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Kaithal News: जाखौली के रसमंगल तीर्थ पर लगा मेला
Tue, 13 May 2025 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 13 May 2025 01:02 AM IST
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कैथल। बुद्ध पूर्णिमा पर सोमवार को जाखौली व सौंगल के मध्य में स्थित रस मंगल तीर्थ पर विशाल मेला लगा। मान्यता है कि रस मंगल का तीर्थ भी महाभारत काल से जुड़ा है। मेले में कई गांवों के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। प्राचीन इतिहास में रसमंगल का तीर्थ महाभारत काल की याद को समेटे हुए है। मेले में महिलाओं एवं बच्चों ने खूब खरीदारी की।
दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्राचीन पंच-मुखी हनुमान मंदिर के साथ साथ बाबा भोले-नाथ की पूजा अर्चना कर मन्नतें मागी। प्राचीन काल से ही ज्येष्ठ एवं कार्तिक मास की पूर्ण मासी को यहां मेला लगता है, जिसमें क्षेत्र के 12 गावों के लोग अपनी श्रद्धा व आस्था के केंद्र पर पहुंचकर मस्तक झुकाकर पूजा अर्चना करते आ रहे है।
पूर्वजों के समय से ही आसपास के सभी गावों में मान्यता चली आ रही है कि यह तीर्थ द्वापर युग में महाभारत के युद्ध से पूर्व अज्ञात वास के दौरान पाचों पाडवों द्वारा यहा आकर समय व्यतीत करने के बाद अस्तित्व में आया था। उसी दिन से इस तीर्थ पर एक मेला लगना शुरू हो गया जो आज भी विधिवत रूप से लगता आ रहा है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहा पर सच्चे मन से मागी गई मनौती व पूजा अर्चना अवश्य ही फलीभूत होती है। संवाद
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दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्राचीन पंच-मुखी हनुमान मंदिर के साथ साथ बाबा भोले-नाथ की पूजा अर्चना कर मन्नतें मागी। प्राचीन काल से ही ज्येष्ठ एवं कार्तिक मास की पूर्ण मासी को यहां मेला लगता है, जिसमें क्षेत्र के 12 गावों के लोग अपनी श्रद्धा व आस्था के केंद्र पर पहुंचकर मस्तक झुकाकर पूजा अर्चना करते आ रहे है।
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पूर्वजों के समय से ही आसपास के सभी गावों में मान्यता चली आ रही है कि यह तीर्थ द्वापर युग में महाभारत के युद्ध से पूर्व अज्ञात वास के दौरान पाचों पाडवों द्वारा यहा आकर समय व्यतीत करने के बाद अस्तित्व में आया था। उसी दिन से इस तीर्थ पर एक मेला लगना शुरू हो गया जो आज भी विधिवत रूप से लगता आ रहा है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहा पर सच्चे मन से मागी गई मनौती व पूजा अर्चना अवश्य ही फलीभूत होती है। संवाद
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