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कैथल की ललिता ने मंगोलिया में रेसलिंग में जीता कांस्य
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Mon, 09 Jun 2014 11:54 PM IST
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कैथल। मंगोलिया में 5 से 8 जून तक हुई एशियन चैंपियनशिप में आरकेएसडी बीए अंतिम वर्ष की छात्रा ललिता सहरावत ने अपने भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। मूल रूप से हिसार की रहने ललिता का सपना अब कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग लेकर देश का नाम रोशन करने का है।
जिसकी तैयारियों में वह जी-जान से जुटी है। ललिता ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि गत 5 से 8 जून तक मंगोलिया में जूनियन एशियन चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। जिसमें भारत से 8 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें 7 खिलाड़ी हरियाणा से तथा एक खिलाड़ी महाराष्ट्र से थी। इस मुकाबले में उसने अपने 55 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। उसके अलावा 48 केजी में ऋतु फोगाट ने कांस्य पदक, 51 किलो में विनेश फोगाट ने गोल्ड मेडल, 59 में पूजा ढांडा ने कांस्य पदक, 72 किलो भार वर्ग में पूजा ने कांस्य पदक हासिल किया। कोच अंजना शर्मा के नेतृत्व में टीम मंगोलिया गई थी।
अब गोल्ड मेडल लाना है
अपनी जीत के लिए पिता जोगेंद्र सिंह एवं डीपीआई सुरेंद्र सिंह को श्रेय देते हुए ललिता ने कहा कि उसके माता-पिता और कोच ने काफी प्रोत्साहित किया है। अब वह कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में जुट गई हैं। जिसके लिए 20 जून तक दिल्ली में ट्रॉयल है। उसका प्रयास कॉमनवेल्थ के लिए चयनित होकर गोल्ड मेडल हासिल करना है। इससे पूर्व वह यूथ ओलंपिक में खेल चुकी है। साथ ही एशिया चैंपियनशिप में रजत पदक, वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी हासिल कर चुकी है।
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इसके साथ-साथ वह ओलंपिक में भाग लेकर देश का नाम रोशन करना चाहती है।ललिता के पदक जीतने पर परिवार में जशभन का माहौल है। उसके पिता जोगेंद्र सिंह ने कहा कि वे स्वयं भी रेसलिंग के खिलाड़ी रहे हैं। लेकिन खेल में ही घायल होने के बाद वे आगे नहीं खेल पाए। अब उनकी बेटी इस खेल में नाम कमा रही है। उन्हें खुशी है कि उसने कांस्य पदक हासिल किया है। उनकी बेटी कॉमनवेल्थ गेम्स में भी अच्छा प्रदर्शन करेगी।
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जिसकी तैयारियों में वह जी-जान से जुटी है। ललिता ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि गत 5 से 8 जून तक मंगोलिया में जूनियन एशियन चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। जिसमें भारत से 8 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें 7 खिलाड़ी हरियाणा से तथा एक खिलाड़ी महाराष्ट्र से थी। इस मुकाबले में उसने अपने 55 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया। उसके अलावा 48 केजी में ऋतु फोगाट ने कांस्य पदक, 51 किलो में विनेश फोगाट ने गोल्ड मेडल, 59 में पूजा ढांडा ने कांस्य पदक, 72 किलो भार वर्ग में पूजा ने कांस्य पदक हासिल किया। कोच अंजना शर्मा के नेतृत्व में टीम मंगोलिया गई थी।
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अब गोल्ड मेडल लाना है
अपनी जीत के लिए पिता जोगेंद्र सिंह एवं डीपीआई सुरेंद्र सिंह को श्रेय देते हुए ललिता ने कहा कि उसके माता-पिता और कोच ने काफी प्रोत्साहित किया है। अब वह कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में जुट गई हैं। जिसके लिए 20 जून तक दिल्ली में ट्रॉयल है। उसका प्रयास कॉमनवेल्थ के लिए चयनित होकर गोल्ड मेडल हासिल करना है। इससे पूर्व वह यूथ ओलंपिक में खेल चुकी है। साथ ही एशिया चैंपियनशिप में रजत पदक, वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी हासिल कर चुकी है।
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इसके साथ-साथ वह ओलंपिक में भाग लेकर देश का नाम रोशन करना चाहती है।ललिता के पदक जीतने पर परिवार में जशभन का माहौल है। उसके पिता जोगेंद्र सिंह ने कहा कि वे स्वयं भी रेसलिंग के खिलाड़ी रहे हैं। लेकिन खेल में ही घायल होने के बाद वे आगे नहीं खेल पाए। अब उनकी बेटी इस खेल में नाम कमा रही है। उन्हें खुशी है कि उसने कांस्य पदक हासिल किया है। उनकी बेटी कॉमनवेल्थ गेम्स में भी अच्छा प्रदर्शन करेगी।