. अमित

Fri, 12 Sep 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 12 Sep 2025 01:41 AM IST
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Management of crop residues is the need of the hour: Dr. Amit
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शेरगढ़ गांव स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में वीरवार को फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें करीब 150 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र कैथल के वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार ने कहा कि फसल अवशेष किसान के लिए बोझ नहीं बल्कि विशेष महत्व रखते हैं और उनका प्रबंधन समय की मांग है। सरकार किसानों को अनुदान पर सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, जीरो टिलेज मशीन, मल्चर, चॉपर और रोटावेटर उपलब्ध करा रही है, जिनसे अवशेषों का यथास्थान प्रबंधन संभव है।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि धान की पराली जलाने से वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे आंखों में जलन, सांस की समस्या और हृदय रोग जैसी दिक्कतें बढ़ती हैं। साथ ही मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे पैदावार पर विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अवशेष प्रबंधन में सहयोग देकर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं। वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि पराली का यथास्थान प्रबंधन भूमि की जैविक कार्बन बढ़ाने में सहायक है, जो मिट्टी की उर्वरता का मुख्य कारक है। वहीं, डॉ. प्रशांत कौशिक ने कीटनाशक-मुक्त सब्जियों के उत्पादन और स्वच्छ खानपान की जानकारी दी।
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