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Kaithal News: नोटिस जारी करके पुस्तकों की कमी का मांगा जवाब
Thu, 24 Apr 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 24 Apr 2025 01:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सरकार की तरफ से एनसीईआरटी की किताबें लगाने के बारे में सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन बावजूद इसके कई स्कूल संचालक निजी प्रशासकों की किताबों की बिक्री को लेकर अभिभावकों पर जोर दे रहे हैं। जिला प्रशासन के आदेशों को न मानने पर शिक्षा विभाग ने जिले के छह स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इन स्कूलों में किताबों की दुकान खोलकर निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने का काम करने का आरोप लगाया गया है। शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर पुस्तकों की कमी जवाब मांगा है। जिला शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट ने बताया कि छह स्कूल संचालकों को निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के मामले में नोटिस दिया गया है। दो दिनों के भीतर इन्हें जवाब देना होगा।
उन्होंने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाना गलत है। उधर, परेशान अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते उनको पांच हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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इस संदर्भ में डीसी ने प्रीति ने कहा था कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने स्कूलों में एनसीआरईटी की किताबें ही लगवाएं। डीसी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य न करे। जिले के छह सौ से ज्यादा सरकारी स्कूलों में बने पुस्तकालयों में अब जल्द लाखों रुपये की पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए पहुंचेंगी। शिक्षा विभाग ने जल्दी पुस्तक वितरण करने का निर्णय लिया है।
प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के पुस्तकालयों में पुस्तकें भेजने पर विभाग ने 49 लाख 45 हजार रुपये का बजट खर्च किया है। उधर, अधिकारियों का दावा है इसी सप्ताह प्रत्येक स्कूल में किताबों का वितरण हो जाएगा। जिले में छह से आठवीं तक की कक्षा का एक भी सेट नहीं है पहुंचा। जबकि पहली से पांचवीं तक की कक्षा के केवल 10 हजार सेट ही पहुंचे।
इसके तहत प्राथमिक स्कूलों के प्रत्येक पुस्तकालय में पांच हजार, माध्यमिक में 10 हजार व उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में 15 हजार रुपये की पुस्तकें भेजी जाएंगी। ये पुस्तकें पाठ्यक्रम के अलावा अतिरिक्त ज्ञान से संबंधित हैं। खाली समय में विद्यार्थी इन पुस्तकों को पढ़कर अपना ज्ञानवर्धन कर सकते हैं।
जिले में हैं 603 राजकीय विद्यालय
जिले में 603 राजकीय विद्यालय हैं। इनमें से 372 प्राथमिक, 76 माध्यमिक और 155 उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। प्राथमिक विद्यालयों में विभाग की ओर से 18 लाख 60 हजार रुपये का बजट पुस्तकों का खर्च किया गया है। इसी प्रकार माध्यमिक स्कूलों के लिए सात लाख 60 हजार रुपये के बजट से पुस्तकें मंगवाई गई हैं। उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकों के बजट पर 23 लाख 25 हजार हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
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कैथल। सरकार की तरफ से एनसीईआरटी की किताबें लगाने के बारे में सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन बावजूद इसके कई स्कूल संचालक निजी प्रशासकों की किताबों की बिक्री को लेकर अभिभावकों पर जोर दे रहे हैं। जिला प्रशासन के आदेशों को न मानने पर शिक्षा विभाग ने जिले के छह स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
इन स्कूलों में किताबों की दुकान खोलकर निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने का काम करने का आरोप लगाया गया है। शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर पुस्तकों की कमी जवाब मांगा है। जिला शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट ने बताया कि छह स्कूल संचालकों को निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के मामले में नोटिस दिया गया है। दो दिनों के भीतर इन्हें जवाब देना होगा।
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उन्होंने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाना गलत है। उधर, परेशान अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते उनको पांच हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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इस संदर्भ में डीसी ने प्रीति ने कहा था कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने स्कूलों में एनसीआरईटी की किताबें ही लगवाएं। डीसी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य न करे। जिले के छह सौ से ज्यादा सरकारी स्कूलों में बने पुस्तकालयों में अब जल्द लाखों रुपये की पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए पहुंचेंगी। शिक्षा विभाग ने जल्दी पुस्तक वितरण करने का निर्णय लिया है।
प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के पुस्तकालयों में पुस्तकें भेजने पर विभाग ने 49 लाख 45 हजार रुपये का बजट खर्च किया है। उधर, अधिकारियों का दावा है इसी सप्ताह प्रत्येक स्कूल में किताबों का वितरण हो जाएगा। जिले में छह से आठवीं तक की कक्षा का एक भी सेट नहीं है पहुंचा। जबकि पहली से पांचवीं तक की कक्षा के केवल 10 हजार सेट ही पहुंचे।
इसके तहत प्राथमिक स्कूलों के प्रत्येक पुस्तकालय में पांच हजार, माध्यमिक में 10 हजार व उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में 15 हजार रुपये की पुस्तकें भेजी जाएंगी। ये पुस्तकें पाठ्यक्रम के अलावा अतिरिक्त ज्ञान से संबंधित हैं। खाली समय में विद्यार्थी इन पुस्तकों को पढ़कर अपना ज्ञानवर्धन कर सकते हैं।
जिले में हैं 603 राजकीय विद्यालय
जिले में 603 राजकीय विद्यालय हैं। इनमें से 372 प्राथमिक, 76 माध्यमिक और 155 उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हैं। प्राथमिक विद्यालयों में विभाग की ओर से 18 लाख 60 हजार रुपये का बजट पुस्तकों का खर्च किया गया है। इसी प्रकार माध्यमिक स्कूलों के लिए सात लाख 60 हजार रुपये के बजट से पुस्तकें मंगवाई गई हैं। उच्च व वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकों के बजट पर 23 लाख 25 हजार हजार रुपये खर्च किए गए हैं।