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Kaithal News: मंडी में एक रुपये प्रति किलो फूलगोभी बेचने को मजबूर हैं किसान
Wed, 31 Dec 2025 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 31 Dec 2025 01:38 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सर्दी बढ़ रही है और गोभी के दाम गिरकर धड़ाम हैं। किसानों को फूलगोभी का भाव मिल रहा महज एक रुपये किलो... जी, हां यह कहना है किसानों का। उन्होंने बताया कि औने-पौने दामों में बेचने को वे गोभी बेचने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि मंडी में जहां तीन रुपये किलो भाव है वहीं शहर में 8 से 10 रुपये किलो के भाव से गोभी बिक रही है।
विडंबना है कि जिस सब्जी को किसान औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है, वही सब्जी शहर की गलियों, ठेलों और मोहल्लों में दोगुने-तिगुने दामों पर लोगों तक पहुंच रही है। फूलगोभी के दाम धड़ाम होने से किसानों में भारी मायूसी है। मंडी में भाव गिरते ही कई किसानों ने खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला कर जुताई शुरू कर दी है। जिले के कई गांवों में किसान मुनाफा न होने के कारण फसल को नष्ट करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि भाव गिरने से मजदूरी, ढुलाई तक नहीं निकल पा रहे हैं।
इस साल किसानों ने इसकी बड़े पैमाने पर खेती की है। जब फसल एक ही समय पर कटाई के लिए तैयार हो गई, तो मंडियों में आवक बहुत बढ़ गई और ऐसे में दाम गिर गए हैं। किसानों को उपज के लिए बहुत कम दाम मिल रहे हैं। कीमत का बड़ा अंतर बिचौलियों को फायदा पहुंचा रहा है। इसी से बाजार में भाव ज्यादा है।
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सीवन क्षेत्र में ज्यादा असर
सीवन क्षेत्र के अधिकांश किसान सब्जी की खेती पर निर्भर हैं। यहां लोकी, तोरई और आलू के अलावा बड़ी मात्रा में गोभी की खेती की जाती है। सितंबर माह में गोभी की बुवाई के बाद नवंबर-दिसंबर में फसल तैयार हो जाती है। आमतौर पर इन महीनों में शादी-विवाह का सीजन शुरू होने से सब्जियों के अच्छे दाम मिल जाते हैं, लेकिन इस बार किसान मंदी की मार झेलने को मजबूर हैं।
तीन साल से झेल रहे मार
सीवन के मनीष और पट्टी अफगान निवासी अशोक कुमार ने बताया कि तीन वर्षों से सब्जी उत्पादक किसान मंदी की मार झेल रहा है। बताया कि एक बीघा गोभी की फसल तैयार करने में करीब पांच से छह हजार रुपये का खर्च आता है। 20 दिन पहले भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो था, लेकिन बीते एक सप्ताह में दाम गिरकर धड़ाम हो गए।
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कैथल। सर्दी बढ़ रही है और गोभी के दाम गिरकर धड़ाम हैं। किसानों को फूलगोभी का भाव मिल रहा महज एक रुपये किलो... जी, हां यह कहना है किसानों का। उन्होंने बताया कि औने-पौने दामों में बेचने को वे गोभी बेचने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि मंडी में जहां तीन रुपये किलो भाव है वहीं शहर में 8 से 10 रुपये किलो के भाव से गोभी बिक रही है।
विडंबना है कि जिस सब्जी को किसान औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है, वही सब्जी शहर की गलियों, ठेलों और मोहल्लों में दोगुने-तिगुने दामों पर लोगों तक पहुंच रही है। फूलगोभी के दाम धड़ाम होने से किसानों में भारी मायूसी है। मंडी में भाव गिरते ही कई किसानों ने खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चला कर जुताई शुरू कर दी है। जिले के कई गांवों में किसान मुनाफा न होने के कारण फसल को नष्ट करने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि भाव गिरने से मजदूरी, ढुलाई तक नहीं निकल पा रहे हैं।
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इस साल किसानों ने इसकी बड़े पैमाने पर खेती की है। जब फसल एक ही समय पर कटाई के लिए तैयार हो गई, तो मंडियों में आवक बहुत बढ़ गई और ऐसे में दाम गिर गए हैं। किसानों को उपज के लिए बहुत कम दाम मिल रहे हैं। कीमत का बड़ा अंतर बिचौलियों को फायदा पहुंचा रहा है। इसी से बाजार में भाव ज्यादा है।
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सीवन क्षेत्र में ज्यादा असर
सीवन क्षेत्र के अधिकांश किसान सब्जी की खेती पर निर्भर हैं। यहां लोकी, तोरई और आलू के अलावा बड़ी मात्रा में गोभी की खेती की जाती है। सितंबर माह में गोभी की बुवाई के बाद नवंबर-दिसंबर में फसल तैयार हो जाती है। आमतौर पर इन महीनों में शादी-विवाह का सीजन शुरू होने से सब्जियों के अच्छे दाम मिल जाते हैं, लेकिन इस बार किसान मंदी की मार झेलने को मजबूर हैं।
तीन साल से झेल रहे मार
सीवन के मनीष और पट्टी अफगान निवासी अशोक कुमार ने बताया कि तीन वर्षों से सब्जी उत्पादक किसान मंदी की मार झेल रहा है। बताया कि एक बीघा गोभी की फसल तैयार करने में करीब पांच से छह हजार रुपये का खर्च आता है। 20 दिन पहले भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो था, लेकिन बीते एक सप्ताह में दाम गिरकर धड़ाम हो गए।