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‘दूसरों के कंधों पर बंदूक रख कर चलाने वाला व्यक्ति समाज हितैषी नहीं हो सकता’
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Tue, 21 Mar 2017 11:47 PM IST
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52वें दिन भी जारी रहा धरना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जाट आरक्षण व अन्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा देवबन कैंची पर दिया गया धरना 52वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को धरने की अध्यक्षता रामकरण देवबन व संचालन सोनू बांगड़ ने की। धरने को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष बलवान कोटड़ा व जिला प्रधान प्रवीन किच्छाना ने बताया कि अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. यशपाल मलिक 22 मार्च बुधवार को देवबन कैंची धरने को दोपहर 12 बजे व भागल धरने को दोपहर 2 बजे संबोधित करेंगे। सरकार के साथ संघर्ष समिति के हुए समझौता की विस्तृत जानकारी देंगे।
संजय जागलान, भरत सिंह बैनीवाल व अजमेर हरसौला ने सांसद सैनी व पूर्व विधायक रोशन लाल आर्य द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा आंदोलनकारियों के साथ किए गए समझौते पर टिप्पणी करने और उंगली उठाने की कड़े शब्दों मे निंदा की। भाजपा सरकार से ऐसे अनुशासनहीन व देशद्रोहियों के खिलाफ जल्द ही राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करके उनकी जुबान पर लगाम लगाया जाए। रामस्वरप पूर्व सरपंच देवबन, धीरा ने कहा कि सरकार के साथ समिति के हुए समझौते पर गलत टिप्पणी व उंगली उठाने वाला कोई भी जाट संगठन या खापों के कंधों पर बंदूक रख कर चलाने वाला व्यक्तिगत समाज हितैषी नहीं हो सकता। उक्त नेताओं ने कहा कि जब तक मांगो पर समझौता परवान नहीं चढ़ता तब तक शांति बनाए रखे। उक्त नेताओं ने 19 मार्च को फतेहाबाद में धरने पर गोपाल की टिप्पणी पर दिल्ली कूच आंदोलन
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संजय जागलान, भरत सिंह बैनीवाल व अजमेर हरसौला ने सांसद सैनी व पूर्व विधायक रोशन लाल आर्य द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा आंदोलनकारियों के साथ किए गए समझौते पर टिप्पणी करने और उंगली उठाने की कड़े शब्दों मे निंदा की। भाजपा सरकार से ऐसे अनुशासनहीन व देशद्रोहियों के खिलाफ जल्द ही राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करके उनकी जुबान पर लगाम लगाया जाए। रामस्वरप पूर्व सरपंच देवबन, धीरा ने कहा कि सरकार के साथ समिति के हुए समझौते पर गलत टिप्पणी व उंगली उठाने वाला कोई भी जाट संगठन या खापों के कंधों पर बंदूक रख कर चलाने वाला व्यक्तिगत समाज हितैषी नहीं हो सकता। उक्त नेताओं ने कहा कि जब तक मांगो पर समझौता परवान नहीं चढ़ता तब तक शांति बनाए रखे। उक्त नेताओं ने 19 मार्च को फतेहाबाद में धरने पर गोपाल की टिप्पणी पर दिल्ली कूच आंदोलन
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