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संस्कृत विवि में महर्षि वाल्मीकि, कपिष्ठल वेदव्यास पीठ की स्थापना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2022 02:06 AM IST
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Establishment of Maharishi Valmiki, Kapisthal Veda Vyasa Peeth in Sanskrit University
5-कैथल। पत्रकार वार्ता में जानकारी देते महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. र? - फोटो : Kaithal
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में नए सत्र 2022-23 से महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ और कपिष्ठल वेदव्यास पीठ की स्थापना की गई है। महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ में उनसे जुड़ा हर प्रकार का साहित्य उपलब्ध होगा। इसके साथ-साथ यजुर्वेद की कठकपिष्ठल शाखा पर भी एक शोध पीठ स्थापित की गई है। शोध में पता चला है कि यजुर्वेद की इस शाखा की रचना कैथल में ही की गई थी।
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इसके अलावा विश्वविद्यालय में इसी सत्र से संस्कृत विषय में पीएचडी भी शुरू की जाएगी। पीठों की स्थापना और विश्वविद्यालय में पीएचडी के संबंध में कुलपति रमेश चंद्र भारद्वाज ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 30 जून को विवि में हुई शिक्षा परिषद एवं 18 जुलाई को हुई कार्य परिषद की बैठक में प्रबंधन ने उक्त निर्णय लिए हैं।
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कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान कुलपति ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि आर्ष शोध पीठ के तहत विवि में अध्ययन एवं शोध केंद्र बनाया जाएगा। इस पीठ के स्थापना का उद्देश्य आदि कवि महर्षि वाल्मीकि की कृतियों, उनके व्यक्तित्व के ऊपर किए गए समस्त शोध प्रबंधों, पत्र-पत्रिकाओं व विशेषकर रामायण के समस्त भिन्न-भिन्न भाषाओं के संस्करणों को एक जगह उपलब्ध कराना है। यह देश का पहला ऐसा शोध केंद्र होगा, जहां महर्षि वाल्मीकि के बारे में हर प्रकार की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। विद्यार्थी एवं शोधार्थी केंद्र का पूरा लाभ ले सकेंगे।
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इसके साथ ही विश्वविद्यालय में कपिष्ठल वेदव्यास पीठ की स्थापना की गई है। इसमें कपिष्ठल कठ संहिता का विद्यार्थियों को अध्ययन करवाया जाएगा। कपिष्ठल कठ संहिता कृष्ण यजुर्वेद की शाखा है, जिसे 1932 में लाहौर से प्रकाशित किया गया था। इसका उद्देश्य कैथल की पावन धरा के वैदिक एवं पौराणिक महत्व को वैश्विक पटल पर लाना है।

उन्होंने बताया कि अब नए शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय में पीएचडी की प्रवेश परीक्षा का आयोजन कर शोध छात्रों को पंजीकृत किया जाएगा। पीएचडी के लिए फिलहाल विवि में 20 सीटें निर्धारित हुई हैं। इसमें दो सीटें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कार्यरत प्रोफेसर्स के लिए आरक्षित की गई हैं। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त तक शास्त्री व आचार्य में दाखिले भी लिए जा रहे हैं।
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