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ऐतिहासिक महातीर्थ फल्गु प्रशासन की अनदेखी का शिकार
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historical place
- फोटो : Kaithal
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गांव फरल स्थित विश्व प्रसिद्ध फल्गु तीर्थ जो सब तीर्थों में उत्तमोत्तम व बड़ा है। जहां श्रद्धालुओं द्वारा यजमानों के श्राद्ध एवं तर्पण करने से सब प्रकार के पितरों की मुक्ति अर्थात सद्गति हो जाती है। वह प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो रहा है। महाभारत के अनुुसार इस तीर्थ में स्नान करने एवं देवताओं का तर्पण करने से मनुुष्य को अग्रिष्टोम व वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। वामन पुराण में भी वर्णन है कि जो मनुष्य श्राद्धों की सोमवती अमावस्या को फल्गु तीर्थ पर श्राद्ध करता है। उसको गया (बिहार) पर श्राद्ध करने के बराबर फल प्राप्त करता है। बावजूद इसके जिला प्रशासन इस महातीर्थ की घोर अनदेखी कर देश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को भारी ठेस पहुंचाने का काम कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन की घोर अनदेखी के कारण और तीर्थ में पानी न डालने से श्रद्धालुओं को बिना स्नान के ही लौटना पड़ रहा है। तीर्थ के सिर्फ एक ही घाट में पानी था और उस पानी में भी काई जमने पर बदबू हो चुकी थी। जिस कारण तीर्थ की परिक्रमा करने वालों को भारी परेशानी हो रही थी। जिला प्रशासन के सुस्त रवैये को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वयं तीर्थ की सफाई करने की ठानी और गांव के आठ वर्ष के बच्चे से 60 वर्ष के बुजुर्गों ने तीर्थ से तसलों व बाल्टियों से तीर्थ में जमा गंदगी को निकाल कर साफ कर दिया है। ग्रामीणों गुलाब सिंह, संजीव कुमार, नरेंद्र कुमार, राजीव राणा, नवीन राणा, सुखविंद्र राणा, नरेंश राणा, तेजिंद्र सिंह, बिट्टू प्रजापत, रोहताश प्रजापत व अमरपाल सिंह ने बताया कि गत अक्तूबर 2018 में तीर्थ पर विशाल मेला का आयोजन हुआ था और मेले के कुछ दिनों बाद ही तीर्थ से पानी निकाल दिया था क्योंकि पानी में अत्यधिक आटा डलने से पानी खराब हो चुका था। पानी निकाले हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है और उसके बाद जिला प्रशासन ने तीर्थ की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। ग्रामीणों ने बताया कि जिला प्रशासन को कुछ करता न देख ग्रामीणों ने खुद तीर्थ की सफाई का निर्णय लिया और पंचायत का भी इसमें कुछ सहयोग रहा। लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तीर्थ की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
करोड़ों रुपये बजट के बावजूद तीर्थ का है ये हाल
ग्रामीणों के अनुसार फल्गु तीर्थ के मेले के पर करोड़ों रुपयों की ग्रांट सरकार की ओर से दी गई थी। जिसमें से समय की कमी बताते हुए आधी ही तीर्थ पर लगाई गई थी और बाकी ग्रांट मेले के बाद लगाने का प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया था। मेले के समय नियुक्त मेला अधिकारी जगदीप सिंह जो उस समय कलायत के एसडीएम थे, ने भी मेले के बाद पूरी ग्रांट गांव व तीर्थ पर लगाने का वायदा किया था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी तीर्थ पानी की बाट जोह रहा है। उन्होंने मांग की कि अधिकारी तीर्थ की सुध लें।
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ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन की घोर अनदेखी के कारण और तीर्थ में पानी न डालने से श्रद्धालुओं को बिना स्नान के ही लौटना पड़ रहा है। तीर्थ के सिर्फ एक ही घाट में पानी था और उस पानी में भी काई जमने पर बदबू हो चुकी थी। जिस कारण तीर्थ की परिक्रमा करने वालों को भारी परेशानी हो रही थी। जिला प्रशासन के सुस्त रवैये को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वयं तीर्थ की सफाई करने की ठानी और गांव के आठ वर्ष के बच्चे से 60 वर्ष के बुजुर्गों ने तीर्थ से तसलों व बाल्टियों से तीर्थ में जमा गंदगी को निकाल कर साफ कर दिया है। ग्रामीणों गुलाब सिंह, संजीव कुमार, नरेंद्र कुमार, राजीव राणा, नवीन राणा, सुखविंद्र राणा, नरेंश राणा, तेजिंद्र सिंह, बिट्टू प्रजापत, रोहताश प्रजापत व अमरपाल सिंह ने बताया कि गत अक्तूबर 2018 में तीर्थ पर विशाल मेला का आयोजन हुआ था और मेले के कुछ दिनों बाद ही तीर्थ से पानी निकाल दिया था क्योंकि पानी में अत्यधिक आटा डलने से पानी खराब हो चुका था। पानी निकाले हुए लगभग एक वर्ष बीत चुका है और उसके बाद जिला प्रशासन ने तीर्थ की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। ग्रामीणों ने बताया कि जिला प्रशासन को कुछ करता न देख ग्रामीणों ने खुद तीर्थ की सफाई का निर्णय लिया और पंचायत का भी इसमें कुछ सहयोग रहा। लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तीर्थ की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
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करोड़ों रुपये बजट के बावजूद तीर्थ का है ये हाल
ग्रामीणों के अनुसार फल्गु तीर्थ के मेले के पर करोड़ों रुपयों की ग्रांट सरकार की ओर से दी गई थी। जिसमें से समय की कमी बताते हुए आधी ही तीर्थ पर लगाई गई थी और बाकी ग्रांट मेले के बाद लगाने का प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया था। मेले के समय नियुक्त मेला अधिकारी जगदीप सिंह जो उस समय कलायत के एसडीएम थे, ने भी मेले के बाद पूरी ग्रांट गांव व तीर्थ पर लगाने का वायदा किया था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी तीर्थ पानी की बाट जोह रहा है। उन्होंने मांग की कि अधिकारी तीर्थ की सुध लें।
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