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Kaithal News: केडीबी की बेरुखी नहीं झेल पा रहा कपिल सरोवर

Mon, 26 Aug 2024 03:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 26 Aug 2024 03:28 PM IST
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Kapil Sarovar is unable to bear the indifference of KDB
कलायत। कलायत के प्राचीन श्री कपिल मुनि तीर्थ को सदियों से अपने जीर्णोद्धार का इंतजार है। वर्ष 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीर्थ स्थलों के विकास की योजना बनाई थी। इसके तहत करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की सौगात कलायत को दी गई।
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समाज सेवी संगठनों का आरोप है कि सीएम के करीब नौ वर्ष के कार्यकाल में भी केडीबी अधिकारी विकास योजनाओंं को धरातल पर नहीं उतार पाए। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिरकार करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं पर काम न शुरू करवाने में बोर्ड के समक्ष क्या दिक्कत है?भगवान कपिल ने माता देवाहुति को सांख्य दर्शन का ज्ञान करवाया था। इसलिए उन्हें सांख्य दर्शन प्रवर्तक माना जाता है। विश्व पटल के इस प्रकार के महत्व के बाद भी कलायत के पौराणिक श्री कपिल मुनि सरोवर की स्थिति बद से बदतर है।
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न तो सरोवर में देश-दुनिया से स्नान करने को आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध हो पा रहा है और न ही गंदे पानी की निकासी की कोई व्यवस्था। हालात इस कदर खराब हैं कि घाट, परिक्रमा ट्रैक, सरोवर चारदीवारी और दूसरे निर्माण बुरी तरह से खंडित हैं। इसके चलते भारत के गौरवशाली अतीत की साक्षी इस धरोहर का अस्तित्व खतरे में है। श्री कपिल मुनि तीर्थ कमेटी प्रधान राजू कौशिक, नंबरदार संजय सिंगला, शिव कुमार निर्मल, रत्न लाल प्रजापति, ललित शर्मा और दूसरे सदस्यों का कहना है कि धरोहर के कायाकल्प के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये बजट मंजूर किया। अब तक विकास योजनाओं को बोर्ड धरातल पर नहीं उतार पाया है जबकि सरकार की नीति अनुसार तीर्थ कमेटी योजनाओं को लेकर गंभीर रही है।श्री कपिल मुनि मंदिर के पुजारी संजय गौतम और अनिरुद्ध गौतम ने बताया कि भगवान कपिल मुनि तीर्थ के ऐतिहासिक महत्व के कारण देश-दुनिया से पर्यटक कलायत का रुख करते हैं। सरोवर तट पर विभिन्न देवी-देवताओं के पुराने मंदिरोंं की लंबी श्रृंखला है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकास कार्यों की जरूरत है।
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प्राथमिक तौर पर विकास का था लक्ष्य : पठानिया
हरियाणा विमुक्त घुमंतू जाति विकास बोर्ड के वाइस चेयरमैन एवं केडीबी सदस्य जसवंत पठानिया ने बताया कि जिन विकास कार्योंं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाने की दरकार रही उनकी सूची तैयार करते हुए संबंधित विभाग को भेजी गई है। इस पर केडीबी, लोक निर्माण विभाग और पुरातत्व विभाग सहित अन्य विभागों को करोड़ों रुपये की विकास योजनाओंं को धरातल पर उतारने का कार्य पूरा करना था। वर्तमान स्थिति की पूरी रिपोर्ट सरकार को दी गई है। कहां किस स्तर पर क्या हुआ इसका ब्यौरा लिया गया है।
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