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Kaithal News: बैंकों में पर्याप्त कैश न होने से लोगों को परेशानी, खाते में पैसे हैं लेकिन निकाल नहीं सकते
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जसपाल उर्फ पाली
- फोटो : शिविर में पिरामिड बनाते विद्यार्थी।
गुहला चीका (कैथल)। गेहूं की फसल के भुगतान के लिए किसानों के खातों में करोड़ों रुपये जमा हो चुके हैं लेकिन बैंक शाखाओं में नकदी की कमी के कारण किसानों और आम जनता को पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। निजी और सरकारी बैंकों में सीमित नकदी मिलने से खाता धारक निराश होकर लौट रहे हैं।
एक लाख रुपये की मांग पर केवल 10 से 20 हजार रुपये ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि नकदी आरबीआई से पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रही है। पिछले एक महीने से यह स्थिति बनी हुई है और छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर अधिक महसूस किया जा रहा है। नकदी की कमी के कारण किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के रोजमर्रा के लेनदेन और व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आ रही है। कलायत में फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
किसानों ने कहा- नकदी की आवश्यकता
- किसान जसपाल उर्फ पाली टटियाना ने बताया कि उन्हें खेती से जुड़े खर्च जैसे मजदूरी, खाद-बीज और ट्रांसपोर्ट के लिए नकदी की आवश्यकता है लेकिन बैंक केवल सीमित राशि ही दे पा रहे हैं।
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- किसान अवतार सीड़ा ने कहा कि चीका के एक्सिस बैंक में अपने खाते से एक लाख की राशि निकलवाने के लिए गए थे परंतु बैंक कर्मचारियों की ओर से उन्हें मात्र 10 से 20 हजार की राशि दिए जाने की बात कही गई।
चीका एसबीआई बैंक के प्रबंधक सुनील कुमार ने कहा कि कैश की कमी बनी हुई है। उच्च अधिकारियों को लगातार स्थिति से अवगत कराया जा रहा है लेकिन पर्याप्त नकदी अभी उपलब्ध नहीं हो पाई है। छोटे राशियों के लेनदेन में किसी भी उपभोक्ता को परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
उपभोक्ता खाली लौट रहे
ढांड। राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश उपलब्ध होने पर ही दिया जा रहा है। अगर बैंक में कैश आ जाता है तो 100000 रुपये तक दिया जाता है। अगर बैंक में कैश की कमी है तो उपलब्धता के आधार पर पेंशन भोगियों, वृद्ध विकलांगों और विधवाओं को दो से तीन हजार तक कैश दिया जाता है। कैश की कमी के कारण ढांड में एसबीआई, पीएनबी और एचडीएफसी के एटीएम से उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
राजौंद। राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश उपलब्ध होने पर ही दिया जा रहा है। अगर बैंक में कैश आ जाता है तो 50,000 तक दिया जाता है अगर बैंक में कैश की कमी है तो उपलब्धता के आधार पर पेंशन भोगियों, वृद्ध विकलांगों और विधवाओं को 3200 तक कैश दिया जाता है। कैश की कमी के कारण राजौंद में पीएनबी और एचडीएफसी के एटीएम से उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी
पूंडरी। बैंकों में इन दिनों नकदी की कमी के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक खाताधारकों का आरोप है कि उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार नकदी नहीं मिल पा रही है जिससे दैनिक कार्यों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बैंक शाखाओं में सीमित मात्रा में ही नकदी उपलब्ध करवाई जा रही है। कई लोगों को केवल आवश्यक खर्चों के लिए ही राशि दी जा रही है, जबकि अधिक नकदी की मांग करने वाले ग्राहकों को निराश लौटना पड़ रहा है। इससे विशेष रूप से व्यापारियों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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एक लाख रुपये की मांग पर केवल 10 से 20 हजार रुपये ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि नकदी आरबीआई से पर्याप्त मात्रा में नहीं आ रही है। पिछले एक महीने से यह स्थिति बनी हुई है और छोटे शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर अधिक महसूस किया जा रहा है। नकदी की कमी के कारण किसानों, व्यापारियों और आम लोगों के रोजमर्रा के लेनदेन और व्यापारिक गतिविधियों में बाधा आ रही है। कलायत में फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
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किसानों ने कहा- नकदी की आवश्यकता
- किसान जसपाल उर्फ पाली टटियाना ने बताया कि उन्हें खेती से जुड़े खर्च जैसे मजदूरी, खाद-बीज और ट्रांसपोर्ट के लिए नकदी की आवश्यकता है लेकिन बैंक केवल सीमित राशि ही दे पा रहे हैं।
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- किसान अवतार सीड़ा ने कहा कि चीका के एक्सिस बैंक में अपने खाते से एक लाख की राशि निकलवाने के लिए गए थे परंतु बैंक कर्मचारियों की ओर से उन्हें मात्र 10 से 20 हजार की राशि दिए जाने की बात कही गई।
चीका एसबीआई बैंक के प्रबंधक सुनील कुमार ने कहा कि कैश की कमी बनी हुई है। उच्च अधिकारियों को लगातार स्थिति से अवगत कराया जा रहा है लेकिन पर्याप्त नकदी अभी उपलब्ध नहीं हो पाई है। छोटे राशियों के लेनदेन में किसी भी उपभोक्ता को परेशानी नहीं होने दी जा रही है।
उपभोक्ता खाली लौट रहे
ढांड। राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश उपलब्ध होने पर ही दिया जा रहा है। अगर बैंक में कैश आ जाता है तो 100000 रुपये तक दिया जाता है। अगर बैंक में कैश की कमी है तो उपलब्धता के आधार पर पेंशन भोगियों, वृद्ध विकलांगों और विधवाओं को दो से तीन हजार तक कैश दिया जाता है। कैश की कमी के कारण ढांड में एसबीआई, पीएनबी और एचडीएफसी के एटीएम से उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
राजौंद। राष्ट्रीयकृत बैंकों में कैश उपलब्ध होने पर ही दिया जा रहा है। अगर बैंक में कैश आ जाता है तो 50,000 तक दिया जाता है अगर बैंक में कैश की कमी है तो उपलब्धता के आधार पर पेंशन भोगियों, वृद्ध विकलांगों और विधवाओं को 3200 तक कैश दिया जाता है। कैश की कमी के कारण राजौंद में पीएनबी और एचडीएफसी के एटीएम से उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी
पूंडरी। बैंकों में इन दिनों नकदी की कमी के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक खाताधारकों का आरोप है कि उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार नकदी नहीं मिल पा रही है जिससे दैनिक कार्यों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बैंक शाखाओं में सीमित मात्रा में ही नकदी उपलब्ध करवाई जा रही है। कई लोगों को केवल आवश्यक खर्चों के लिए ही राशि दी जा रही है, जबकि अधिक नकदी की मांग करने वाले ग्राहकों को निराश लौटना पड़ रहा है। इससे विशेष रूप से व्यापारियों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

जसपाल उर्फ पाली- फोटो : शिविर में पिरामिड बनाते विद्यार्थी।

जसपाल उर्फ पाली- फोटो : शिविर में पिरामिड बनाते विद्यार्थी।

जसपाल उर्फ पाली- फोटो : शिविर में पिरामिड बनाते विद्यार्थी।