महाभारत काल से जुड़ा है कैथल के श्री ग्यारह रुद्री मंदिर का इतिहास

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2019 02:27 AM IST
historical place
historical place - फोटो : Kaithal
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छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध कैथल शहर का ऐतिहासिक श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह जिले के स्थित प्रमुख मंदिरों में से एक है, जिसका इतिहास महाभारतकाल से जुड़ा है। प्राचीन मूर्ति स्थापत्य कला के एक उदाहरण के रूप में भी श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर का नाम ले सकते हैं।
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ऐसा माना जाता है कि शहर में इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय की थी, जब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था। महाभारत के युद्ध में कौरव और पांडवों के बीच हुए युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मिक शांति के लिए भगवान कृष्ण ने यहां 11 रुद्रों की स्थापना की थी। उसके बाद पांडवों ने पूजा अर्चना करवाई। एक मान्यता ये भी है कि महाभारत के समय अर्जुन ने पाशुपत शस्त्र प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की आराधना की थी और भगवान शिव ने इसी स्थान पर प्रसन्न होकर अर्जुन को दर्शन दिए थे। तभी से आसपास के श्रद्धालु यहां पूजा करने लगे। अब मंदिर में जिले के साथ-साथ प्रदेश, देश और विश्वभर से श्रद्धालु मंदिर में आते हैं। आज भी मंदिर में ग्यारह रुद्रों की विशेष पर्वों और अवसरों पर पूजा की जाती है।

गाय माता के पेट से लिया था 11 रूपों में जन्म
मंदिर के पुजारी पंडित मुनेंद्र मिश्रा ने बताया कि महर्षि कश्यप ने भगवान शिव की तपस्या करके वरदान मांगा था कि भगवान शिव उनके पुत्र के रूप में जन्म लें। भगवान ने गाय माता के पेट से 11 रूपों में जन्म लिया, इसलिए इन्हें सुरभि पुत्र भी कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि कैथल के अलावा देश में कहीं भी ग्यारह रुद्र नहीं हैं। इन रुद्रों के नाम विलोहित, शास्ता, कपाली, पिंगल, अजपाद, अहिबरुध्न्य, भीम, विरूपाक्ष, चंड, भव व शंभु हैं।
मंदिर की विशेषता
मंदिर प्रबंधक समिति के प्रधान मांगेराम खुरानियां, उपप्रधान प्रीतिपाल पाई व पूर्व प्रधान माई लाल सैनी ने बताया कि शिव पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के 11 रुद्रों पर जल चढ़ता है, उसे उसकी मनोकामना प्राप्ति होती है और उसके समस्त पाप धुल कर हजार गाय दान करने के तुल्य पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि चार एकड़ में फैले मंदिर राम दरबार, माता दुर्गा, वैष्णो माता, राधा-कृष्ण मंदिर, महाकाली मंदिर, नवग्रह और राधे मंदिर की छटा देखते ही बनती हैं।
शिवरात्रि व दशहरे पर्व पर होते हैं विशेष कार्यक्रम
मंदिर की देखरेख के लिए बनाई गई कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि मंदिर में समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि, राम नवमी, दशहरे व दीपावली पर मंदिर को सजाया जाता है। इन त्योहारों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं। दशहरे से पूर्व यहां रामलीला का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु ग्यारह रुद्रों पर दूध और मिश्री के साथ अभिषेक करते हैं। सावन माह में आने वाली शिवरात्रि पर मंदिर में भक्त कांवड़ लाते हैं और समय-समय पर विभिन्न कथाओं का आयोजन किया जाता है।
मंदिर प्रबंधक समिति की ओर से बच्चों को दी जा रही शिक्षा
मंदिर में ही प्रबंधक कमेटी के सदस्यों द्वारा श्री ग्यारह रुद्री मंदिर स्कूल बनवाया गया है, जिसमें शहरभर से सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के साथ ही बच्चों के लिए वाटिका भी बनाई गई है, जिसमें झूले लगे हुए हैं। इसके अलावा मंदिर के अंदर एक प्राचीन तालाब भी है, जिसमें श्रद्धालु विशेष अवसरों पर स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं।

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