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किसान को एमएसपी के अनुसार नहीं मिल रहा फसलों का मूल्य : चढूनी

Mon, 20 Oct 2025 03:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 20 Oct 2025 03:18 AM IST
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Farmers are not getting the price of their crops as per MSP: Chaduni
19kht_14अनाज मंडी में खरीद एजेंसी के मैनेजर से बात करते चढूनी
कलायत। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने रविवार को अनाजमंडी में ट्रांसपोर्ट कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि किसान को नमी के नाम पर उसकी फसल का एमएसपी नहीं मिल रहा।
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वे पिछले तीन माह से सरकार व अधिकारियों से मंडियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए पत्राचार कर रहे हैं। गिने चुने मिलर समर्थन मूल्य से नीचे दामों पर किसान की फसल खरीद कर उसे निर्धारित मूल्य पर सरकार के खाते में चढ़ा रहे हैं। किसान कितने समय तक मंडी में बैठ कर अपने धान की बिक्री की प्रतीक्षा करेगा।
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वह जानता है कि उसका धान मंडी में दूसरा मिलर तो देखने भी नहीं आएगा तो ऐसे में मजबूरन उसे निर्धारित मूल्य से कम पर दाम पर अपना धान बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से 1800 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीद कर प्रदेश की मंडियों में सरकारी रेट पर बेचा जा रहा है। हरियाणा प्रदेश में सरकारी रिकार्ड केे अनुसार 25 लाख टन पीआर धान पैदा हुआ पर अभी तक 64 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है।
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उन्होंने कहा कि उनकी टीम ने यूपी से अवैध रूप से धान लेकर आने वाले सैकड़ों ट्रक पकड़वाए हैं पर अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि या तो स्थिति में सुधार करे या फिर किसानों के आक्रोश का सामना करने को तैयार रहे। उन्होंने किसानों से भी जागरूक रहने का आह्वान किया।

उन्होंने मंडी व्यापारियों से अपील की कि माल की ढुलाई के लिए ट्रक स्थानीय यूनियन से ही लें बाहर से न मंगवाएं। भाईचारा ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रधान काला सहारण ने कहा कि यूनियन में 130 ट्रक हैं। सभी को बराबर ढुलाई का अवसर मिले। किसी को 20 चक्कर मिल रहे हैं किसी को एक भी नहीं। उन्होंने कहा कि यूनियन ने न तो भाड़ा में कोई रेट बढ़ाए हैं न ही ट्रकों की कोई कमी है उसके बावजूद भी व्यापारियों द्वारा बाहर की मंडियों से मंगवा कर ट्रकों को काम दिया जा रहा है। संवाद
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