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Kaithal News: सरकारी नीतियों के खिलाफ किसानों ने की सांकेतिक भूख हड़ताल
Thu, 06 Mar 2025 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 06 Mar 2025 01:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। खनौरी बॉर्डर पर जारी किसान नेता जगजीत डल्लेवाल के अनशन के 100 दिन पूरे होने पर बुधवार को किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया। जिला सचिवालय के पार्क में किसानों ने एक दिन का धरना देकर सांकेतिक भूख हड़ताल की।
धरने के दौरान भारतीय किसान यूनियन धन्ना भगत के प्रधान होशियार सिंह गिल ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की मांग को लंबे समय से अनदेखा कर रही है। किसानों की केवल एमएसपी के संदर्भ में कानून बनाने की मुख्य मांग है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बावजूद इसके सरकार यह मांग पूरा करने की बजाय किसानों पर ही अत्याचार कर रही है।
गिल ने कहा कि धरने के माध्यम से किसानों की मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके साथ ही मांग की है कि सरकार किसानों की तरफ ध्यान दे और उनकी मांगों पर तुरंत विचार कर उन्हें जल्द पूरा करे। इस मौके पर विभिन्न किसान नेता मौजूद रहे।
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ये हैं किसानों की मांगें
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किसानों और मजदूरों की पूर्ण कर्ज मुक्ति की जाए।
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भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को पूरे देश में पुनः लागू किया जाए एवं भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की लिखित सहमति व मार्केट रेट से चार गुणा मुआवजा देने के प्रावधान किया जाए।
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किसानों के लिए सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए और डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार फसलों के भाव तय किए जाएं।
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लखीमपुर खीरी नरसंहार के दोषियों को सजा एवं पीड़ित किसानों को न्याय दिया जाए।
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भारत विश्व व्यापार संगठन से बाहर आए एवं सभी मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक लगाई जाए।
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किसानों और खेत मजदूरों को पेंशन दी जाए।
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दिल्ली कूच के दौरान मृतक किसानों को मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए
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विद्युत संशोधन विधेयक 2020 को रद्द किया जाए।
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मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिन का रोजगार, 700 रुपये का मजदूरी भत्ता दिया जाए व मनरेगा को खेती के साथ जोड़ा जाए।
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कैथल। खनौरी बॉर्डर पर जारी किसान नेता जगजीत डल्लेवाल के अनशन के 100 दिन पूरे होने पर बुधवार को किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया। जिला सचिवालय के पार्क में किसानों ने एक दिन का धरना देकर सांकेतिक भूख हड़ताल की।
धरने के दौरान भारतीय किसान यूनियन धन्ना भगत के प्रधान होशियार सिंह गिल ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की मांग को लंबे समय से अनदेखा कर रही है। किसानों की केवल एमएसपी के संदर्भ में कानून बनाने की मुख्य मांग है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बावजूद इसके सरकार यह मांग पूरा करने की बजाय किसानों पर ही अत्याचार कर रही है।
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गिल ने कहा कि धरने के माध्यम से किसानों की मांगों को सरकार के समक्ष रखा गया। किसान नेताओं ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके साथ ही मांग की है कि सरकार किसानों की तरफ ध्यान दे और उनकी मांगों पर तुरंत विचार कर उन्हें जल्द पूरा करे। इस मौके पर विभिन्न किसान नेता मौजूद रहे।
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ये हैं किसानों की मांगें
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किसानों और मजदूरों की पूर्ण कर्ज मुक्ति की जाए।
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भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को पूरे देश में पुनः लागू किया जाए एवं भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की लिखित सहमति व मार्केट रेट से चार गुणा मुआवजा देने के प्रावधान किया जाए।
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किसानों के लिए सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए और डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार फसलों के भाव तय किए जाएं।
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लखीमपुर खीरी नरसंहार के दोषियों को सजा एवं पीड़ित किसानों को न्याय दिया जाए।
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भारत विश्व व्यापार संगठन से बाहर आए एवं सभी मुक्त व्यापार समझौतों पर रोक लगाई जाए।
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किसानों और खेत मजदूरों को पेंशन दी जाए।
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दिल्ली कूच के दौरान मृतक किसानों को मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए
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विद्युत संशोधन विधेयक 2020 को रद्द किया जाए।
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मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिन का रोजगार, 700 रुपये का मजदूरी भत्ता दिया जाए व मनरेगा को खेती के साथ जोड़ा जाए।