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Kaithal News: प्राकृतिक तरीके से खेती को बना दिया मार्केट फ्री, दाम भी मिल रहे ज्यादा

Sat, 23 Dec 2023 02:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 23 Dec 2023 02:42 AM IST
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Farming has been made market free through natural methods, prices are also getting higher
कुलदीप प्रजापति
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कैैथल। परंपरागत खेती से हटकर बात्ता गांव निवासी जोनी राणा लोगों को रसायन मुक्त खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक ढंग से खेती करने पर फसलों का उत्पादन डेढ़ बढ़ जाता है।
जोनी बीते सात वर्ष से प्राकृतिक खेती कर सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। वह हर वर्ष नौ एकड़ में प्राकृतिक तरीके से गेहूं, धान, सरसों व सब्जियों की बिजाई करते हैं। फसलों के लिए वह घर पर ही गाय के गोबर, मूत्र व चूल्हे की राख से खाद तैयार करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती को ‘मार्केट फ्री खेती’ भी नाम दिया है। वह जिस भी फसल की बिजाई करते हैं तो वह घर से ही बिक जाती है, उसे मार्केट लेकर जाने की जरूरत नहीं होती। वह दूसरे लोगों के लिए भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। उनकी कार्यशैली को देखते हुए इस बार हिसार एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय ने भी उनको राष्ट्रीय किसान दिवस पर सम्मानित करने का भी निमंत्रण दिया है।
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किसान जोनी ने बताया कि प्राकृतिक खेती करने की प्रेरणा उसे अस्पताल से मिली थी, जब उनके पिताजी की बड़ी बीमारी के चलते मौत हुई थी तो डॉक्टरों ने खाना-पान कारण बताया था। डॉक्टरों ने कहा था कि आज के समय में जहर युक्त खेती होने लगी है, जिससे शरीर में नई नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। वहीं से उन्होंने प्रेरणा ली थी कि वह अपना खान पान बदलेंगे और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। वर्ष 2015 में उनका संपर्क कृषि विज्ञान केंद्र से हुआ था, जहां पर वैज्ञानिकों ने उनको प्राकृतिक खेती के बारे मे विस्तार से बताया और उनका सहयोग करने का पूरा आश्वासन दिया। तब से उन्होंने प्राकृतिक खेती करनी शुरू कर दी थी।
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किसान जोनी राणा ने बताया वह प्राकृतिक खेती करने के लिए गाय के गोबर, मूत्र व चूल्हे की राख से फसलों के लिए एनपीके खाद तैयार करता है। जिससे फसलों का अच्छा उत्पादन होता है। वह गेहूं की बिजाई पर 500 से 600 रुपये प्रति एकड़ खर्च में करता है, जबकि अन्य किसान तीन से चार हजार रुपये प्रति एकड़ गेहूं की बिजाई करने के लिए खर्च करते हैं। उनके अनुसार वह धान की सीधी बिजाई करता है, जिसमें उसका खर्च चार से पांच हजार आता है, जबकि अन्य किसान प्रति एकड़ में धान की बिजाई करने पर नौ से 10 हजार रुपये खर्च कर देते हैं और उत्पादन भी ठीक-ठाक ही होता है। प्राकृतिक खेती में उत्पादन भी अच्छा होता है और दाम भी डेढ़ गुणा अधिक मिलते हैं।

किसान जोनी ने बताया कि प्राकृतिक खेती को मार्केट फ्री खेती भी कह सकते हैं, क्योंकि प्राकृतिक फसल को बाजार में ले जाकर बेचने की जरूरत ही नहीं पड़ती। उनकी फसल सीधे घर से ही बिक जाती है और बाजार से भी डेढ़ गुणा दाम अधिक मिलते हैं। प्राकृतिक खेती का एक फायदा यह भी है कि प्राकृतिक आपदा से ज्यादा नुकसान नहीं होता। बीते वर्ष बारिश व आंधी के चलते उनके आसपास के सभी किसानों की गेहूं बिछ गई थी, और उनकी फसल बिल्कुल सीधी खड़ी थी। उस समय अन्य किसानों से 15 से 20 मन अधिक गेहूं की फसल निकली थी।
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