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Kaithal News: मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का 23 वर्षों के बाद संयोग

Wed, 14 Jan 2026 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 14 Jan 2026 01:54 AM IST
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Makar Sankranti and Shattila Ekadashi coincide after 23 years
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत/गुहला चीका। इस वर्ष 14 जनवरी को 23 वर्षों के बाद मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और सौभाग्य योग भी एक साथ बन रहे हैं। मार्तंड पंचांग के अनुसार बुधवार को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे।

ज्योतिषाचार्य नंदकिशोर शास्त्री चोटी वाले ने बताया कि इस वर्ष सूर्य नारायण 14 जनवरी को दोपहर 3:06 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि, संक्रांति का पुण्यकाल प्रातः सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा। मकर संक्रांति पर गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। प्रयागराज में संगम स्नान को अत्यंत फलदायी माना गया है। इस दिन कंबल, तिल, मूंगफली, लकड़ी और घी का दान करने से ग्रहों की अनुकूलता बढ़ती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सूर्य मंत्र का जप आत्मविश्वास, ऊर्जा, स्वास्थ्य, सफलता बढ़ाता है।
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एकादशी तिथि पर अन्न और चावल का सेवन व दान करना वर्जित माना गया है। ऐसे में मकर संक्रांति पर चावल व अन्न को छोडक़र तिल, गुड़, साबूदाना, मूंगफली आदि चीजों का दान कर सकते हैं। -पंडित अनिरुद्ध गौतम
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एकादशी और संक्रांति का विशेष नियम

सर्वार्थ सिद्धि ज्योतिष एवं कर्मकांड विशेषज्ञ पं. विद्यासागर ने बताया कि इस बार षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति एक ही दिन पड़ने के कारण विशेष सावधानी आवश्यक है। एकादशी के दिन चावल का सेवन, निर्माण और दान वर्जित माना गया है। इसलिए इस बार संक्रांति पर खिचड़ी या चावल का दान न करें। इसके स्थान पर तिल, तिल-गुड़ से बने पदार्थ, कंबल, घी और मूंगफली का दान अत्यंत शुभ रहेगा।

सूर्य उपासना का विशेष महत्व

राधेश्याम ज्योतिष केंद्र के ज्योतिष, वास्तु विशेषज्ञ एवं कथा प्रवक्ता आचार्य सुनील निकुंज भारद्वाज ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य नारायण की पूजा करना अनिवार्य है। सूर्य को अर्घ्य दें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और सूर्य नमस्कार करें। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिससे शुभता, ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है। इस दौरान बन रहे योगों में किए गए जप, तप, दान और स्नान का पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है।

इस बार मकर संक्रांति पर सितारों का त्रिएकादश योग बन रहा है। इसे लाभ का योग माना जाता है। जो जीवन में नए अवसर, करियर में सफलता और आर्थिक सुधार ला सकता है।


-ज्योतिषाचार्य डा.सुमित कौशिक

उत्तरायण में किया गया जप, तप, दान और स्नान अक्षय फल देता है। मकर संक्रांति का महा पुण्यकाल दोपहर 3:13 से सायं 5: 45 तक रहेगा। इसी वजह से अबकी 15 को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। -पंडित विशाल शांडिल्य
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