{"_id":"6626f2c851c5304978097b64","slug":"hanuman-ji-was-installed-in-the-form-of-kapidhwaj-on-arjuns-chariot-kaithal-news-c-18-1-knl1004-374217-2024-04-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: अर्जुन के रथ पर कपिध्वज रूप में स्थापित हुए थे हनुमान जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: अर्जुन के रथ पर कपिध्वज रूप में स्थापित हुए थे हनुमान जी
Tue, 23 Apr 2024 04:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 23 Apr 2024 04:59 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल जिलेभर में मंगलवार को हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। वहीं, कैथल का इतिहास भगवान हनुमान जी से भी जुड़ा माना जाता है इसलिए इस दिन जिले के विभिन्न मंदिरों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत हनुमान वाटिका, मां अंजनी का टीला व रेलवे गेट स्थित श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में आयोजन की तैयारी है और किए जा रहे हैं।
कैथल के रेलवे गेट स्थित चिल्ड्रेन पार्क में स्थित श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर का काफी मान्यता है। किंवदंति के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास भी करीब पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, श्री मद्भागवत गीता के पहले अध्याय के 20वें श्लोक में कैथल के मंदिर वाले स्थान का उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान हनुमान की भेंट भीम से हुई थी।
इसमें उन्होंने महाभारत के युद्ध की पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि वह पांडव पुत्र अर्जुन के रथ पर कपि ध्वज के रूप में विराजमान होंगे। इसमें यह भी उल्लेख है कि जिस समय महाभारत का युद्ध शुरू हुआ तो भगवान हनुमान जी इस स्थान से कपि ध्वज के रूप में अर्जुन के रथ पर विराजमान हुए थे।
विज्ञापन
महाभारत में कहा गया है कि श्री मद्भागवत गीता में इस ध्वज को धर्म का प्रचारक माना गया। जब इस युद्ध की समाप्ति हुई तो जब अर्जुन ने यह ध्वज रथ से उतारा तो रथ ध्वस्त हो गया था। तब अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण ने रथ टूटने की बात कही तो भगवान ने कहा कि यह रथ पर लगी ध्वजा धर्म का प्रतीक है, जिसके उतरने के कारण यह ध्वस्त हो गया।
यह है मान्यता ः मंदिर समिति के उप प्रधान टेक चंद वर्मा उर्फ राधे-राधे ने कहा कि हर मंगलवार को यहां पर काफी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही रात के समय प्रभु इच्छा तक संकीर्तन भी किया जाता है। महंत राघव दास शास्त्री के सानिध्य में मंदिर में पूजा-अर्चना करवाई जाती है। यहां पर मनोकामना पूरी होने पर भगवान श्रीराम के नाम का ध्वज चढ़ाने की परंपरा है।
कहते हैं कि यहां पर जो भी श्रद्धालु सच्चा संकल्प लेकर अपनी मनोकामना मांगता है। वह पूरी होती है। मंदिर में भगवान हनुमान की 51 फीट की प्रतिमा की स्थापना नगर परिषद, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व शहर के लोगों ने करवाई है।
पूजा के लिए मुहूर्त
हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का विशेष महत्व है। इस पर्व को शक्ति, भक्ति और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति को हर तरह की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान श्री राम भी प्रसन्न होते हैं और कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। सुबह से रात 10 बजकर 32 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। चैत्र पूर्णिमा मंगलवार को सुबह 03 बजकर 25 मिनट पर आरंभ होगी और 24 अप्रैल 2024 को यानी अगले दिन सुबह 05 बजकर 18 मिनट पर इसका
समापन होगा।
विज्ञापन
कैथल जिलेभर में मंगलवार को हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। वहीं, कैथल का इतिहास भगवान हनुमान जी से भी जुड़ा माना जाता है इसलिए इस दिन जिले के विभिन्न मंदिरों में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत हनुमान वाटिका, मां अंजनी का टीला व रेलवे गेट स्थित श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर में आयोजन की तैयारी है और किए जा रहे हैं।
कैथल के रेलवे गेट स्थित चिल्ड्रेन पार्क में स्थित श्री दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर का काफी मान्यता है। किंवदंति के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास भी करीब पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, श्री मद्भागवत गीता के पहले अध्याय के 20वें श्लोक में कैथल के मंदिर वाले स्थान का उल्लेख मिलता है। इसमें कहा गया है कि महाभारत के युद्ध से पहले भगवान हनुमान की भेंट भीम से हुई थी।
विज्ञापन
इसमें उन्होंने महाभारत के युद्ध की पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि वह पांडव पुत्र अर्जुन के रथ पर कपि ध्वज के रूप में विराजमान होंगे। इसमें यह भी उल्लेख है कि जिस समय महाभारत का युद्ध शुरू हुआ तो भगवान हनुमान जी इस स्थान से कपि ध्वज के रूप में अर्जुन के रथ पर विराजमान हुए थे।
विज्ञापन
महाभारत में कहा गया है कि श्री मद्भागवत गीता में इस ध्वज को धर्म का प्रचारक माना गया। जब इस युद्ध की समाप्ति हुई तो जब अर्जुन ने यह ध्वज रथ से उतारा तो रथ ध्वस्त हो गया था। तब अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण ने रथ टूटने की बात कही तो भगवान ने कहा कि यह रथ पर लगी ध्वजा धर्म का प्रतीक है, जिसके उतरने के कारण यह ध्वस्त हो गया।
यह है मान्यता ः मंदिर समिति के उप प्रधान टेक चंद वर्मा उर्फ राधे-राधे ने कहा कि हर मंगलवार को यहां पर काफी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही रात के समय प्रभु इच्छा तक संकीर्तन भी किया जाता है। महंत राघव दास शास्त्री के सानिध्य में मंदिर में पूजा-अर्चना करवाई जाती है। यहां पर मनोकामना पूरी होने पर भगवान श्रीराम के नाम का ध्वज चढ़ाने की परंपरा है।
कहते हैं कि यहां पर जो भी श्रद्धालु सच्चा संकल्प लेकर अपनी मनोकामना मांगता है। वह पूरी होती है। मंदिर में भगवान हनुमान की 51 फीट की प्रतिमा की स्थापना नगर परिषद, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व शहर के लोगों ने करवाई है।
पूजा के लिए मुहूर्त
हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का विशेष महत्व है। इस पर्व को शक्ति, भक्ति और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन हनुमान जी की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति को हर तरह की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही भगवान श्री राम भी प्रसन्न होते हैं और कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। सुबह से रात 10 बजकर 32 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा। चैत्र पूर्णिमा मंगलवार को सुबह 03 बजकर 25 मिनट पर आरंभ होगी और 24 अप्रैल 2024 को यानी अगले दिन सुबह 05 बजकर 18 मिनट पर इसका
समापन होगा।