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Kaithal News: गन्ने की बुआई के लिए किया प्रेरित
Sun, 21 Sep 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 21 Sep 2025 01:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार ने सेरधा और कमौदा गांव के किसानों को गन्ने की बुआई सितंबर-अक्तूबर में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश में गन्ने की सर्दकालीन बुआई फसल क्षेत्रफल के करीब 10-12 प्रतिशत हिस्से में की जाती है। अगेती गन्ना फसल, बसंतकालीन गन्ने की तुलना में 20-25 प्रतिशत अधिक पैदावार देती है और जल्दी पककर तैयार हो जाती है।
कृष्ण कुमार ने कहा कि इस समय गन्ना फसल में अंत:फसलीकरण अपनाकर किसान बिना किसी दुष्प्रभाव के अतिरिक्त आमदनी ले सकते हैं। इस दौरान किसान तोरिया, सरसों, मटर, मेथी, चना, मसरी, लहसुन, आलू और धनिया जैसी फसलें गन्ने के साथ उगा सकते हैं। उन्होंने बैड प्लांटर विधि द्वारा गेहूं की फसल भी सुगमता पूर्वक उगाने का सुझाव दिया।
प्रबंध निदेशक ने किसानों से आह्वान किया कि गन्ना बीजाई की पुरानी पद्धति छोड़कर नई तकनीक अपनाएं, ताकि लेबर की समस्या का समाधान हो सके। उन्होंने निर्देश दिया कि गन्ने की बीजाई 4 फीट की दूरी पर करें ताकि तैयार फसल को शुगरकेन हार्वेस्टर से मिल द्वारा आसानी से कटवाया जा सके।
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गन्ना प्रबंधक डॉ. रामपाल ने किसानों को शुगर मिल द्वारा गन्ना फसल पर दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। इसमें अगेती किस्में सीओ. 118, सीओ. 239, सीओएच-188, सीओ.एच-160 व सीओ 15023 ब्याज रहित गन्ना बीज, मिट्टी उपचार के लिए कीटनाशी, और बीज उपचार के लिए नम गर्म हवा संयंत्र शामिल हैं। उन्होंने आग्रह किया कि प्रत्येक किसान कम से कम 50 प्रतिशत भूमि पर गन्ना फसल उगाए। इस मौके पर निदेशक रामेश्वर ढुल, कृष्ण कुमार, दलशेर सिंह, बलबीर सिंह, गुरनाम जाखौली, पंडित हरिकेश सौंगल, राजीव सौंगल, रामेश्वर सौगल आदि उपस्थित रहे।
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कैथल। सहकारी चीनी मिल के प्रबंध निदेशक कृष्ण कुमार ने सेरधा और कमौदा गांव के किसानों को गन्ने की बुआई सितंबर-अक्तूबर में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश में गन्ने की सर्दकालीन बुआई फसल क्षेत्रफल के करीब 10-12 प्रतिशत हिस्से में की जाती है। अगेती गन्ना फसल, बसंतकालीन गन्ने की तुलना में 20-25 प्रतिशत अधिक पैदावार देती है और जल्दी पककर तैयार हो जाती है।
कृष्ण कुमार ने कहा कि इस समय गन्ना फसल में अंत:फसलीकरण अपनाकर किसान बिना किसी दुष्प्रभाव के अतिरिक्त आमदनी ले सकते हैं। इस दौरान किसान तोरिया, सरसों, मटर, मेथी, चना, मसरी, लहसुन, आलू और धनिया जैसी फसलें गन्ने के साथ उगा सकते हैं। उन्होंने बैड प्लांटर विधि द्वारा गेहूं की फसल भी सुगमता पूर्वक उगाने का सुझाव दिया।
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प्रबंध निदेशक ने किसानों से आह्वान किया कि गन्ना बीजाई की पुरानी पद्धति छोड़कर नई तकनीक अपनाएं, ताकि लेबर की समस्या का समाधान हो सके। उन्होंने निर्देश दिया कि गन्ने की बीजाई 4 फीट की दूरी पर करें ताकि तैयार फसल को शुगरकेन हार्वेस्टर से मिल द्वारा आसानी से कटवाया जा सके।
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गन्ना प्रबंधक डॉ. रामपाल ने किसानों को शुगर मिल द्वारा गन्ना फसल पर दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। इसमें अगेती किस्में सीओ. 118, सीओ. 239, सीओएच-188, सीओ.एच-160 व सीओ 15023 ब्याज रहित गन्ना बीज, मिट्टी उपचार के लिए कीटनाशी, और बीज उपचार के लिए नम गर्म हवा संयंत्र शामिल हैं। उन्होंने आग्रह किया कि प्रत्येक किसान कम से कम 50 प्रतिशत भूमि पर गन्ना फसल उगाए। इस मौके पर निदेशक रामेश्वर ढुल, कृष्ण कुमार, दलशेर सिंह, बलबीर सिंह, गुरनाम जाखौली, पंडित हरिकेश सौंगल, राजीव सौंगल, रामेश्वर सौगल आदि उपस्थित रहे।