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Kaithal News: किसान बने पहरेदार, नहीं आ रहे खरीदार
Sun, 12 Apr 2026 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:35 AM IST
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ट्राली से सड़क के ऊपर गेहूं उतारता श्रमिक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। मंडियां गेहूं से अट चुकी हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। फसल फड़ों से सड़कों तक पहुंच चुकी है, जबकि किसान कई दिनों से मंडियों में डेरा डालकर अपनी उपज का पहरा देने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि अब तक मंडी-केंद्रों पर करीब 1.87 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है और खरीद इसकी आधी भी नहीं हो सकी है।
दरअसल, खरीद एजेंसियों द्वारा नमी का हवाला देकर खरीद टालने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अब तक केवल 68 हजार मीट्रिक टन की ही खरीद हो सकी है। इस अंतर से मंडियों में गेहूं के अंबार लग गए हैं और खरीदारों की कमी साफ नजर आ रही है।
किसानों का कहना है कि खरीद एजेंसियों के अधिकारी फसल की जांच कर आगे बढ़ जाते हैं और नमी अधिक बताकर खरीद से बचते हैं। इसके चलते किसान कई दिनों से ट्रॉली लेकर लाइनों में खड़े हैं, न तो घर लौट पा रहे हैं और न ही भुगतान मिल रहा है। किसान अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रखने के लिए दिन-रात मंडियों में पहरा दे रहे हैं।
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नमी का बहाना, बढ़ती परेशानी : किसान महेंद्र गुर्जर और सुल्तान सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि गेहूं पूरी तरह तैयार है, लेकिन अधिकारी गुणवत्ता मानकों का हवाला देकर खरीद में देरी कर रहे हैं। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
42 केंद्रों पर होनी है खरीद : प्रशासन ने गेहूं खरीद के लिए 42 मंडी-केंद्र बनाए हैं और किसानों को सुविधाएं देने का दावा किया गया था, लेकिन धरातल पर किसान परेशान नजर आ रहे हैं। भाकियू (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने सरकार से मांग की है कि नमी के नियमों में ढील दी जाए, खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
राजौंद मंडी में 63,958 क्विंटल खरीद : अनाज मंडी राजौंद में गेहूं की खरीद का कार्य इन दिनों जोरों पर है। शनिवार को राजौंद, जाखौली और किठाना केंद्रों पर कुल 63,958 क्विंटल गेहूं की खरीद दर्ज की गई। मार्केट कमेटी के सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि तीनों केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुचारु हैं और किसानों को कोई असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
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कैथल। मंडियां गेहूं से अट चुकी हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। फसल फड़ों से सड़कों तक पहुंच चुकी है, जबकि किसान कई दिनों से मंडियों में डेरा डालकर अपनी उपज का पहरा देने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि अब तक मंडी-केंद्रों पर करीब 1.87 लाख मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है और खरीद इसकी आधी भी नहीं हो सकी है।
दरअसल, खरीद एजेंसियों द्वारा नमी का हवाला देकर खरीद टालने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अब तक केवल 68 हजार मीट्रिक टन की ही खरीद हो सकी है। इस अंतर से मंडियों में गेहूं के अंबार लग गए हैं और खरीदारों की कमी साफ नजर आ रही है।
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किसानों का कहना है कि खरीद एजेंसियों के अधिकारी फसल की जांच कर आगे बढ़ जाते हैं और नमी अधिक बताकर खरीद से बचते हैं। इसके चलते किसान कई दिनों से ट्रॉली लेकर लाइनों में खड़े हैं, न तो घर लौट पा रहे हैं और न ही भुगतान मिल रहा है। किसान अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रखने के लिए दिन-रात मंडियों में पहरा दे रहे हैं।
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नमी का बहाना, बढ़ती परेशानी : किसान महेंद्र गुर्जर और सुल्तान सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि गेहूं पूरी तरह तैयार है, लेकिन अधिकारी गुणवत्ता मानकों का हवाला देकर खरीद में देरी कर रहे हैं। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
42 केंद्रों पर होनी है खरीद : प्रशासन ने गेहूं खरीद के लिए 42 मंडी-केंद्र बनाए हैं और किसानों को सुविधाएं देने का दावा किया गया था, लेकिन धरातल पर किसान परेशान नजर आ रहे हैं। भाकियू (चढूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने सरकार से मांग की है कि नमी के नियमों में ढील दी जाए, खरीद प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
राजौंद मंडी में 63,958 क्विंटल खरीद : अनाज मंडी राजौंद में गेहूं की खरीद का कार्य इन दिनों जोरों पर है। शनिवार को राजौंद, जाखौली और किठाना केंद्रों पर कुल 63,958 क्विंटल गेहूं की खरीद दर्ज की गई। मार्केट कमेटी के सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि तीनों केंद्रों पर व्यवस्थाएं सुचारु हैं और किसानों को कोई असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।