{"_id":"692756d9f1bd04ce7105199e","slug":"farmers-are-upset-due-to-non-receipt-of-compensation-and-are-making-rounds-kaithal-news-c-245-1-kht1011-141267-2025-11-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: मुआवजा न मिलने से किसान परेशान, काट रहे चक्कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: मुआवजा न मिलने से किसान परेशान, काट रहे चक्कर
Thu, 27 Nov 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 27 Nov 2025 01:06 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बारिश और बाढ़ से खराब हुई फसलों का मुआवजा न मिलने से किसान बेहद परेशान हैं। किसान लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो किसी अधिकारी की ओर से स्पष्ट जवाब मिल रहा है और न ही मुआवजा जारी करने की कोई समय-सीमा बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि सरकार और विभागों की चुप्पी उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है।
गौरतलब है कि जिले के 273 गांवों के करीब 11 हजार किसानों ने पोर्टल पर फसल खराबे के मुआवजे के लिए आवेदन कर रखा है। गुहला-चीका, सीवन, पूंडरी, कलायत और ढांड क्षेत्रों में धान सहित अन्य फसलों को बड़ा नुकसान हुआ था। किसानों के अनुसार पटवारियों द्वारा सभी प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद मुआवजा राशि जारी नहीं हुई।
किसानों ने बौने पौधे, हल्दी रोग से प्रभावित धान की फसल और घग्गर नदी की बाढ़ से हुए नुकसान के लिए भी आवेदन किया है। किसानों ने बताया कि सरकार ने दिवाली से पहले मुआवजा जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उनके खातों में एक रुपये की भी राशि नहीं पहुंची।
विज्ञापन
अगस्त–सितंबर माह में आई बाढ़ का असर सबसे ज्यादा गुहला-चीका क्षेत्र में दिखाई दिया था। आंकड़ों के मुताबिक 90 गांवों के 5096 किसानों की करीब 40 हजार एकड़ में धान की फसल बर्बाद हो गई थी। कई गांवों में 15 से 25 दिनों तक बाढ़ का पानी भरा रहा, जिससे फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। कई जगहों पर किसानों को हरे चारे तक की कमी का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा कैथल खंड में 2 हजार किसानों ने 17 हजार एकड़ और सीवन खंड में करीब 1300 किसानों ने 10 हजार एकड़ में हुए नुकसान का दावा किया है। किसानों का कहना है कि वे पहले से ही कर्ज और बढ़ती लागत का दबाव झेल रहे हैं।किसान नेता अंग्रेज सिंह ने कहा कि धान की खेती पर प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये तक की लागत आती है, जबकि खेतीबाड़ी योग्य जमीन का वार्षिक ठेका 50 से 80 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में मुआवजा न मिलना किसानों को भारी नुकसान की ओर धकेल रहा है।
विज्ञापन
कैथल। बारिश और बाढ़ से खराब हुई फसलों का मुआवजा न मिलने से किसान बेहद परेशान हैं। किसान लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो किसी अधिकारी की ओर से स्पष्ट जवाब मिल रहा है और न ही मुआवजा जारी करने की कोई समय-सीमा बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि सरकार और विभागों की चुप्पी उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है।
गौरतलब है कि जिले के 273 गांवों के करीब 11 हजार किसानों ने पोर्टल पर फसल खराबे के मुआवजे के लिए आवेदन कर रखा है। गुहला-चीका, सीवन, पूंडरी, कलायत और ढांड क्षेत्रों में धान सहित अन्य फसलों को बड़ा नुकसान हुआ था। किसानों के अनुसार पटवारियों द्वारा सभी प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसके बावजूद मुआवजा राशि जारी नहीं हुई।
विज्ञापन
किसानों ने बौने पौधे, हल्दी रोग से प्रभावित धान की फसल और घग्गर नदी की बाढ़ से हुए नुकसान के लिए भी आवेदन किया है। किसानों ने बताया कि सरकार ने दिवाली से पहले मुआवजा जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उनके खातों में एक रुपये की भी राशि नहीं पहुंची।
विज्ञापन
अगस्त–सितंबर माह में आई बाढ़ का असर सबसे ज्यादा गुहला-चीका क्षेत्र में दिखाई दिया था। आंकड़ों के मुताबिक 90 गांवों के 5096 किसानों की करीब 40 हजार एकड़ में धान की फसल बर्बाद हो गई थी। कई गांवों में 15 से 25 दिनों तक बाढ़ का पानी भरा रहा, जिससे फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। कई जगहों पर किसानों को हरे चारे तक की कमी का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा कैथल खंड में 2 हजार किसानों ने 17 हजार एकड़ और सीवन खंड में करीब 1300 किसानों ने 10 हजार एकड़ में हुए नुकसान का दावा किया है। किसानों का कहना है कि वे पहले से ही कर्ज और बढ़ती लागत का दबाव झेल रहे हैं।किसान नेता अंग्रेज सिंह ने कहा कि धान की खेती पर प्रति एकड़ 15 से 20 हजार रुपये तक की लागत आती है, जबकि खेतीबाड़ी योग्य जमीन का वार्षिक ठेका 50 से 80 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में मुआवजा न मिलना किसानों को भारी नुकसान की ओर धकेल रहा है।