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Kaithal News: पहले वर्ष आठ विषयों में 600 अंकों की होगी परीक्षा
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कैथल। राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद अब शिक्षा का स्वरूप बदलेगा। वर्षों से चली आ रही शिक्षा पद्धति इस बार से बदल जाएगी। पहले वर्ष आठ विषयों में 600 अंकों की परीक्षा होगी।
अब तक तीन वर्ष में होने वाला बीए, बीएससी, बीकॉम का कोर्स अब चार वर्ष का होगा। नई शिक्षा नीति में तीन संकायों को जोड़ा गया है। इसमें भाषा, कौशल विकास प्रशिक्षण, सह पाठ्यक्रम के विषय शामिल हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत अब स्नातक में अब एक वर्ष में विद्यार्थी आठ विषय की पढ़ाई कर पाएंगे। जिनकी परीक्षा 600 अंकों के होंगे। दूसरे व तीसरे साल में विषय घटते चले जाएंगे। दूसरी व तीसरी साल के लिए विषय तो निर्धारित कर दिए हैं, पेपर के लिए अंक निर्धारित करने की प्रक्रिया जारी है।
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उधर, यूजी कक्षाओं में दाखिले के लिए इस बार विद्यार्थियों की रुचि कॉमर्स व साइंस संकाय की ओर बढ़ी है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार विद्यार्थी इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, बिजनेस स्टडी जैसे क्षेत्रों में कॅरिअर बनाना चाहते हैं।
नई नीति में रोजगार परक बनाया गया है पाठयक्रम
कॉलेज के कार्यकारी प्राचार्य डाॅ. सत्यवीर मैहला ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत कॉमन मिनिमम सिलेबस स्नातक स्तर के लिए है। ये सेमेस्टर आधारित बनाए गए हैं। मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के तहत सिलेबस बना है। एक साल में दो सेमेस्टर का सिलेबस सर्टिफिकेट कोर्स के लिए बनाया है। दो साल में चार सेमेस्टर डिप्लोमा और तीन साल में छह सेमेस्टर स्नातक की डिग्री के लिए तैयार किया है। परंपरागत पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाने की कोशिश की है।
प्रत्येक सेमेस्टर के लिए अलग क्रेडिट तय
कॉलेज की दाखिला समिति के इंचार्ज डाॅ. अनिल नरूला ने कहा कि कॉमन मिनिमम सिलेबस में हर सेमेस्टर में अलग-अलग क्रेडिट निर्धारित किया गया है। अगर कोई छात्र एक साल की स्नातक की पढ़ाई कर छोड़ देता है। आगे फिर वह अपनी पढ़ाई को पूरी करना चाहता है तो इसी क्रेडिट के आधार पर उसे अपने कोर्स को पूरा करने की सुविधा दी जाएगी।ॉ
ये रहेगा परीक्षा शेड्यूल
प्रथम वर्ष में कुल आठ परीक्षा होगी। इसमें तीन पेपर मेजर विषय के तीन पेपर होंगे जो 100-100 अंक के होंगे। चौथा पेपर माइनर विषय का होगा जो 50 अंक का रहेगा।
पांचवां पेपर बहुविषय (जो विषय विद्यार्थी ने बारहवीं के बाद नहीं पढ़ा) का होगा जो 75 अंक का होगा। छठा पेपर भाषा एवं संचार विषय का रहेगा जो 50 अंक का होगा।
सातवां पेपर कंप्यूटर तकनीकी विषय का 75 अंक होगा व अंतिम पेपर पर्यावरण व नैतिक मूल्य का होगा जो 50 अंकों का होगा।
गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति में खास बात यह रहेगी कि बच्चे स्वयं अपनी मनमर्जी से विषय ले सकेंगे। जिस क्षेत्र में विद्यार्थी को रोजगार पाना चाहत है वह उसी आधार पर कौशल विकास प्रशिक्षण की शिक्षा ले सकता है।
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अब तक तीन वर्ष में होने वाला बीए, बीएससी, बीकॉम का कोर्स अब चार वर्ष का होगा। नई शिक्षा नीति में तीन संकायों को जोड़ा गया है। इसमें भाषा, कौशल विकास प्रशिक्षण, सह पाठ्यक्रम के विषय शामिल हैं।
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नई शिक्षा नीति के तहत अब स्नातक में अब एक वर्ष में विद्यार्थी आठ विषय की पढ़ाई कर पाएंगे। जिनकी परीक्षा 600 अंकों के होंगे। दूसरे व तीसरे साल में विषय घटते चले जाएंगे। दूसरी व तीसरी साल के लिए विषय तो निर्धारित कर दिए हैं, पेपर के लिए अंक निर्धारित करने की प्रक्रिया जारी है।
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उधर, यूजी कक्षाओं में दाखिले के लिए इस बार विद्यार्थियों की रुचि कॉमर्स व साइंस संकाय की ओर बढ़ी है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार विद्यार्थी इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, बिजनेस स्टडी जैसे क्षेत्रों में कॅरिअर बनाना चाहते हैं।
नई नीति में रोजगार परक बनाया गया है पाठयक्रम
कॉलेज के कार्यकारी प्राचार्य डाॅ. सत्यवीर मैहला ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत कॉमन मिनिमम सिलेबस स्नातक स्तर के लिए है। ये सेमेस्टर आधारित बनाए गए हैं। मल्टीपल एंट्री और एग्जिट के तहत सिलेबस बना है। एक साल में दो सेमेस्टर का सिलेबस सर्टिफिकेट कोर्स के लिए बनाया है। दो साल में चार सेमेस्टर डिप्लोमा और तीन साल में छह सेमेस्टर स्नातक की डिग्री के लिए तैयार किया है। परंपरागत पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक बनाने की कोशिश की है।
प्रत्येक सेमेस्टर के लिए अलग क्रेडिट तय
कॉलेज की दाखिला समिति के इंचार्ज डाॅ. अनिल नरूला ने कहा कि कॉमन मिनिमम सिलेबस में हर सेमेस्टर में अलग-अलग क्रेडिट निर्धारित किया गया है। अगर कोई छात्र एक साल की स्नातक की पढ़ाई कर छोड़ देता है। आगे फिर वह अपनी पढ़ाई को पूरी करना चाहता है तो इसी क्रेडिट के आधार पर उसे अपने कोर्स को पूरा करने की सुविधा दी जाएगी।ॉ
ये रहेगा परीक्षा शेड्यूल
प्रथम वर्ष में कुल आठ परीक्षा होगी। इसमें तीन पेपर मेजर विषय के तीन पेपर होंगे जो 100-100 अंक के होंगे। चौथा पेपर माइनर विषय का होगा जो 50 अंक का रहेगा।
पांचवां पेपर बहुविषय (जो विषय विद्यार्थी ने बारहवीं के बाद नहीं पढ़ा) का होगा जो 75 अंक का होगा। छठा पेपर भाषा एवं संचार विषय का रहेगा जो 50 अंक का होगा।
सातवां पेपर कंप्यूटर तकनीकी विषय का 75 अंक होगा व अंतिम पेपर पर्यावरण व नैतिक मूल्य का होगा जो 50 अंकों का होगा।
गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति में खास बात यह रहेगी कि बच्चे स्वयं अपनी मनमर्जी से विषय ले सकेंगे। जिस क्षेत्र में विद्यार्थी को रोजगार पाना चाहत है वह उसी आधार पर कौशल विकास प्रशिक्षण की शिक्षा ले सकता है।