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Kaithal News: पर्यावरण संरक्षण सबका कर्तव्य ः मनजीत
Tue, 15 Oct 2024 03:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 15 Oct 2024 03:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। डीएवी कॉलेज चीका में एनएसएस यूनिट व इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि के रूप में तहसीलदार मनजीत मलिक व नायब तहसीलदार बंसी लाल ने शिरकत की। मुख्यातिथि मनजीत मलिक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सबका कर्तव्य है।
उन्होंेने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर रूप धारण करती जा रही है। धान की फसल की कटाई के बाद जो अवशेष जलाएं जाते हैं उससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जिससे वायुमंडलीय ताप बढ़ता है जिससे मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि अवशेषों को जलाने से जमीन की ऊपरी स्तह पर रहने वाले मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं जिससे उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर फसल अवशेष प्रबंधन कर लिया जाए तो बहुत सी पर्यावरण संबंधी समस्याओं का निदान हो सकता है।
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नायब तहसीलदार बंसी लाल ने कहा कि फसल अवशेष का प्रबंध करने से मृदा की भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणवत्ता में वृद्धि होती है व वातावरण को प्रदूषण से भी बचाया जा सकता है। प्राचार्य अवतार सिहं ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर अभिवादन किया। इस अवसर पर एनएसएस अधिकारी नीरज सिंह, प्रो. वीरेंद्र पाल, कुनाल वर्मा, बंटी दास भी मौजूद रहे।
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गुहला-चीका। डीएवी कॉलेज चीका में एनएसएस यूनिट व इको क्लब के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्यातिथि के रूप में तहसीलदार मनजीत मलिक व नायब तहसीलदार बंसी लाल ने शिरकत की। मुख्यातिथि मनजीत मलिक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सबका कर्तव्य है।
उन्होंेने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर रूप धारण करती जा रही है। धान की फसल की कटाई के बाद जो अवशेष जलाएं जाते हैं उससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है जिससे वायुमंडलीय ताप बढ़ता है जिससे मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
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उन्होंने कहा कि अवशेषों को जलाने से जमीन की ऊपरी स्तह पर रहने वाले मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं जिससे उत्पादन एवं मृदा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर फसल अवशेष प्रबंधन कर लिया जाए तो बहुत सी पर्यावरण संबंधी समस्याओं का निदान हो सकता है।
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नायब तहसीलदार बंसी लाल ने कहा कि फसल अवशेष का प्रबंध करने से मृदा की भौतिक, रासायनिक व जैविक गुणवत्ता में वृद्धि होती है व वातावरण को प्रदूषण से भी बचाया जा सकता है। प्राचार्य अवतार सिहं ने मुख्य अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर अभिवादन किया। इस अवसर पर एनएसएस अधिकारी नीरज सिंह, प्रो. वीरेंद्र पाल, कुनाल वर्मा, बंटी दास भी मौजूद रहे।