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Kaithal News: फसल विविधीकरण का बताया महत्व
Tue, 12 Sep 2023 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 12 Sep 2023 01:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तत्वावधान में अटल भूजल योजना के तहत गुहला क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों के किसानों व आंगनबाड़ी कर्मियों को कुरुक्षेत्र गुरुकुल में भ्रमण के लिए ले जाया गया। इस मौके पर उन्हें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण व सूक्ष्म सिंचाई के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
अटल भूजल योजना में आईईसी एक्सपर्ट विक्रम सिंह ने बताया कि सोमवार को हर गांव से कम से कम छह लोगों को भ्रमण में शामिल किया। इस दौरान एसडीओ डा. विनोद वर्मा व एडीओ डॉ. दिनेश शर्मा ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण व सूक्ष्म सिंचाई के महत्व के बारे में बताया। एसडीओ डा. विनोद वर्मा ने बताया कि अब भी अगर हमने प्राकृतिक खेती को नहीं अपनाया तो बहुत देर हो जाएगी। धरती पर बहुत ही कम मात्रा में भूजल हमारे पास उपलब्ध है, लेकिन हमारी निर्भरता इस पर लगातार बढ़़ रही है।
कहा कि यही हालात रहे तो 2065 तक फसलों की सिंचाई तो दूर हम पीने के पानी के लिए भी तरस जाएंगे। हमें आज प्राकृतिक खेती, सिंचाई की आधुनिकतम तकनीक को प्रयोग करते हुए भूजल संरक्षण करना होगा। आईईसी एक्सपर्ट विक्रम सिंह ने बताया कि पूरे जिले के दो ब्लॉक गुहला और राजौंद अटल भूजल योजना में आते हैं और इन दो ब्लॉक की 82 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को भ्रमण करवाया जाएगा। इस अवसर पर भूजल विशेषज्ञ शिवकुमार, कृषि विशेषज्ञ विशाल कांबोज व प्रशिक्षक मौजूद रहे।
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कैथल। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तत्वावधान में अटल भूजल योजना के तहत गुहला क्षेत्र की 10 ग्राम पंचायतों के किसानों व आंगनबाड़ी कर्मियों को कुरुक्षेत्र गुरुकुल में भ्रमण के लिए ले जाया गया। इस मौके पर उन्हें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण व सूक्ष्म सिंचाई के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
अटल भूजल योजना में आईईसी एक्सपर्ट विक्रम सिंह ने बताया कि सोमवार को हर गांव से कम से कम छह लोगों को भ्रमण में शामिल किया। इस दौरान एसडीओ डा. विनोद वर्मा व एडीओ डॉ. दिनेश शर्मा ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण व सूक्ष्म सिंचाई के महत्व के बारे में बताया। एसडीओ डा. विनोद वर्मा ने बताया कि अब भी अगर हमने प्राकृतिक खेती को नहीं अपनाया तो बहुत देर हो जाएगी। धरती पर बहुत ही कम मात्रा में भूजल हमारे पास उपलब्ध है, लेकिन हमारी निर्भरता इस पर लगातार बढ़़ रही है।
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कहा कि यही हालात रहे तो 2065 तक फसलों की सिंचाई तो दूर हम पीने के पानी के लिए भी तरस जाएंगे। हमें आज प्राकृतिक खेती, सिंचाई की आधुनिकतम तकनीक को प्रयोग करते हुए भूजल संरक्षण करना होगा। आईईसी एक्सपर्ट विक्रम सिंह ने बताया कि पूरे जिले के दो ब्लॉक गुहला और राजौंद अटल भूजल योजना में आते हैं और इन दो ब्लॉक की 82 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को भ्रमण करवाया जाएगा। इस अवसर पर भूजल विशेषज्ञ शिवकुमार, कृषि विशेषज्ञ विशाल कांबोज व प्रशिक्षक मौजूद रहे।
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