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जहरीले रसायन युक्त दूध के पीने से कैंसर का खतरा
kaithal beuro
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:34 AM IST
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dhh
- फोटो : amar ujala
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हरियाणा के गांवों के जोहड़ों के पानी में फसलों में डाले जाने वाले जहरीले कीटनाशक व खरपतवार नाशक मिले हैं। जिसका असर दूध पर हो रहा है। यह खुलासा लाला लाजपत राय पशु विश्वविद्यालय हिसार के वैज्ञानिकों की रिसर्च में हुआ है। जहरीले रसायन युक्त दूध के पीने का संबंध कैंसर हो सकता है। विश्वविद्यालय अब उन गांवों से कैंसर के मरीजों की संख्या जुटा रहा है, जिन गांवों से ये सेम्पल लिए गए हैं। 10 जिलों में लिए गए सेम्पलों में कैथल के जोहड़ों में सबसे ज्यादा जहरीले रसायन पाए गए हैं।
लाला लाजपतराय युनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनीमल साईंसिज हिसार (लुआस) के रिजनल सेंटर के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के 10 जिलों कैथल, हिसार, रोहतक, जींद, महेद्रगढ़, अंबाला, सिरसा, कुरुक्षेत्र, करनाल, भिवानी के 160 जोहड़ों से पानी का सेंपल लिया। जिसमें रसायनिक जांच की गई तो वैज्ञानिक भी हैरान रह गए। वैज्ञानिकों को पाया कि इन जोहड़ों के पानी में ट्राइजोफॉस, मोनोक्रॉटोफॉस, एडीपैनफोस, क्लोरपाइरीफोस, मैलाथियोन, पीरीमीफॉस मिथाईल, फैनीट्रोथायॉन, डाईकलोरोवॉस, क्विनलफॉस जैसे कीटनाशक व पेस्टीसाईड मिले हैं। जिन्हें पशु पानी के साथ पी रहे हैं। कई गांवों के पशुओं के दूध के सेम्पल लेकर जांच की गई तो दूध में भी कई रसायनिक तत्व पाए गए। दूध को लेकर अभी व्यापक स्तर पर रिसर्च चल रहा है।
रसायन युक्त दूध के का संबंध कैंसर से हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अब संबंधित गांवों से कैंसर के मरीजों की संख्या जुटानी शुरू कर दी है। इसके बाद पता चल सकेगा कहीं रसायन युक्त दूध ही कैंसर का तो कारण नहीं। एक गांव से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पिछले साल उस गांव में तीन गुणा कैंसर के अधिक मरीज मिले हैं। जो काफी चिंता का विषय है।
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विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंड हेड वेटरनरी पब्लिक हेल्थ डा. एनके महाजन ने बताया कि कीटनाशक की मात्रा वाले दूध से कैंसर पर अभी रिसर्च चल रहा है। तालाबों में मिले पानी में कीटनाशक मिले हैं। जो बड़ी चिंता का विषय है। कई गांवों में जब दूध की जांच की गई तो उसमें भी रसायनिक तत्व पाए गए हैं। जिनकी मात्रा काफी ज्यादा है। आजकल ज्यादातर लोग केवल नहलाने के लिए पशुओं को तालाब में ले जाते हैं। लेकिन वहां पशु उस पानी को पीते भी हैं। तो शरीर में पानी के जहरीले तत्व चले जाते हैं। इसका कारण गांव में फसलों के अवशेष सहित खेतों का पानी भी तालाबों में चला जाता है। ये रसायन दूध में जाकर बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करते हैं। जीन पर असर होने पर कैंसर भी हो सकता है।
कैथल में लुआस के रिजनल सेंटर बनाए जाने के लिए गांव क्योड़क में जमीन का निरीक्षण करने पहुंचे विश्वविद्यालय के वीसी डा. श्रीकांत शर्मा ने इस रिसर्च का खुलासा करते हुए कहा कि 160 गांवों के तालाबों से पानी का सेंपल लिया गया। जिसमें जहरीले रसायन पाए गए हैं। इन रसायनों को कैंसर होने का पता लगाया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सरकार को दी जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा का कहना है कि किसान बिना वैज्ञानिकों की सलाह के अंधाधुंध कीटनाशकों व खरपतवार नाशक का प्रयोग करते हैं। जिसका असर पशुओं पर भी हो रहा है। किसान विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही रसायनों का प्रयोग करें।
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लाला लाजपतराय युनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनीमल साईंसिज हिसार (लुआस) के रिजनल सेंटर के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के 10 जिलों कैथल, हिसार, रोहतक, जींद, महेद्रगढ़, अंबाला, सिरसा, कुरुक्षेत्र, करनाल, भिवानी के 160 जोहड़ों से पानी का सेंपल लिया। जिसमें रसायनिक जांच की गई तो वैज्ञानिक भी हैरान रह गए। वैज्ञानिकों को पाया कि इन जोहड़ों के पानी में ट्राइजोफॉस, मोनोक्रॉटोफॉस, एडीपैनफोस, क्लोरपाइरीफोस, मैलाथियोन, पीरीमीफॉस मिथाईल, फैनीट्रोथायॉन, डाईकलोरोवॉस, क्विनलफॉस जैसे कीटनाशक व पेस्टीसाईड मिले हैं। जिन्हें पशु पानी के साथ पी रहे हैं। कई गांवों के पशुओं के दूध के सेम्पल लेकर जांच की गई तो दूध में भी कई रसायनिक तत्व पाए गए। दूध को लेकर अभी व्यापक स्तर पर रिसर्च चल रहा है।
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रसायन युक्त दूध के का संबंध कैंसर से हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अब संबंधित गांवों से कैंसर के मरीजों की संख्या जुटानी शुरू कर दी है। इसके बाद पता चल सकेगा कहीं रसायन युक्त दूध ही कैंसर का तो कारण नहीं। एक गांव से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पिछले साल उस गांव में तीन गुणा कैंसर के अधिक मरीज मिले हैं। जो काफी चिंता का विषय है।
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विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंड हेड वेटरनरी पब्लिक हेल्थ डा. एनके महाजन ने बताया कि कीटनाशक की मात्रा वाले दूध से कैंसर पर अभी रिसर्च चल रहा है। तालाबों में मिले पानी में कीटनाशक मिले हैं। जो बड़ी चिंता का विषय है। कई गांवों में जब दूध की जांच की गई तो उसमें भी रसायनिक तत्व पाए गए हैं। जिनकी मात्रा काफी ज्यादा है। आजकल ज्यादातर लोग केवल नहलाने के लिए पशुओं को तालाब में ले जाते हैं। लेकिन वहां पशु उस पानी को पीते भी हैं। तो शरीर में पानी के जहरीले तत्व चले जाते हैं। इसका कारण गांव में फसलों के अवशेष सहित खेतों का पानी भी तालाबों में चला जाता है। ये रसायन दूध में जाकर बीमारियों से लड़ने की ताकत कम करते हैं। जीन पर असर होने पर कैंसर भी हो सकता है।
कैथल में लुआस के रिजनल सेंटर बनाए जाने के लिए गांव क्योड़क में जमीन का निरीक्षण करने पहुंचे विश्वविद्यालय के वीसी डा. श्रीकांत शर्मा ने इस रिसर्च का खुलासा करते हुए कहा कि 160 गांवों के तालाबों से पानी का सेंपल लिया गया। जिसमें जहरीले रसायन पाए गए हैं। इन रसायनों को कैंसर होने का पता लगाया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट सरकार को दी जाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा का कहना है कि किसान बिना वैज्ञानिकों की सलाह के अंधाधुंध कीटनाशकों व खरपतवार नाशक का प्रयोग करते हैं। जिसका असर पशुओं पर भी हो रहा है। किसान विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही रसायनों का प्रयोग करें।