कैथल में अधिकारी जगदीश मलिक बोले: मिट्टी में पराली मिलाने से मिट्टी की संरचना को सुधारने में मिलती है मदद
मुख्य अतिथि फसल अवशेष प्रबंधन के जिला नोडल अधिकारी एवं सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने कहा कि खेतों में धान की कटाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में किसान धान की पराली को जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करें। सरकार की ओर से किसानों को मशीनें मुहैया करवाई जा रही हैं।
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कैथल के कुलतारण गांव में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से वीरवार को कृषि विभाग के अधिकारियों के सहयोग से किसान चौपाल कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में फसल अवशेष प्रबंधन के जिला नोडल अधिकारी एवं सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने शिरकत की। सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक रमेश समध्यान ने किसानों को पराली प्रबंधन को लेकर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसे मिट्टी में मिलाकर जमीन की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। मिट्टी में मिली पराली अगली फसलों के लिए वरदान साबित होगी और उत्पादन भी अधिक होगा। इसके अलावा किसान पराली का प्रबंधन कर लाभ भी कमा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के फायदे व जलाने से स्वास्थ्य व पर्यावरण पर पडऩे वाले विपरीत प्रभावों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में 50 से ज्यादा किसानों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि फसल अवशेष प्रबंधन के जिला नोडल अधिकारी एवं सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने कहा कि खेतों में धान की कटाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में किसान धान की पराली को जलाने के बजाय उसका प्रबंधन करें। सरकार की ओर से किसानों को मशीनें मुहैया करवाई जा रही हैं। इनसे पराली को खेत में आसानी से मिला सकते हैं।
पराली मिट्टी में मिलने के बाद कुछ समय में ही गल सड़ जाती है। इससे मिट्टी में जैविक तत्वों को बढ़ाने, पोषक तत्वों को बनाए रखने व मिट्टी की संरचना को सुधारने में मदद मिलती है। धान की कटाई के बाद ही अब गेहूं की बिजाई शुरू हो जाएगी। अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से किसान एक बार में ही धान की पराली का प्रबंधन व गेहूं की बिजाई कर साथ ही कर सकते हैं। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला फाउंडेशन का धन्यवाद किया। इस मौके पर कृषि विभाग में कार्यरत सुभाष चहल गुहणा व अजय कुमार मौजूद रहे।
पराली प्रबंधन कर ले सकते है किसान लाभ
कृषि विभाग में कार्यरत सुभाष चहल ने कहा कि किसान मशीनों के माध्यम से पराली के बंडल बनाकर इसे खेत से निकाल सकते हैं। पराली का पशु चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। किसान को बस एक बार पराली प्रबंधन को लेकर शुरुआत करने की जरूरत है। किसान पराली के बंडल बनाकर बिजली उत्पादन प्लांट, गत्ता फैक्टरी में बेच कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
खेतों में बीजों और कीटनाशकों की भी दी जानकारी
कृषि विभाग में कार्यरत अजय कुमार ने बताया कि धान की कटाई होने को है, इसके बावजूद कई किसान अंधाधुंध कीटनाशकों का छिडक़ाव खेत में कर रहे हैं। इससे खर्चा अधिक होने के साथ ही स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। किसान खेतों में जैविक खाद का अधिक इस्तेमाल करें।
चार वर्षों से कर रहे पराली प्रबंधन
किसान ईश्वर ने कहा कि वह पिछले चार वर्षों से लगातार पराली का प्रबंधन कर रहे है। फसल अवशेष मिट्टी में मिलाने से हर वर्ष उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। वहीं प्रबंधन करने पर सरकार की ओर से भी एक हजार रुपये प्रति एकड़ मिलता है।
वातावरण रहा है साफ सुथरा
किसान छितर ने कहा कि पराली प्रबंधन करने से किसानों को बहुत लाभ है। फसल का उत्पादन अच्छा होता है और वातावरण साफ सुथरा रहता है। पराली को मशीनों से प्रबंधन करने पर खेत समय पर खाली हो जाते है, इसके बाद समय पर गेहूं की बिजाई कर सकते हैं।
किसान कर रहे पराली प्रबंधन
पूर्व सरपंच चरण सिंह ने बताया कि गांव के किसान पराली प्रबंधन को लेकर जागरूक हैं। कोई भी किसान पराली में आग नहीं लगाता। बल्कि उसका मशीनों के साथ बंडल बनवाकर सरकार की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन लें रहे हैं और वातावरण को साफ सुथरा बनाने में सहयोग कर रहे हैं।
आज के समय में किसान हैं जागरूक
किसान राजेंद्र कुमार ने कहा कि आज के समय में किसान जागरूक हो चुका है। कोई एकाध किसान ही पराली में आग लगाता है, अन्यथा सभी किसान पराली का प्रबंधन करते हैं। उन्होंने किसानों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला के कार्यक्रम की सराहना की।